चंदौली पुलिस की बड़ी कार्रवाई पूर्व बैंक कर्मचारी समेत दो साइबर फ्रॉड आरोपी गिरफ्तार
चंदौली। साइबर अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में धानापुर पुलिस और साइबर टीम को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और म्यूल बैंक खातों के संचालन से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक पूर्व बैंक कर्मचारी भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक पूर्व बैंक कर्मचारी ने अपने बैंकिंग अनुभव का इस्तेमाल करते हुए करीब 300 बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों में से कई खातों के साइबर अपराध से जुड़े होने की आशंका के चलते उनकी विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस की कार्रवाई के बाद साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों के सामने आने की उम्मीद है।
पूर्व बैंक कर्मचारी समेत दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोहित कुमार उर्फ काला उम्र करीब 31 वर्ष पुत्र किशोरी राम निवासी ग्राम सेवढ़ी मड़ई थाना बलुआ और आशीष विश्वकर्मा उम्र करीब 22 वर्ष पुत्र रमेश विश्वकर्मा निवासी ग्राम पसाई थाना धीना के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक रोहित कुमार पूर्व में एक्सिस बैंक सकलडीहा में कर्मचारी के रूप में काम कर चुका है। जांच में आरोप है कि बैंक में काम करने के दौरान उसे बैंक खातों से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल हुई और बाद में उसने इसी अनुभव का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़े लोगों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने में किया।
गरीब ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लालच देकर खुलवाते थे खाते
पुलिस की जांच के अनुसार आरोपी गांवों में जाकर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा देते थे। इसके बाद उनके नाम पर जीरो बैलेंस बैंक खाते खुलवाए जाते थे। आरोप है कि खाता खुलने के बाद खाताधारकों से एटीएम कार्ड और पासबुक अपने कब्जे में ले लिए जाते थे तथा ओटीपी की जानकारी भी हासिल कर ली जाती थी। इन बैंक खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराध से प्राप्त रकम को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था। रकम खाते में आने के बाद एटीएम के माध्यम से उसे निकाला जाता और इसमें शामिल लोगों के बीच बांट लिया जाता था।
चार म्यूल खातों से जुड़ी 18 अंतरराज्यीय शिकायतें
पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान फिलहाल चार म्यूल बैंक खाते चिन्हित किए गए हैं। इन खातों के संबंध में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 18 अंतरराज्यीय शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इन शिकायतों में करीब ढाई लाख रुपये की साइबर ठगी से संबंधित रकम का उल्लेख बताया गया है। पुलिस अब इन खातों से जुड़े लेनदेन, खाताधारकों, रकम भेजने वाले स्रोतों और रकम निकाले जाने की प्रक्रिया की जांच कर रही है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
आंध्र प्रदेश तेलंगाना और ओडिशा तक नेटवर्क की जांच
पुलिस की प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के तार आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों द्वारा अलग अलग राज्यों में बैठे लोगों के माध्यम से फर्जी वेबसाइट और भ्रामक विज्ञापनों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाए जाने की बात जांच में सामने आई है। इन गतिविधियों से प्राप्त रकम को म्यूल खातों में भेजे जाने और बाद में रकम निकालने की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। रोहित कुमार द्वारा पूर्व में खुलवाए गए करीब 300 अन्य बैंक खातों की विस्तृत जांच अभी प्रक्रियाधीन है।
जनवरी 2024 के मामले से सामने आया था नेटवर्क
इस मामले की पृष्ठभूमि जनवरी 2024 से जुड़ी बताई गई है। फरवरी 2026 में थाना साइबर क्राइम में एहतशामुद्दीन और उनके सहयोगियों की ओर से तहरीर दी गई थी। आरोप था कि जनवरी 2024 में गांव के एक कालीन कारखाने में रोहित कुमार और उसके साथी रावण उर्फ शुभम ने विभिन्न सुविधाओं का लाभ दिलाने का भरोसा देकर लोगों के जीरो बैलेंस खाते खुलवाए थे। खाताधारकों को पासबुक उपलब्ध करा दी गई थी, लेकिन एटीएम कार्ड उपलब्ध कराने के नाम पर ओटीपी की जानकारी हासिल कर ली गई। बाद में खाताधारकों के ईमेल पर भारी लेनदेन से संबंधित संदेश आने लगे। बैंक में जानकारी करने पर उन्हें अपने खातों से उनकी जानकारी के बिना संदिग्ध लेनदेन होने की जानकारी मिली। इसी आधार पर मुकदमा संख्या 03 वर्ष 2026 दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी।
आरोपियों से पूछताछ में सामने आई खाते उपलब्ध कराने की प्रक्रिया
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आशीष विश्वकर्मा ने बताया कि वह रोहित कुमार और अन्य सहयोगियों के साथ गांव गांव जाकर लोगों को मुद्रा लोन और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच देता था। खाते खुलने के बाद एटीएम कार्ड, पासबुक और ओटीपी से संबंधित जानकारी मुंबई में मौजूद सहयोगियों तक पहुंचाई जाती थी। आरोप है कि इसके बाद फर्जी वेबसाइट और भ्रामक विज्ञापनों के जरिए की गई साइबर ठगी की रकम इन्हीं खातों में मंगवाई जाती थी। रकम आने के बाद उसे एटीएम के माध्यम से निकाला जाता था। पुलिस के अनुसार पहचान छिपाने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किए जाने की बात भी पूछताछ में सामने आई है।
बैंक में नौकरी के अनुभव का इस्तेमाल करने का आरोप
पुलिस के अनुसार रोहित कुमार ने पूछताछ में बताया कि बैंक में नौकरी के दौरान उसने करीब 300 बैंक खाते खुलवाए थे। संदिग्ध गतिविधियों के चलते नौकरी से हटाए जाने के बाद भी उसने बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए साइबर धोखाधड़ी की योजनाओं में भूमिका निभाई और अपने सहयोगियों को खातों से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी दी। पुलिस अब उसके द्वारा पूर्व में खुलवाए गए खातों का रिकॉर्ड खंगाल रही है। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन खातों में कितनी रकम का लेनदेन हुआ और इनमें से कितने खाते साइबर अपराध से जुड़े रहे।
ओदरा मार्ग से मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी मुखबिर की सूचना के आधार पर की गई। धानापुर थाना पुलिस और साइबर टीम ने कार्रवाई करते हुए ओदरा मार्ग से दोनों आरोपियों को करीब 12 बजकर 20 मिनट पर गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त दो मोबाइल फोन, एक कूटरचित आधार कार्ड, एक एटीएम कार्ड और एक चेकबुक बरामद की गई है। पुलिस ने बरामद सामान को जांच का हिस्सा बनाते हुए मोबाइल फोन और बैंकिंग दस्तावेजों से संबंधित जानकारी भी खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच जारी
इस मामले में थाना धानापुर में मुकदमा संख्या 160 वर्ष 2026 दर्ज किया गया है। मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 डी समेत संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और साक्ष्य संकलन के साथ शेष बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। 300 से अधिक खातों की जांच पूरी होने के बाद साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
उच्चाधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई उच्चाधिकारियों के निर्देशन में थाना प्रभारी अतिरिक्त निरीक्षक सलिल स्वरूप आदर्श, साइबर सेल प्रभारी उप निरीक्षक मिर्जा रिजवान बेग तथा स्थानीय पुलिस और साइबर टीम के सदस्यों द्वारा की गई। पुलिस ने कहा है कि साइबर फ्रॉड के मामलों में बैंक खातों के दुरुपयोग और म्यूल अकाउंट के माध्यम से रकम के लेनदेन की लगातार जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी और जांच में सामने आने वाले अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।
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