आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटाया, राजनीतिक गलियारों में उठे सवाल
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने अपने वरिष्ठ राज्यसभा सांसद और पार्टी के करीबी नेता राघव चड्ढा को उच्च सदन में उपनेता पद से हटा दिया है। इसके साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजकर अनुरोध किया कि चड्ढा को सदन में बोलने का समय आवंटित न किया जाए। यह अचानक फैसला राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर रहा है और भविष्य में पार्टी की रणनीति पर भी कई सवाल खड़े कर रहा है।
राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया
पद से हटाए जाने के कुछ ही घंटों में राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने अपने राज्यसभा के दौरान किए गए हस्तक्षेप दिखाए और इसे ‘बुरी नजर’ कैप्शन के साथ पोस्ट किया। राजनीतिक विश्लेषक इसे पार्टी के भीतर मतभेद और असहमति की ओर संकेत मान रहे हैं।
नए उपनेता के तौर पर अशोक मित्तल
गुरुवार को पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजकर जानकारी दी कि राघव चड्ढा की जगह उद्योगपति और सांसद अशोक मित्तल को पार्टी का नया उपनेता नियुक्त किया गया है। मित्तल अब उच्च सदन में आप की रणनीति और समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह बदलाव इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि लंबे समय तक चड्ढा को पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा है और वे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की आवाज माने जाते थे।
पार्टी में असहमति और पृष्ठभूमि
सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में चड्ढा का रुख पार्टी लाइन से अलग दिखाई देने लगा था। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर पेड पितृत्व अवकाश, एयरपोर्ट पर महंगे खाने-पीने की कीमतें, गिग वर्कर्स के अधिकार और बड़े शहरों में ट्रैफिक जैसी समस्याओं को उठाया, जबकि पार्टी के मुख्य राजनीतिक मुद्दों पर अपेक्षाकृत चुप्पी साधी। इससे पार्टी के भीतर असहजता बढ़ी। इसके अलावा, उन्हें स्टार प्रचारकों की सूची से भी बाहर कर दिया गया था। खासकर असम और अन्य राज्यों में चुनावी अभियानों में उनकी अनुपस्थिति ने इस कदम की अटकलों को और मजबूती दी।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार और उसके बाद बदलते समीकरणों ने इस फैसले को प्रेरित किया होगा। चड्ढा का पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाना और नेतृत्व के प्रति कम सक्रिय रहना भी इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि मानी जा रही है। हालांकि, आम आदमी पार्टी ने अभी तक इस कदम का कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने से जोड़ा जा रहा है।
राजनीतिक प्रभाव और भविष्य
राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि राघव चड्ढा की अनुपस्थिति उच्च सदन में आप की आवाज और रणनीतिक समन्वय पर असर डाल सकती है। इस फैसले के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी की अंदरूनी राजनीति और आगामी चुनावी रणनीतियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। पार्टी अब अपने उपनेता पद और रणनीतिक समन्वय को लेकर नई दिशा में काम कर रही है और आने वाले समय में इसके परिणाम सामने आएंगे।
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