चंदौली में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के कॉल सेंटर का खुलासा पांच गिरफ्तार
चंदौली। मुगलसराय थाना क्षेत्र में स्वाट सर्विलांस साइबर टीम और मुगलसराय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने एक कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार कैलाशपुरी स्थित एक भवन की तीसरी मंजिल पर साइबर कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है जबकि तीन अन्य लोगों को मुकदमे में नामजद किया गया है। पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में कंप्यूटर मॉनिटर सीपीयू कीबोर्ड माउस हेडफोन लैपटॉप मोबाइल फोन और नेटवर्किंग उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार एक आरोपित के दो बैंक खातों में मौजूद करीब नौ लाख रुपये की धनराशि को तत्काल फ्रीज कराया गया है।
मुखबिर की सूचना पर तीसरी मंजिल पर पहुंची पुलिस
पुलिस के अनुसार स्वाट सेल प्रभारी निरीक्षक राम जन्म यादव थाना मुगलसराय के थानाध्यक्ष अर्जुन सिंह सर्विलांस सेल प्रभारी उपनिरीक्षक आशीष मिश्रा और साइबर सेल प्रभारी मिर्जा रिजवान बेग को सूचना मिली थी कि कैलाशपुरी क्षेत्र में स्वागत इलेक्ट्रॉनिक शोरूम और आदित्य विजन इलेक्ट्रॉनिक की बिल्डिंग के पास स्थित एक भवन की तीसरी मंजिल पर संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। इसी भवन में बेबी फर्स्ट क्राई का शोरूम भी बताया गया है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और वीडियोग्राफी करते हुए संबंधित स्थान पर प्रवेश किया। पुलिस के मुताबिक वहां मौजूद कंप्यूटर मॉनिटर की स्क्रीन पर लाइव कॉल चल रही थी और बातचीत में विदेशी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा था।
जापानी नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने जापानी भाषा नालंदा और गया में सीखी थी। आरोपित कथित तौर पर जापान के नागरिकों को फोन कर उनके कंप्यूटर या सिस्टम में तकनीकी समस्या होने की बात कहते थे। इसके बाद उन्हें रिमोट एक्सेस उपलब्ध कराने के लिए एक प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा जाता था। पुलिस के अनुसार आरोपित ZOIPER5 जैसे इंटरनेट कॉलिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से कॉल करते थे और विदेशी नंबर के माध्यम से जापानी नागरिकों से संपर्क करते थे। पुलिस का दावा है कि इस तरीके से पीड़ितों के कंप्यूटर तक रिमोट एक्सेस हासिल करने का प्रयास किया जाता था।
रिमोट एक्सेस के बाद बैंकिंग जानकारी हासिल करने का आरोप
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में सामने आया कि कथित गिरोह रिमोट एक्सेस मिलने के बाद पीड़ितों से बैंकिंग ऐप या इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित गतिविधियां करवाता था। पुलिस का आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान पीड़ितों के बैंक खातों से धनराशि हासिल की जाती थी। प्राप्त बैंकिंग जानकारी को व्हाट्सऐप के विभिन्न समूहों में साझा किए जाने की बात भी पूछताछ में सामने आई है। पुलिस के अनुसार इन समूहों में DATES समेत अन्य वर्चुअल नंबर आधारित समूह शामिल थे। जांच में ऐसे बैंक खातों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है जिन्हें पुलिस ने म्यूल बैंक खाते बताया है।
हर कुछ मिनट में नया शिकार बनाने का दावा
पुलिस के अनुसार कथित साइबर ठग साधारण मोबाइल सिम के बजाय इंटरनेट आधारित कॉलिंग व्यवस्था का इस्तेमाल करते थे। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार कॉल के दौरान जापान का कंट्री कोड वाला नंबर दिखाई देता था। पुलिस के मुताबिक आरोपित खुद को तकनीकी सहायता या बैंक से जुड़ा कर्मचारी बताकर लोगों का भरोसा हासिल करने का प्रयास करते थे। विदेशी नाम का इस्तेमाल करने और कंप्यूटर स्क्रीन पर पहचान से संबंधित फर्जी दस्तावेज दिखाने की बात भी पुलिस की पूछताछ में सामने आई है। पुलिस के अनुसार गिरोह का निशाना विशेष रूप से ऐसे बुजुर्ग जापानी नागरिक थे जो तकनीकी जानकारी के मामले में कम परिचित थे और जिनके बैंक खातों में बचत की राशि मौजूद थी।
वेबकैम और बैंकिंग एप तक पहुंच की भी जांच
पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक रिमोट कनेक्शन स्थापित करने के बाद कथित ठग पीड़ितों से इंटरनेट बैंकिंग और बैंकिंग एप में लॉग इन करवाते थे। पुलिस ने बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की प्रारंभिक जांच के आधार पर बताया है कि कुछ मामलों में पीड़ितों के वेबकैम तक पहुंच बनाने की गतिविधियां भी सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार बरामद सामग्री में कई ऐसी तस्वीरें भी मिली हैं जिनमें बुजुर्ग व्यक्ति कैमरे की ओर देखते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विस्तृत पुष्टि के लिए फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
एक आरोपित के दो खातों में नौ लाख रुपये फ्रीज
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान रौनक सिंह उम्र 32 वर्ष पुत्र इंद्रमोहन सिंह निवासी सैदपुर थाना बेन जनपद नालंदा बिहार के दो बैंक खातों में करीब नौ लाख रुपये की धनराशि फ्रीज कराई है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आए बैंकिंग विवरण के आधार पर की गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि किन किन बैंक खातों में पहुंची और पूरे नेटवर्क में अलग अलग लोगों की क्या भूमिका थी।
