Fri, 09 Jan 2026 11:16:26 - By : Palak Yadav
नमामि गंगे योजना के तहत वाराणसी में गंगा को निर्मल और अविरल बनाने की दिशा में बड़े स्तर पर काम किया गया है। इस योजना के अंतर्गत कुल 1469 करोड़ रुपये की लागत से 17 परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ हुआ जिनमें से 12 परियोजनाएं अब जमीन पर स्पष्ट रूप से आकार ले चुकी हैं। इन प्रयासों का सीधा प्रभाव गंगा के जल की गुणवत्ता पर पड़ा है और बीते वर्षों में नदी के निर्मलीकरण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य शहर का सीवेज और प्रदूषित जल सीधे गंगा में गिरने से रोकना रहा है जिसके लिए आधुनिक सीवेज शोधन ढांचे का निर्माण और पुराने तंत्र का उन्नयन किया गया है।
इसी क्रम में दीनापुर में 140 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और रमना में 50 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्रमुख रूप से कार्य कर रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से अस्सी नाले के पानी को शोधित कर गंगा में जाने से पहले साफ किया जा रहा है। रामनगर क्षेत्र में 10 एमएलडी क्षमता का एसटीपी स्थापित किया गया है जिससे वहां की आबादी से निकलने वाले गंदे पानी का शोधन संभव हो सका है। नमामि गंगे योजना के अंतर्गत पुराने शोधन संयंत्रों को भी आधुनिक बनाया गया जिसमें भगवानपुर का 9 दशमलव 8 एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी शामिल है। इस संयंत्र के आधुनिकीकरण और विस्तार से प्रदूषित जल के उपचार की क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है। इसके अतिरिक्त करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से 55 एमएलडी क्षमता का एक नया सीवेज प्लांट निर्माणाधीन है जो भविष्य में गंगा की स्वच्छता को और मजबूत करेगा।
गंगा में गिरने वाले प्रदूषित नालों को रोकने के लिए इंटरसेप्शन और डायवर्जन नेटवर्क विकसित किया गया है। वाराणसी में गंगा में सीधे गिरने वाले 23 बड़े नालों में से 22 को पूरी तरह टैप किया जा चुका है। जायका और नमामि गंगे के सहयोग से लगभग 660 करोड़ रुपये की लागत से असि और वरुणा नदियों के प्रदूषित जल को रोकने के लिए सीवर लाइनें बिछाई गई हैं। अस्सी नाले के शेष 20 एमएलडी पानी के शोधन के लिए एडवांस ऑक्सीडेशन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही गंगा घाटों के सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। खिड़किया घाट जिसे नमो घाट के नाम से जाना जाता है वहां लगभग 95 दशमलव 2 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास कार्य किया गया है जिसमें जेटी कैफेटेरिया और हेरिटेज म्यूरल्स शामिल हैं। ऐतिहासिक घाटों और स्मारकों के लिए 5 दशमलव 12 करोड़ रुपये की लाइटिंग परियोजनाएं पूरी की गई हैं। पर्यटकों और नावों की सुविधा के लिए राजघाट सहित अन्य स्थानों पर करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से जेटी का निर्माण हुआ है। गंगा की सतह से कचरा हटाने के लिए ट्रैश स्कीमर मशीनें लगाई गई हैं। इसके साथ ही कछुआ प्रजनन केंद्र गंगा डाल्फिन संरक्षण नदी किनारे पौधारोपण तथा गंगा प्रहरी और गंगा दूत जैसे जन भागीदारी कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है।