रामनगर में कांजी हाउस की मांग हुई बुलंद, पशुपालकों ने महापौर से लगाई गुहार
स्थानीय पशु बंदी गृह बंद होने से बढ़ीं मुश्किलें, किसानों बोले समय, धन और श्रम तीनों पर पड़ रहा अतिरिक्त बोझ
वाराणसी: रामनगर क्षेत्र में पशुपालकों और किसानों की लंबे समय से चली आ रही एक महत्वपूर्ण समस्या अब खुलकर सामने आने लगी है। क्षेत्र में पूर्व से संचालित पशु बंदी गृह जिसे स्थानीय स्तर पर कांजी हाउस के नाम से जाना जाता था, उसके बंद होने के बाद पशुपालकों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर रामनगर के किसानों और पशुपालकों ने एकजुट होकर नगर निगम वाराणसी के महापौर को ज्ञापन सौंपा और क्षेत्र में पूर्व की तरह पशु बंदी गृह की व्यवस्था बहाल करने अथवा नए पशु बंदी गृह के निर्माण की मांग की। पशुपालकों का कहना है कि यह केवल सुविधा का विषय नहीं बल्कि उनकी आजीविका, समय और आर्थिक संसाधनों से जुड़ा गंभीर मामला है।
नगर पालिका काल में उपलब्ध थी स्थानीय सुविधा
ज्ञापन में बताया गया कि जब रामनगर नगर पालिका परिषद के अंतर्गत आता था तब क्षेत्र में एक व्यवस्थित पशु बंदी गृह संचालित होता था। यदि कोई गाय, बैल अथवा अन्य पशु खुले में घूमते हुए पकड़ा जाता था तो उसे स्थानीय कांजी हाउस में रखा जाता था। पशु स्वामी निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर और आवश्यक शुल्क जमा कर अपने पशु को आसानी से वापस प्राप्त कर लेते थे। इस व्यवस्था से प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से संचालित होते थे और पशुपालकों को भी अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ती थी। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध यह सुविधा किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी राहत मानी जाती थी।
नगर निगम में विलय के बाद बढ़ी परेशानी
पशुपालकों का कहना है कि रामनगर के नगर निगम वाराणसी में विलय के बाद स्थानीय कांजी हाउस की व्यवस्था समाप्त हो गई। वर्तमान स्थिति में यदि कोई पशु पकड़ा जाता है तो उसे शहर के दूर स्थित पशु बंदी गृह में भेज दिया जाता है। ऐसे में पशु मालिकों को अपने पशु को छुड़ाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार पूरे दिन का समय इसी प्रक्रिया में निकल जाता है। किसानों का कहना है कि खेती और पशुपालन के कार्यों के बीच इस प्रकार की अतिरिक्त भागदौड़ उनके लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
ग्रामीणों के अनुसार छोटे और मध्यम वर्ग के किसान पहले से ही बढ़ती लागत, पशु आहार के खर्च और कृषि संबंधी अन्य चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में पशु छुड़ाने के लिए यात्रा व्यय, अतिरिक्त खर्च और समय की हानि उनकी समस्याओं को और बढ़ा रही है। कई मामलों में पशुपालकों को एक से अधिक बार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं जिससे उनकी दैनिक आय और कार्य प्रभावित होते हैं।
पशुपालन को बढ़ावा देने की नीति और जमीनी स्थिति
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकार द्वारा पशुपालन, गौसंवर्धन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लोगों को पशुपालन अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर पशु बंदी गृह जैसी आवश्यक सुविधाओं का अभाव पशुपालकों के सामने नई समस्याएं खड़ी कर रहा है। पशुपालकों का मानना है कि जब तक आधारभूत व्यवस्थाएं मजबूत नहीं होंगी तब तक पशुपालन को बढ़ावा देने के प्रयासों का पूरा लाभ जमीनी स्तर पर नहीं मिल पाएगा।
सैकड़ों परिवारों को मिल सकता है लाभ
स्थानीय लोगों के अनुसार रामनगर और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन से जुड़े हुए हैं। यदि क्षेत्र में पुनः कांजी हाउस की व्यवस्था शुरू की जाती है या नया पशु बंदी गृह बनाया जाता है तो इसका सीधा लाभ सैकड़ों परिवारों को मिलेगा। इससे पशुओं के संरक्षण और प्रबंधन की व्यवस्था बेहतर होगी तथा आवारा पशुओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान में भी सहायता मिलेगी। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि रामनगर जैसे बड़े और घनी आबादी वाले क्षेत्र में पशु बंदी गृह की उपलब्धता वर्तमान समय की एक आवश्यक जरूरत बन चुकी है।
नंदलाल चौहान के नेतृत्व में सौंपा गया ज्ञापन
पशुपालकों और किसानों द्वारा यह ज्ञापन नंदलाल चौहान के नेतृत्व में नगर निगम वाराणसी के महापौर को सौंपा गया। ज्ञापन देने वालों में नंदलाल चौहान, सुरेश यादव, प्रदीप गुप्ता, गोविंद, बल्ली शर्मा, संजय यादव, रामजन्म सहित अनेक पशुपालक और किसान शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि जनहित और पशुपालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रामनगर क्षेत्र में पशु बंदी गृह की व्यवस्था को पुनः बहाल किया जाए अथवा आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए पशु बंदी गृह का निर्माण कराया जाए।
स्थायी समाधान की उठी मांग
ज्ञापन के माध्यम से महापौर से आग्रह किया गया कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं। पशुपालकों का कहना है कि यह मुद्दा केवल पशुओं के प्रबंधन तक सीमित नहीं है बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों और उनकी आर्थिक गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। उनका मानना है कि यदि इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो रामनगर क्षेत्र के किसानों, पशुपालकों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी तथा स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था भी अधिक प्रभावी बन सकेगी।
LATEST NEWS