चंदौली में वन भूमि से कब्जा हटाने पहुंची टीम पर पथराव चार घंटे चला विवाद 18 से अधिक हिरासत में
चंदौली में वन भूमि से कब्जा हटाने पहुंची टीम का ग्रामीणों ने किया विरोध
चंदौली: नौगढ़ थाना क्षेत्र के जयमोहनी रेंज के भरदुआ गांव में वन भूमि से अवैध कब्जा हटाने पहुंची वन विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि ग्रामीणों की ओर से टीम पर पथराव और लाठी डंडों से हमला किए जाने का आरोप है। इस घटना में वन विभाग और राजस्व विभाग के कई कर्मचारी घायल हो गए। विवाद करीब चार घंटे तक चला। स्थिति बिगड़ने की सूचना पर सात थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। पुलिस ने मामले में 18 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई है। बाद में पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल भी मौके पर पहुंचे।
30 हेक्टेयर वन भूमि पर खेती का मामला
वन विभाग के अनुसार जयमोहनी रेंज के भैसोड़ा कंपार्टमेंट संख्या 14 में करीब 30 हेक्टेयर सरकारी वन भूमि पर लंबे समय से कब्जा कर खेती की जा रही थी। विभाग के मुताबिक इस भूमि पर धान और मिर्च की फसल बोई गई थी। वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव की ओर से मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई। इसके बाद जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के निर्देश पर बुधवार को प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने वन भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए अभियान शुरू किया। कार्रवाई का उद्देश्य वन भूमि को दोबारा विभागीय कब्जे में लेना और वहां किए गए अतिक्रमण को हटाना बताया गया।
रोटावेटर से नष्ट कराई गई फसल
एसडीएम नौगढ़ अमरचंद वर्मा सीओ देवेंद्र कुमार और तहसीलदार राहुल सिंह के नेतृत्व में प्रशासन राजस्व विभाग तथा वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। नौगढ़ चंद्रप्रभा और मझगांई रेंज की वन टीम भी अभियान में शामिल रही। अधिकारियों की मौजूदगी में रोटावेटर चलाकर करीब 30 हेक्टेयर वन भूमि पर लगी धान और मिर्च की फसल को नष्ट कराया गया। फसल हटाने के बाद वन भूमि को दोबारा कब्जे में लिए जाने से रोकने के लिए चार जेसीबी की मदद से सुरक्षा खाई भी खुदवाई गई। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई के बाद भूमि को वन विभाग के कब्जे में ले लिया गया है।
कार्रवाई का विरोध करने पहुंचे ग्रामीण
वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने फसल नष्ट करने और भूमि से हटाए जाने का विरोध किया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आरोप है कि इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने संयुक्त टीम पर पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद लाठी डंडों से भी हमला किए जाने की बात सामने आई। अचानक हुए विरोध और हमले से मौके पर अफरातफरी मच गई। वन विभाग और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा के लिए पीछे हटना पड़ा।
वन दरोगा और वन रक्षक सहित कई कर्मचारी घायल
पथराव और मारपीट की घटना में वन दरोगा प्रशांत वनरक्षक मुलायम भोला और प्रमोद समेत कई कर्मचारी घायल बताए गए हैं। तीन से चार लेखपालों के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। एक दैनिक कर्मचारी के साथ भी मारपीट किए जाने की बात कही गई है। घायल कर्मचारियों को उपचार के लिए ले जाया गया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने का प्रयास किया। विवाद के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच भी धक्का मुक्की की स्थिति बनी। करीब चार घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को नियंत्रित किया।
सात थानों की पुलिस पहुंची 18 से अधिक हिरासत में
मामले की गंभीरता को देखते हुए सात थानों की पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस बल के पहुंचने के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 18 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात कर दी गई है। पुलिस और प्रशासन की टीम पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने भी स्थिति का जायजा लिया। पुलिस की मौजूदगी में वन विभाग और प्रशासन की टीम ने अपनी कार्रवाई पूरी की।
ग्रामीणों ने 50 वर्षों से खेती करने का किया दावा
कार्रवाई का विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि वह संबंधित जमीन पर करीब 50 वर्षों से खेती करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती होती रही है और अचानक उन्हें वहां से हटाया जा रहा है। इसी आधार पर ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्रवाई का विरोध किया और जमीन खाली करने से इनकार किया। ग्रामीणों की ओर से लंबे समय से भूमि पर खेती किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि संबंधित भूमि सरकारी वन क्षेत्र के अंतर्गत आती है और वहां किसी भी प्रकार के निजी कब्जे या खेती की अनुमति नहीं है।
वन भूमि पर दोबारा कब्जा रोकने की तैयारी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार करीब 30 हेक्टेयर भूमि से फसल हटाने और सुरक्षा खाई खुदवाने के बाद जमीन को विभागीय कब्जे में ले लिया गया है। विभाग की ओर से अब क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार वन भूमि पर दोबारा कब्जा न हो इसके लिए 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था किए जाने की योजना है। इस कार्रवाई के बाद भरदुआ गांव और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
भरदुआ गांव में वन भूमि से कब्जा हटाने के दौरान हुए विरोध और कर्मचारियों पर कथित हमले के बाद पुलिस पूरे मामले में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है। वहीं वन विभाग का कहना है कि सरकारी वन भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई जारी रहेगी। घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई है ताकि दोबारा किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
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