वाराणसी में बीएचयू छात्र नेता गौरव सिंह हत्याकांड में बड़ा न्यायिक मोड़ तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर रोयना सिंह को अदालत ने बनाया आरोपी
वाराणसी: बहुचर्चित बीएचयू छात्र नेता गौरव सिंह हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया ने एक महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है। मामले की सुनवाई कर रही अदालत ने तत्कालीन बीएचयू चीफ प्रॉक्टर रोयना सिंह को आरोपी के रूप में तलब करने का आदेश दिया है। अदालत का यह आदेश लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया के बीच आया है और इसे पूरे मामले में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। इस आदेश के बाद अब मामले में उनकी भूमिका का परीक्षण भी नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। यह आदेश इस आधार पर पारित किया गया कि उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया उनके विरुद्ध सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। यह आदेश दोष सिद्धि नहीं बल्कि मुकदमे में आरोपी के रूप में शामिल कर सुनवाई किए जाने की न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
वर्ष दो हजार उन्नीस में हुई थी छात्र नेता गौरव सिंह की हत्या
गौरव सिंह बीएचयू के छात्र नेता थे और विश्वविद्यालय परिसर में उनकी सक्रिय पहचान थी। दो अप्रैल दो हजार उन्नीस की शाम विश्वविद्यालय परिसर के बाहर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई थीं। गंभीर रूप से घायल गौरव सिंह को तत्काल अस्पताल ले जाया गया जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में भारी तनाव फैल गया था और बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर उतर आए थे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा था।
एफआईआर में शुरुआत से ही लगाया गया था साजिश का आरोप
गौरव सिंह के पिता द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में कई नामजद आरोपियों के साथ तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर रोयना सिंह का भी नाम शामिल किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि हत्या एक सुनियोजित साजिश का परिणाम थी और इसमें विभिन्न व्यक्तियों की भूमिका रही। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। जांच के दौरान कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई जबकि मामले के अन्य पहलुओं की अलग अलग स्तर पर जांच जारी रही।
अदालत के आदेश का क्या है कानूनी महत्व
किसी व्यक्ति को अदालत द्वारा आरोपी बनाए जाने का अर्थ यह नहीं होता कि वह दोषी घोषित हो गया है। भारतीय दंड प्रक्रिया के अनुसार यदि न्यायालय को उपलब्ध साक्ष्यों से यह प्रतीत होता है कि किसी व्यक्ति की भूमिका की सुनवाई आवश्यक है तो उसे आरोपी के रूप में तलब किया जा सकता है। अंतिम निर्णय मुकदमे के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों गवाहों की गवाही और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर ही होगा। सर्वोच्च न्यायालय भी अपने अनेक निर्णयों में स्पष्ट कर चुका है कि यदि न्यायालय के समक्ष मजबूत और विश्वसनीय प्रथम दृष्टया सामग्री उपलब्ध हो तो अतिरिक्त आरोपी को भी मुकदमे में शामिल किया जा सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरव सिंह की हत्या से पहले विश्वविद्यालय परिसर में छात्र गुटों के बीच विवाद और तनाव की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस जांच में भी इस पृष्ठभूमि का उल्लेख किया गया था। हत्या के बाद पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से हथियार बरामद करने का दावा किया था। उस समय प्रशासन ने यह भी कहा था कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
पीड़ित परिवार को न्याय की नई उम्मीद
अदालत के ताजा आदेश के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने की उम्मीद जताई है। परिवार का कहना है कि वह लंबे समय से निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा था। दूसरी ओर यह भी स्पष्ट है कि अब आगे की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा और न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अंतिम निर्णय देगा।
आगे क्या होगा
अदालत के आदेश के बाद अब रोयना सिंह को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद मुकदमे की आगे की सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चलेगी। अभियोजन और बचाव पक्ष अपने अपने साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत करेंगे। अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा समस्त साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही सुनाया जाएगा। फिलहाल अदालत का आदेश इस बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है जिसने कई वर्षों से लंबित इस मामले को एक नई दिशा दी है।
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