रामनगर में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण जनभागीदारी का बना संदेश
वाराणसी: रामनगर क्षेत्र में एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत रविवार प्रातः प्रभु नारायण राजकीय इंटर कॉलेज परिसर में व्यापक पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण और मातृ सम्मान का संदेश दिया। अभियान के दौरान जनप्रतिनिधियों, पार्टी पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने भी पौधरोपण कर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया। विद्यालय परिसर में लगाए गए पौधों के संरक्षण का भी सभी ने सामूहिक संकल्प लिया ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
मां के सम्मान और प्रकृति संरक्षण का अनूठा संगम
एक पेड़ मां के नाम अभियान केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मां के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति दायित्व का बोध कराने वाला जन अभियान बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से किए गए आह्वान के बाद इस अभियान को पूरे देश में व्यापक जनसमर्थन मिला है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में भी प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बड़े स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि हरित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को गति मिल सके। इस अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं बल्कि उनका संरक्षण कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भी है।
विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि एक पेड़ मां के नाम अभियान भारतीय संस्कृति और प्रकृति के प्रति हमारी आस्था का प्रतीक है। मां हमें जीवन देती है और पेड़ पूरे समाज को जीवन देने का कार्य करते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। अधिक से अधिक पौधे लगाकर और उनका संरक्षण कर ही आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।
जनप्रतिनिधियों ने अभियान को जन आंदोलन बनाने का किया आह्वान
मंडल अध्यक्ष प्रीति सिंह ने कहा कि यह अभियान प्रत्येक परिवार को प्रकृति से जोड़ने का माध्यम है। यदि हर व्यक्ति अपनी मां के नाम एक पौधा लगाए और उसकी नियमित देखभाल करे तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन दिखाई देगा। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पौधरोपण कर इस अभियान को जन आंदोलन बनाने की अपील की।
जितेंद्र पांडेय उर्फ झुनझुन गुरु ने कहा कि पेड़ केवल छाया और ऑक्सीजन ही नहीं देते बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग को इस अभियान से जुड़कर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
सृजन श्रीवास्तव ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण और लगातार घटते हरित क्षेत्र के बीच पौधरोपण का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी मानते हुए नियमित रूप से पौधे लगाएं और उनके संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता रहे उपस्थित
कार्यक्रम में प्रीति सिंह बघेल अशोक जायसवाल जितेंद्र पांडेय सृजन श्रीवास्तव लल्लन सोनकर राजकुमार सिंह रितेश राय रितेश पाल गौतम भइयालाल सोनकर विनोद पटेल संतोष द्विवेदी शिवांग सिन्हा सहित अनेक जनप्रतिनिधि कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और पौधों की देखभाल का संकल्प लिया।
रामनगर जोनल अधिकारी के नेतृत्व में भी चला अभियान
एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत रामनगर जोनल अधिकारी के नेतृत्व में नवीन विद्यालय परिसर में भी पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर पार्षद लल्लन सोनकर पार्षद मोनिका यादव पार्षद पति मनोज यादव सफाई सुपरवाइजर संजय पाल जयप्रकाश शास्त्री सेराज खान मंजय पाल सहित कई अधिकारी कर्मचारी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ हरित समाज के निर्माण का संदेश दिया तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का संकल्प भी लिया।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मजबूत कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच पौधरोपण सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। एक पेड़ मां के नाम अभियान लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहा है। रामनगर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने वाला प्रेरक प्रयास बनकर सामने आया जिसमें जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
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