वाराणसी में दिवंगत गोताखोरों के परिजनों को मिली आर्थिक सहायता श्रद्धांजलि सभा में समाज ने निभाई संवेदनशील जिम्मेदारी
वाराणसी: दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस चौकी के सामने सोमवार को मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास की ओर से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में हाल के दिनों में अलग अलग हादसों में जान गंवाने वाले निषाद समाज के दो युवकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान संस्था की ओर से दोनों दिवंगत युवकों के परिजनों को पच्चीस पच्चीस हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे केवल आर्थिक सहयोग नहीं बल्कि दुख की घड़ी में परिवारों के साथ समाज की सहभागिता और मानवीय संवेदना का प्रतीक बताया।
दो अलग अलग हादसों में गई थी दोनों युवकों की जान
श्रद्धांजलि सभा में संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि राकेश साहनी की मृत्यु सिद्धनाथ दरी क्षेत्र में हुए एक हादसे के दौरान हुई थी। वहीं रामनगर निवासी किशन साहनी की करंट लगने से जान चली गई थी। दोनों घटनाओं ने उनके परिवारों के साथ साथ निषाद समाज को भी गहरा आघात पहुंचाया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने दिवंगत युवकों के जीवन और समाज के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
संकट की घड़ी में समाज को साथ खड़ा रहने का संदेश
मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपने सदस्य को खोना सबसे बड़ा दुख होता है। ऐसे समय में केवल सांत्वना ही नहीं बल्कि हर संभव सहयोग भी जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि समाज की एकजुटता ही पीड़ित परिवारों को मानसिक और सामाजिक संबल देती है। संस्था ने भविष्य में भी जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
गोताखोरों की भूमिका और उनके सामने मौजूद चुनौतियां
वाराणसी में गंगा घाटों पर कार्य करने वाले गोताखोर वर्षों से जल दुर्घटनाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। किसी के नदी में डूबने की सूचना मिलने पर सबसे पहले यही लोग अपनी जान जोखिम में डालकर खोजबीन और बचाव अभियान में जुट जाते हैं। कई बार तेज धारा खराब मौसम और सीमित संसाधनों के बीच उन्हें काम करना पड़ता है। ऐसे जोखिम भरे कार्य के बावजूद अधिकांश गोताखोर साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं और उनके परिवार पूरी तरह उनके श्रम पर निर्भर रहते हैं।
आर्थिक सहायता से मिला परिवारों को संबल
कार्यक्रम के दौरान दोनों दिवंगत युवकों के परिजनों को पच्चीस पच्चीस हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। उपस्थित लोगों ने कहा कि किसी अपने की कमी को कोई सहायता पूरा नहीं कर सकती लेकिन कठिन समय में मिला सहयोग परिवारों को यह भरोसा देता है कि समाज उनके साथ खड़ा है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने दिवंगत युवकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।
कई समाजसेवी और पदाधिकारी रहे मौजूद
श्रद्धांजलि सभा में प्रमोद माझी शंभू निषाद बबलू अजीत साहनी और बाबू सहित समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत युवकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि समाज की वास्तविक पहचान विपरीत परिस्थितियों में एक दूसरे का साथ देने से होती है और यही भावना आगे भी कायम रहनी चाहिए।
पृष्ठभूमि
वाराणसी में गंगा घाटों से जुड़े गोताखोर और निषाद समाज के लोग लंबे समय से जल सुरक्षा और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। दुर्घटनाओं के दौरान उनका योगदान अक्सर सामने आता है लेकिन जोखिम भरे कार्य के बावजूद उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सामाजिक संगठनों द्वारा पीड़ित परिवारों की सहायता के प्रयास समाज में सहयोग और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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