लखनऊ अग्निकांड के मासूमों को रामनगर ने दी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि, विश्व हिंदू महासंघ के नेतृत्व में निकला भावनात्मक कैंडल मार्च
प्रदेश मंत्री तपेश्वर चौधरी और नगर अध्यक्ष आशीष राज गुप्ता के नेतृत्व में जुटे सैकड़ों लोग, दिवंगत छात्रों की स्मृति में रखा मौन
वाराणसी: के रामनगर में आज मंगलवार की शाम शोक, संवेदना और सामाजिक एकजुटता का एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर उपस्थित व्यक्ति को भावुक कर दिया। लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक अग्निकांड में जान गंवाने वाले मासूम छात्रों की स्मृति में विश्व हिंदू महासंघ के तत्वावधान में लाल बहादुर शास्त्री चौक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और युवाओं ने भाग लेकर दिवंगत छात्रों को श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम का नेतृत्व विश्व हिंदू महासंघ के प्रदेश मंत्री तपेश्वर चौधरी और नगर अध्यक्ष आशीष राज गुप्ता ने किया। लाल बहादुर शास्त्री चौक पर स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा के समक्ष लोगों ने एकत्र होकर दिवंगत छात्रों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद कैंडल मार्च निकाला गया जिसमें हाथों में मोमबत्तियां लिए सैकड़ों लोग मौन भाव से आगे बढ़ते रहे। पूरे क्षेत्र में शोक और संवेदना का वातावरण बना रहा तथा उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।
हादसे ने पूरे समाज को झकझोरा
लखनऊ में हुए इस अग्निकांड ने केवल प्रभावित परिवारों को ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश को गहरे दुःख में डाल दिया है। बेहतर भविष्य और उच्च शिक्षा का सपना लेकर कोचिंग संस्थानों में अध्ययन कर रहे छात्रों की असमय मृत्यु ने समाज को भीतर तक झकझोर दिया है। श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह घटना उन हजारों परिवारों की पीड़ा का प्रतीक बन गई है जो अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात संघर्ष करते हैं। मासूम छात्रों की असामयिक मृत्यु ने हर संवेदनशील व्यक्ति को दुखी किया है और यही कारण रहा कि रामनगर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग स्वतः शामिल हुए।
दिवंगत छात्रों के प्रति व्यक्त की गहरी संवेदना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश मंत्री तपेश्वर चौधरी ने कहा कि लखनऊ की यह घटना अत्यंत दुखद और हृदय विदारक है। जिन बच्चों ने अपने जीवन में अनेक सपने संजोए थे वे आज हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ परिवारों की क्षति नहीं बल्कि पूरे समाज की अपूरणीय क्षति है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवारों को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति दें।
नगर अध्यक्ष आशीष राज गुप्ता ने कहा कि समाज को ऐसे अवसरों पर एकजुट होकर पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने श्रद्धांजलि सभा में शामिल सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रामनगर की जनता ने मानवता और संवेदनशीलता का परिचय दिया है।
मोमबत्तियों की रोशनी में दिखी संवेदना की मिसाल
कैंडल मार्च के दौरान पूरा क्षेत्र शोकमय वातावरण में डूबा दिखाई दिया। मोमबत्तियों की रोशनी के बीच उपस्थित लोग मौन रहकर दिवंगत छात्रों को याद करते रहे। कई लोगों की आंखें नम थीं और हर चेहरे पर इस दुखद घटना की पीड़ा स्पष्ट दिखाई दे रही थी। श्रद्धांजलि कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि उन परिवारों के दुःख को साझा करने का प्रयास था जिन्होंने इस हादसे में अपने प्रियजनों को खो दिया।
कार्यक्रम में रवि जायसवाल सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि समाज को ऐसी घटनाओं से सीख लेते हुए सुरक्षा मानकों के प्रति अधिक जागरूक होना होगा। उपस्थित लोगों ने दिवंगत छात्रों के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उनके अधूरे सपनों को याद किया और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
श्रद्धांजलि सभा और कैंडल मार्च में बृजेश बारी, ओमप्रकाश केशरी, पद्मिनी विश्वकर्मा, रामू यादव, शेखर विश्वकर्मा, नारायण माली, प्रिंस रजक सहित बड़ी संख्या में विश्व हिंदू महासंघ के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में दिवंगत छात्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
रामनगर में आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा और कैंडल मार्च समाज की उस सामूहिक संवेदना का प्रतीक बन गया जिसमें लोगों ने दुख की इस घड़ी में एकजुट होकर दिवंगत छात्रों को अंतिम नमन किया। मोमबत्तियों की टिमटिमाती रोशनी और मौन श्रद्धांजलि के बीच पूरा वातावरण मानो उन मासूम जिंदगियों को याद कर रहा था जिनके सपने समय से पहले ही थम गए।
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