रुहेलखंड विश्वविद्यालय में प्रस्तावित हिंदू सम्मेलन पर टकराव, प्रोफेसरों के बीच मतभेद गहराए
बरेली स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में आगामी 1 फरवरी को प्रस्तावित हिंदू सम्मेलन को लेकर विवाद गहरा गया है। इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर विश्वविद्यालय के दो वरिष्ठ शिक्षकों के बीच तीखा मतभेद सामने आया है, जिसके बाद पूरे परिसर में वैचारिक बहस शुरू हो गई है। मामला अब केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर संवैधानिक मूल्यों और सरकारी शिक्षण संस्थानों की भूमिका से जुड़ गया है।
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर और कार्यक्रम के प्रस्तावित अध्यक्ष प्रोफेसर रविंद्र सिंह ने शिक्षकों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में संदेश साझा किया। संदेश में बताया गया कि 1 फरवरी को विश्वविद्यालय के अटल सभागार में हिंदू सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसी क्रम में मंगलवार को एमबीए हॉल में एक बैठक भी बुलाई गई थी, जिसमें शिक्षकों और कर्मचारियों से सपरिवार शामिल होने की अपील की गई।
इस संदेश पर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ रुटा के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर यशपाल सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे सरकारी शिक्षण संस्थान की धर्मनिरपेक्ष छवि के विपरीत बताया। प्रोफेसर यशपाल सिंह का कहना है कि भारत के संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के अनुसार किसी भी सरकारी शैक्षिक परिसर में किसी एक धर्म विशेष से जुड़े सम्मेलन का आयोजन उचित नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक भारत को आधिकारिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किया जाता, तब तक इस तरह का आयोजन संवैधानिक भावना के खिलाफ माना जाएगा।
उन्होंने चीफ प्रॉक्टर से यह सवाल भी उठाया कि क्या इस आयोजन के दौरान गैर हिंदू समुदाय के लोगों के प्रवेश को लेकर कोई नियम लागू किया गया है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस कार्यक्रम का हर संभव तरीके से विरोध करेंगे। उनके इस रुख के बाद विश्वविद्यालय के अकादमिक हलकों में इस विषय पर खुली चर्चा शुरू हो गई है और शिक्षक समुदाय दो विचारधाराओं में बंटता नजर आ रहा है।
इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कुछ अकादमिक जिम्मेदारियों में भी बदलाव किए गए हैं। प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग के दिवंगत प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल के पदों पर नए शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उप कुलसचिव के अनुसार व्यवसाय प्रबंध विभाग के प्रोफेसर संजय मिश्रा को केंद्रीय पुस्तकालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वहीं डॉ. प्रिया सक्सेना को 24 जनवरी से तीन वर्षों की अवधि या सेवानिवृत्ति की तिथि तक प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग का अध्यक्ष नामित किया गया है।
फिलहाल हिंदू सम्मेलन को लेकर उठा विवाद विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। शिक्षक और कर्मचारी वर्ग इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि सरकारी विश्वविद्यालयों में ऐसे आयोजनों की सीमा और संवैधानिक मर्यादा क्या होनी चाहिए। आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
