सीएमपी डिग्री कॉलेज में विश्व जल दिवस पर पोस्टर प्रतियोगिता, छात्रों ने दिए जल संरक्षण के वैज्ञानिक संदेश
प्रयागराज स्थित सीएमपी डिग्री कॉलेज में विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में रसायन विभाग द्वारा पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस आयोजन में छात्रों ने बढ़ते जल संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हुए जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ इसके वैज्ञानिक समाधान भी प्रस्तुत किए। उल्लेखनीय है कि विश्व जल दिवस प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है, जिसके मद्देनजर यह कार्यक्रम गुरुवार को आयोजित किया गया।
रचनात्मकता के माध्यम से जल संकट पर जागरूकता
प्रतियोगिता में विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने पोस्टरों के माध्यम से जल संकट जैसे गंभीर विषय को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। छात्रों ने जल संरक्षण, जल के समुचित उपयोग और इसके महत्व को कलात्मक रूप में दर्शाते हुए समाज को जागरूक करने का प्रयास किया।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किए समाधान
कार्यक्रम का आयोजन जल गुणवत्ता प्रबंधन कोर्स के कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रमोद शर्मा के नेतृत्व में किया गया। छात्रों ने अपने पोस्टरों में जल चक्र, भूजल पुनर्भरण तथा अपशिष्ट जल उपचार जैसे विषयों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया। कई पोस्टरों में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से जल प्रबंधन और शुद्धिकरण में संभावित सुधारों को भी दर्शाया गया।
नवीन संदेशों ने खींचा ध्यान
प्रतियोगिता में प्रस्तुत पोस्टरों ने अपनी रचनात्मकता और संदेशों के कारण सभी का ध्यान आकर्षित किया। पारंपरिक नारों से आगे बढ़ते हुए छात्रों ने ‘जल ही जीवन है’ के साथ-साथ ‘जल का भविष्य, हमारा भविष्य’ जैसे आधुनिक और प्रभावशाली संदेशों का उपयोग किया।
विशेषज्ञों ने सराहा छात्रों का प्रयास
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रो. आरती गुप्ता, प्रो. बबिता अग्रवाल, प्रो. मृदुला त्रिपाठी, डॉ. धर्मेन्द्र साहू और प्रो. अनिल कुमार शुक्ला शामिल रहे। उन्होंने छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विज्ञान के विद्यार्थियों की जिम्मेदारी केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि जल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक नवाचारों को अपनाना भी आवश्यक है।
कला के माध्यम से विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास
प्राध्यापकों ने इस बात पर भी जोर दिया कि पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता जैसे आयोजन यह दर्शाते हैं कि कला किस प्रकार जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरल और प्रभावी तरीके से आम लोगों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन सकती है। यह आयोजन छात्रों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि इससे उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारियों का भी बोध हुआ।
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