मुख्य संचालक की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने एक अन्य व्यक्ति को कथित गिरोह का मुख्य संचालक बताया है। पुलिस का कहना है कि टीम के पहुंचने से कुछ समय पहले वह व्यक्ति मौके से निकल गया था। उसकी गिरफ्तारी के लिए स्थानीय पुलिस की ओर से प्रयास जारी हैं। पुलिस हवाला के माध्यम से जापानी मुद्रा को भारतीय रुपये में बदलने और कॉल सेंटर के संचालन में उसकी भूमिका की भी जांच कर रही है। इसके अलावा विदेशी कॉलिंग और रिमोट एक्सेस से जुड़े संसाधन किसके माध्यम से उपलब्ध कराए गए इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।
वाराणसी के पते पर बने फर्जी आधार कार्ड बरामद
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान वाराणसी के पते पर बनाए गए पांच कथित फर्जी और कूटरचित आधार कार्ड भी बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार आरोपितों ने अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के साथ पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में अन्य कौन लोग शामिल थे।
19 मॉनिटर और 20 सीपीयू समेत बड़ी मात्रा में उपकरण बरामद
पुलिस के अनुसार मौके से 19 फॉक्सिन मॉनिटर 20 फॉक्सिन सीपीयू 19 कीबोर्ड 18 माउस और 18 हेडफोन बरामद किए गए हैं। इसके अलावा तीन लैपटॉप बरामद हुए हैं जिनमें एक एचपी सिल्वर और दो डेल ब्लैक बताए गए हैं। पुलिस ने छह मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं जिनमें आईफोन 17 वनप्लस रेडमी और आईक्यू समेत अन्य मोबाइल शामिल हैं। नेटवर्किंग उपकरणों में तीन वाईफाई राउटर जिओ और एयरटेल एक टीपी लिंक राउटर और एक डी लिंक आठ चैनल स्विच हब शामिल हैं। इसके अलावा पांच कथित फर्जी या कूटरचित आधार कार्ड बरामद किए गए हैं।
मामले में बीएनएस और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा
पुलिस के अनुसार मामले में मुगलसराय थाने में मुकदमा संख्या 510 वर्ष 2026 दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 3 की उपधारा 5 धारा 61 की उपधारा 2 धारा 318 की उपधारा 4 धारा 319 की उपधारा 2 धारा 336 की उपधारा 3 धारा 337 धारा 338 धारा 339 धारा 340 की उपधारा 2 और धारा 341 की उपधारा 1 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 सी और 66 डी के तहत कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार आरोपितों के अन्य आपराधिक इतिहास की जानकारी भी पुलिस द्वारा जुटाई जा रही है।
गिरफ्तार आरोपितों का विवरण
गिरफ्तार आरोपितों में रौनक सिंह उम्र 32 वर्ष पुत्र इंद्रमोहन सिंह निवासी ग्राम सैदपुर थाना बेन जनपद नालंदा बिहार को पुलिस ने कॉल सेंटर का मैनेजर बताया है। इसके अलावा रोशन कुमार उम्र 21 वर्ष पुत्र बिनोद कुमार सिंह निवासी नया बाईपास थाना विष्णुपथ जनपद गया बिहार अमन कुमार उम्र 23 वर्ष पुत्र उमेश कुमार निवासी मंगला बोरिंग थाना विष्णुपथ जनपद गया बिहार अंकित कुमार उम्र 25 वर्ष पुत्र राजेश कुमार निवासी नीमडीह थाना रूपौ जनपद नवादा बिहार और विकास वैभव उम्र 25 वर्ष पुत्र नवबिन्द कुमार वर्मा निवासी वारिस नगर रामशिला थाना कोतवाली जनपद गया बिहार शामिल हैं।
ठगी की रकम और नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस के अनुसार बरामद इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच के आधार पर सामने आए तथ्यों के अनुसार गिरोह की गतिविधियों और कथित साइबर ठगी की रकम का पूरा विवरण अभी जांच का विषय है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया गया और कितनी धनराशि कथित तौर पर ठगी गई। जांच में विदेशी कॉलिंग अकाउंट रिमोट एक्सेस व्यवस्था बैंक खातों और हवाला के माध्यम से धनराशि के लेनदेन से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बरामद उपकरणों की प्रारंभिक जांच से मिले तथ्यों की फॉरेंसिक जांच के बाद मामले में विस्तृत जानकारी सामने आएगी।
संयुक्त पुलिस टीम ने की कार्रवाई
कार्रवाई करने वाली टीम में थाना मुगलसराय के थानाध्यक्ष अर्जुन सिंह साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक मिर्जा रिजवान बेग साइबर थाना के उपनिरीक्षक अभिषेक शुक्ला चौकी प्रभारी चंधासी उपनिरीक्षक सुरेश चन्द्र पाण्डेय चौकी प्रभारी कस्बा उपनिरीक्षक सतीश प्रकाश साइबर कमांडो मनीष सिंह समेत पुलिसकर्मी शामिल रहे। स्वाट और सर्विलांस टीम की ओर से निरीक्षक राम जन्म यादव उपनिरीक्षक आशीष मिश्रा हेड कांस्टेबल राणा प्रताप सिंह हेड कांस्टेबल सतीश पटेल हेड कांस्टेबल रामानंद यादव हेड कांस्टेबल अरविंद भारद्वाज हेड कांस्टेबल दीपक मिश्रा कांस्टेबल अमित सिंह और कांस्टेबल महेश यादव समेत अन्य पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई में हिस्सा लिया।
चंदौली पुलिस की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद अब मामले की जांच गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ और बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस के अनुसार फरार बताए जा रहे अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। मामले में साइबर ठगी की वास्तविक रकम पीड़ितों की संख्या और कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद और स्पष्ट हो सकेगी।
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