वाराणसी में जमीन की रजिस्ट्री पर बड़ी रोक गंगा और वरुणा एलिवेटेड परियोजनाओं से प्रभावित 50 से अधिक गांवों में खरीद बिक्री प्रतिबंधित
वाराणसी: शहर में प्रस्तावित गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को लेकर जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन परियोजनाओं से प्रभावित 50 से अधिक गांवों में भूमि की रजिस्ट्री बैनामा दान पत्र अदला बदली तथा सरकारी भूमि के आवंटन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और विवादमुक्त बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है ताकि भविष्य में मुआवजा वितरण और स्वामित्व संबंधी किसी प्रकार की जटिलता उत्पन्न न हो।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के आधार पर जिला प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। वर्तमान समय में गंगा एलिवेटेड और वरुणा एलिवेटेड परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में यदि प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद बिक्री या स्वामित्व परिवर्तन होता है तो राजस्व अभिलेखों के सत्यापन और मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित गांवों में जमीन से जुड़े सभी प्रकार के हस्तांतरण पर अस्थायी प्रतिबंध लागू कर दिया है।
गंगा एलिवेटेड परियोजना से प्रभावित गांवों में लागू होगा आदेश
सदर तहसील के अंतर्गत आने वाले रमना डोमरी सीरगोवर्भधनपुर छित्तूपुर भगतपुर सुजाबाद नगवा नरिया किला कोहना कोदोपुर वाजिदपुर और रामनगर गंगा एलिवेटेड परियोजना से प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किए गए हैं। इन गांवों से होकर प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण की योजना है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में आगे बढ़ रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का नया भूमि हस्तांतरण प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी किए बिना नहीं किया जा सकेगा।
सदर तहसील के इन गांवों पर भी लागू रहेगी रजिस्ट्री रोक
वरुणा एलिवेटेड परियोजना के अंतर्गत सदर तहसील के हुकुलगंज शहरखास पहड़िया मरखरा पिसौर दनियालपुर छितौनी कोटवा किला कोहना इन्द्रपुर सिकरौल बड़ागांव प्रथम चुप्पुर धरसौना चौका जोगापुर काजी सराय सहमलपुर अलहदपुर महमूदपुर भट्ठा कन्जनपुर कंटोनमेंट क्षेत्र और चिरईगांव सहित कई गांव और क्षेत्र प्रभावित घोषित किए गए हैं। इन सभी स्थानों पर भूमि की रजिस्ट्री और अन्य हस्तांतरण संबंधी प्रक्रियाएं अगले आदेश तक स्थगित रहेंगी।
पिंडरा तहसील के गांव भी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल
पिंडरा तहसील के महादेवपुर प्रतापपट्टी बेजनपुर दनियालपुर करौमा घनसरी बेजलपट्टी दासपुर कोरौतापुर सहदेवदीनपुर पश्चिमपुर चमांव कोड़रिया अहिरान अनेपुर भगतुपुर वाजिदपुर प्रतापपट्टी और मंशापुर गांव भी इस परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किए गए हैं। इन गांवों में भी भूमि के स्वामित्व परिवर्तन और सरकारी भूमि आवंटन संबंधी कार्यों पर रोक लागू कर दी गई है।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया को लेकर प्रशासन सतर्क
जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के तहत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई प्रगति पर है। इसी के मद्देनजर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 80 के अंतर्गत प्रभावित क्षेत्रों की सरकारी भूमि के आवंटन पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि यदि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां होती हैं तो वास्तविक भू स्वामियों की पहचान और मुआवजा निर्धारण में विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए समय रहते यह कदम उठाया गया है।
भूमि स्वामियों के लिए क्या होगा प्रभाव
इस आदेश के लागू होने के बाद प्रभावित गांवों के भूमि स्वामी अपनी जमीन की सामान्य रजिस्ट्री नहीं करा सकेंगे। इसके साथ ही दान पत्र अदला बदली और अन्य प्रकार के स्वामित्व हस्तांतरण पर भी रोक प्रभावी रहेगी। जिन लोगों की भूमि परियोजना क्षेत्र में आती है उन्हें किसी भी प्रक्रिया से पहले संबंधित तहसील और जिला प्रशासन से आवश्यक जानकारी प्राप्त करनी होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को व्यवस्थित और विवाद रहित बनाए रखने के लिए लागू की गई है।
वाराणसी की यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं दोनों परियोजनाएं
गंगा एलिवेटेड और वरुणा एलिवेटेड परियोजनाओं को वाराणसी की प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर के भीतरी हिस्सों में यातायात दबाव कम होने की उम्मीद है। साथ ही रिंग रोड और राष्ट्रीय राजमार्गों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा शहर के विभिन्न क्षेत्रों के बीच आवागमन अधिक सुगम और तेज हो सकेगा। वर्तमान में प्रभावित गांवों के हजारों भू स्वामियों की नजरें भूमि अधिग्रहण की आगामी प्रक्रिया और मुआवजा निर्धारण पर टिकी हुई हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह प्रतिबंध अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा और भूमि से संबंधित सभी लेनदेन निर्धारित नियमों के अनुसार ही किए जा सकेंगे।
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