वाराणसी में वन्यजीव तस्करी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश तीन गिरफ्तार
वाराणसी: प्रतिबंधित वन्यजीवों के अंगों की तस्करी के नाम पर लोगों को फंसाकर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का एसटीएफ और वन विभाग की संयुक्त टीम ने पर्दाफाश किया है। संयुक्त कार्रवाई के दौरान सारनाथ थाना क्षेत्र के फरीदपुर स्थित स्वास्तिक होम स्टे से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मध्य प्रदेश के सहडोल निवासी प्रभात चतुर्वेदी गोरखपुर के कैंपियरगंज निवासी गिरधारी मौर्या तथा बस्ती जिले के मुंडेरवा निवासी संजीव कुमार सिंह के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से मॉनिटर लिजर्ड के 14 अंग टाइगर के दो नाखून एक लाख अट्ठावन हजार रुपये वन अधिकारी के दो फर्जी पहचान पत्र तथा चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
वन्यजीव तस्करी का झांसा देकर रची जाती थी ठगी की साजिश
एसटीएफ के अनुसार गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी। आरोपी पहले लोगों को पुराने दुर्लभ सिक्कों के नाम पर मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाते थे। जब कोई व्यक्ति रुपये लेकर उनके संपर्क में पहुंचता था तब उससे धनराशि हड़पने के बाद उसे वन्यजीव तस्करी के मामले में फंसाने की साजिश रची जाती थी। इस पूरे खेल में आरोपी खुद ही वन्यजीव तस्करी की सूचना संबंधित एजेंसियों को देकर कार्रवाई कराने का प्रयास करते थे ताकि पीड़ित व्यक्ति कानून के शिकंजे में फंस जाए और गिरोह आसानी से रुपये लेकर निकल सके।
डब्ल्यूसीसीबी की सूचना पर शुरू हुई जांच
एसटीएफ को वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो से सूचना मिली थी कि प्रभात चतुर्वेदी वाराणसी में मॉनिटर लिजर्ड के अंग और टाइगर के नाखून की अवैध खरीद फरोख्त की जानकारी दे रहा है तथा कथित तस्करों को पकड़वाने का दावा कर रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए निरीक्षक अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में एसटीएफ और वन विभाग की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की। जांच के दौरान फरीदपुर अंडरपास के पास प्रभात चतुर्वेदी मिला। उसकी निशानदेही पर स्वास्तिक होम स्टे के कमरे की तलाशी ली गई जहां से वन्यजीवों के अंग बरामद हुए। पूछताछ के दौरान मामला संदिग्ध प्रतीत होने पर जांच का दायरा बढ़ाया गया और पूरे षड्यंत्र का खुलासा हो गया।
पुराने सिक्कों के नाम पर लोगों से ऐंठते थे रुपये
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि गिरोह में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा गाजीपुर निवासी दीनानाथ यादव तथा बिहार निवासी दीपक और संतोष भी शामिल हैं। गिरोह पहले नकली पुराने सिक्के तैयार करता था और फिर ऐसे लोगों की तलाश करता था जिन्हें यह विश्वास दिलाया जा सके कि पुराने सिक्कों की खरीद बिक्री से उनका पैसा तुरंत दोगुना हो जाएगा। इसी योजना के तहत चोलापुर क्षेत्र के मोहनदासपुर निवासी नीरज कुमार मौर्या को भी अपने जाल में फंसाया गया।
पांच लाख रुपये लेकर पहुंचे पीड़ित को फंसाने की थी तैयारी
जांच के अनुसार नीरज कुमार मौर्या अपने परिचित अभिषेक दूबे से पांच लाख रुपये लेकर गिरोह के सदस्यों के पास पहुंचे थे। आरोप है कि दीनानाथ यादव और दीपक रुपये लेकर वहां से फरार हो गए। इसके बाद पहले से बनाई गई योजना के अनुसार एसटीएफ और वन विभाग को सूचना देकर मौके पर छापा डलवाया गया ताकि नीरज कुमार मौर्या को वन्यजीव तस्करी के मामले में आरोपी बनाया जा सके। हालांकि संयुक्त टीम को मामला संदिग्ध लगा और गहन पूछताछ के बाद पूरे षड्यंत्र का खुलासा हो गया।
एक लाख अट्ठावन हजार रुपये बरामद अन्य आरोपियों की तलाश जारी
पूछताछ के आधार पर प्रभात चतुर्वेदी की निशानदेही पर उसके हिस्से के एक लाख अट्ठावन हजार रुपये भी बरामद किए गए। जांच एजेंसियां फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। पुलिस का कहना है कि गिरोह के नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य मामलों की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे रैकेट का खुलासा किया जा सके।
थाना प्रभारी ने दी कार्रवाई की जानकारी
सारनाथ थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की विस्तृत जांच जारी है तथा फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस और संबंधित एजेंसियों की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।
LATEST NEWS