Sat, 10 Jan 2026 12:07:07 - By : Palak Yadav
अयोध्या स्थित राम मंदिर के प्रथम तल पर राजा के स्वरूप में प्रतिष्ठित भगवान श्रीराम माता जानकी और उनके अनुजों की प्रतिमाओं को अब सामूहिक रूप से राम परिवार के नाम से जाना जाएगा। अब तक इन प्रतिमाओं का संबोधन राम दरबार के रूप में होता रहा है लेकिन श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसे औपचारिक रूप से बदलते हुए राम परिवार नाम को प्रचलन में ला दिया है। ट्रस्ट के इस निर्णय के बाद दर्शन व्यवस्था में भी इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है।
ट्रस्ट ने दर्शन पास पर अंकित नाम में भी बदलाव कर दिया है। अब दर्शन पास पर रामलला एवं राम परिवार दर्शन लिखा जा रहा है जबकि पहले इस पर रामलला एवं राम दरबार दर्शन अंकित रहता था। यह बदलाव सुगम और विशिष्ट दोनों प्रकार के दर्शन पास पर लागू किया जा रहा है। ट्रस्ट का मानना है कि राम परिवार नाम श्रद्धालुओं की भावनाओं और पारिवारिक मूल्यों को अधिक स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
राम मंदिर के भूतल पर बाल स्वरूप में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा की गई थी। इसके लगभग डेढ़ वर्ष बाद मंदिर के प्रथम तल पर राजा राम की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई। इस स्वरूप में भगवान राम के साथ माता जानकी सिंहासन पर विराजमान हैं जबकि उनके दाएं और बाएं लक्ष्मण और शत्रुघ्न खड़े हैं। चरणों में एक ओर अनन्य भक्त हनुमान जी और दूसरी ओर भ्राता भरत विराजमान हैं।
इन प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा गत वर्ष पांच जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath द्वारा संपन्न कराई गई थी। इसके बाद से श्रद्धालुओं और ट्रस्ट पदाधिकारियों के बीच इसे राम दरबार के नाम से ही संबोधित किया जाता रहा। दर्शन पास और आधिकारिक संवाद में भी यही नाम प्रयोग में था।
अब ट्रस्ट द्वारा नाम परिवर्तन के बाद राम परिवार शब्द को प्राथमिकता दी जा रही है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि दर्शन पास पर भले ही पहले राम दरबार अंकित होता रहा हो लेकिन ट्रस्ट के स्तर पर इस स्वरूप को राम परिवार का ही नाम दिया गया था। अब उसी को औपचारिक रूप से लागू किया गया है ताकि नाम और भाव दोनों में एकरूपता बनी रहे।
ट्रस्टी डा अनिल कुमार मिश्र के अनुसार यह बदलाव किसी नई परंपरा की शुरुआत नहीं बल्कि पहले से तय अवधारणा को स्पष्ट करने का प्रयास है। उनका कहना है कि राम परिवार नाम भगवान राम को केवल राजा के रूप में नहीं बल्कि एक आदर्श परिवार के केंद्र के रूप में प्रस्तुत करता है। इस निर्णय के बाद Ayodhya में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी राम परिवार नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई है और इसे सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।