Mon, 12 Jan 2026 22:18:44 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
वाराणसी: मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर काशी का मिजाज और गंगा पार रेती का नजारा सोमवार को पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। नगर निगम द्वारा आयोजित दो दिवसीय भव्य पतंग प्रतियोगिता के पहले दिन गंगा की लहरों के किनारे परंपरा, बनारसी अल्हड़पन और रोमांच का ऐसा संगम दिखा, जिसने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। चटख धूप और ठंडी हवाओं के बीच आसमान सतरंगी पतंगों से पट गया और जैसे ही पेंच लड़ने शुरू हुए, फिजाओं में सिर्फ एक ही शोर गूंज उठा 'भाक्काटे... भाक्काटे'। इस आयोजन ने न केवल शहर की पुरानी यादों को ताजा किया, बल्कि आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूटती पतंगबाजी की कला को एक नया जीवन देने का काम किया।
महापौर बनाम नगर आयुक्त: जब अधिकारियों के बीच छिड़ी आसमानी जंग
प्रतियोगिता का सबसे दिलचस्प और बहुप्रतीक्षित क्षण वह था जब शहर के प्रथम नागरिक महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल खुद खिलाड़ी बनकर मैदान में उतरे। औपचारिक उद्घाटन के बाद दोनों शीर्ष अधिकारियों ने चरखी और डोर थामी। जैसे ही दोनों के बीच पेंच फंसा, दर्शकों की धड़कनें बढ़ गईं। एक तरफ प्रशासनिक दक्षता थी तो दूसरी तरफ राजनीतिक अनुभव, लेकिन पतंगबाजी के इस रण में महापौर का अनुभव भारी पड़ा। हवा के रुख को भांपते हुए महापौर ने ऐसा दांव चला कि देखते ही देखते नगर आयुक्त की पतंग कटकर हवा में गोते खाने लगी। जैसे ही नगर आयुक्त की पतंग कटी, पूरी रेती तालियों और 'भाक्काटे' के उद्घोष से गूंज उठी। यह क्षण अधिकारियों और जनता के बीच की दूरी को मिटाने वाला साबित हुआ।
बनारसी जायका और मेयर की नसीहत: "मोबाइल छोड़ें, डोर थामें"
बनारस का कोई भी उत्सव बिना खान-पान के पूरा नहीं माना जाता। रेती पर उड़ती पतंगों के बीच कड़ाही से निकलती गरमा-गरम कचौड़ी और जलेबी की महक ने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया। एक तरफ आसमान में पेंच लड़ रहे थे, तो दूसरी तरफ लोग बनारसी नाश्ते का लुत्फ उठाते हुए अपनी पसंदीदा टीमों का उत्साह बढ़ा रहे थे।
इस उल्लास के बीच महापौर अशोक कुमार तिवारी ने एक गंभीर और जरूरी बात भी कही। उन्होंने युवाओं को रील और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से बाहर निकलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "काशी में पतंगबाजी सिर्फ एक खेल नहीं, सदियों पुरानी परंपरा है। एक दौर था जब मकर संक्रांति से महीनों पहले छतों से शोर सुनाई देता था, लेकिन आज की युवा पीढ़ी मोबाइल स्क्रीन में सिमट गई है। हम अपनी विरासत को मरने नहीं देंगे, युवाओं को खेल के मैदान में लौटना ही होगा।"
अगले वर्ष राष्ट्रीय स्तर का 'महासंग्राम'
प्रतियोगिता के उत्साह को देखते हुए महापौर ने एक बड़ी घोषणा की, जिसने पतंगबाजों के चेहरों पर चमक ला दी। उन्होंने ऐलान किया कि अगले वर्ष से यह प्रतियोगिता केवल स्थानीय नहीं रहेगी, बल्कि इसे 'नेशनल इवेंट' (राष्ट्रीय स्वरूप) का दर्जा दिया जाएगा। देश भर के नामचीन पतंगबाज इसमें हिस्सा लेंगे, जिसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था होगी। इतना ही नहीं, पुरस्कार राशि भी ऐतिहासिक होगी, जो इस खेल के प्रति सम्मान और रोमांच दोनों को बढ़ाएगी।
आसमान में वर्चस्व की लड़ाई: रोमांचक रहे नॉकआउट मुकाबले
प्रतियोगिता के तकनीकी सत्र में 16 टीमों ने हिस्सा लिया, जहाँ हवा की गति और दिशा को लेकर खिलाड़ियों की समझ की असली परीक्षा हुई। पहले चरण में कुल आठ मुकाबले हुए, जिसमें फिफ्टी-फिफ्टी काशी काइट क्लब, बाजीगर, फायर, ट्रिपल "ए", वाराणसी काइट कल्चर, मां संकठा, इंटरनेशनल और दीप काइट क्लब ने अपने विरोधियों को धूल चटाते हुए अगले दौर में प्रवेश किया।
क्वार्टर फाइनल में रोमांच अपने चरम पर था। यहाँ हुए चार नॉकआउट मुकाबलों ने दर्शकों की सांसें थाम दीं:
✅फिफ्टी-फिफ्टी बनाम फायर काइट क्लब: फायर काइट क्लब ने बेहद आक्रामक खेल दिखाया और विपक्षी पतंग को संभलने का मौका दिए बिना ही आसमान में काट दिया।
✅फ्रीडम बनाम स्काई लाइन: स्काई लाइन काइट क्लब ने अपनी तकनीकी श्रेष्ठता साबित की और ढील व खींच के सही संतुलन से जीत हासिल की।
✅बाजीगर बनाम एयर लाइन्स: हवा की गति का सटीक उपयोग करते हुए एयर लाइन्स काइट क्लब ने बाजीगर को मात दी।
✅बनारस बनाम रॉयल: मेजबान बनारस काइट क्लब ने रॉयल काइट क्लब को शिकस्त देकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की।
सेमीफाइनल और फाइनल: आज होगा लाखों का फैसला
अब निगाहें आज (मंगलवार, 13 जनवरी) होने वाले निर्णायक मुकाबलों पर टिकी हैं। सेमीफाइनल की जंग के लिए मैदान सज चुका है, जिसमें बनारस काइट क्लब, फायर काइट क्लब, एयर लाइन्स काइट क्लब और स्काई लाइन काइट क्लब आमने-सामने होंगे। खिताबी मुकाबले में विजेताओं पर धनवर्षा होगी, प्रथम पुरस्कार 5 लाख रुपये, द्वितीय 2.51 लाख रुपये और तृतीय पुरस्कार 1.51 लाख रुपये रखा गया है।
इस भव्य आयोजन में पार्षदों और अधिकारियों की उपस्थिति ने भी चार चांद लगाए। पार्षद सुरेश कुमार चौरसिया, प्रवीन राय, चंद्रनाथ मुखर्जी, राजेश यादव चल्लू, विवेक कुशवाहा, सिंधु सोनकर, संजय गुजराती, कनक लता मिश्रा, मदन मोहन दुबे, सीमा वर्मा, विजय द्विवेदी और अपर नगर आयुक्त सविता यादव सहित निगम के तमाम अधिकारी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाते नजर आए।