Sat, 10 Jan 2026 12:47:40 - By : Pradyumn Kant Patel
पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाले विंध्य एक्सप्रेसवे के सर्वे की जिम्मेदारी चेन्नई की अल्मोंडज कंपनी को सौंपी गई है। कंपनी की सर्वे टीम पिछले तीन दिनों से सोनभद्र जनपद के म्योरपुर क्षेत्र में सक्रिय रूप से सर्वे कर रही है। यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे वाराणसी और चंदौली होते हुए सोनभद्र को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा और आगे प्रयागराज तक विस्तारित होगा। करीब 330 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को प्रदेश के अंतिम छोर तक बेहतर सड़क संपर्क देने की महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।
प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के सर्वे का कार्य अल्मोंडज कंपनी को सौंपा है और सर्वे का काम तेज गति से चल रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद इसी महीने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार डीपीआर के आधार पर परियोजना की लागत और निर्माण की रूपरेखा तय की जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि वर्ष 2027 से पहले इस एक्सप्रेसवे के निर्माण का कार्य शुरू हो सकता है। मुख्यमंत्री द्वारा पिछले वर्ष महाकुंभ मेले के समापन अवसर पर इस एक्सप्रेसवे की घोषणा की गई थी जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को छत्तीसगढ़ झारखंड सहित अन्य राज्यों से बेहतर सड़क नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना है।
शुक्रवार को अल्मोंडज कंपनी के जूनियर सर्वेयर नितेश यादव और अरविंद कुमार ने रनटोला के जंगलों से होते हुए क्षेत्र के अंतिम छोर तक सर्वे किया। उन्होंने बताया कि हर 20 किलोमीटर पर एक सैटेलाइट कनेक्टिंग डिवाइस लगाकर पूरे 330 किलोमीटर के रूट का एक साथ सर्वे किया गया। रेणुकूट को अंतिम छोर मानते हुए सर्वे किया जा रहा है और ऐसे में एक्सप्रेसवे का समापन मुर्धवा और रनटोला के जंगल क्षेत्र में प्रस्तावित है। इस प्रक्रिया में जंगल क्षेत्र और ग्रामीण इलाकों के भौगोलिक पहलुओं को विशेष रूप से ध्यान में रखा जा रहा है।
प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे वाराणसी शक्तिनगर मार्ग के समानांतर विकसित किया जाएगा। यह रनटोला और मुर्धवा के बीच जंगलों से गुजरते हुए दुद्धी हाथीनाला मार्ग को पार करेगा और सीधे हरदी कोटा के कोन मार्ग तक पहुंचेगा। वहां से सोन नदी पर नए पुल के निर्माण के बाद इसे नगवां के पल्हारी क्षेत्र से होते हुए चंदौली के रास्ते वाराणसी से जोड़ा जाएगा। इस रूट के विकसित होने से सोनभद्र और आसपास के इलाकों से वाराणसी सहित अन्य बड़े शहरों तक आवागमन कहीं अधिक सुगम हो जाएगा।
अल्मोंडज कंपनी के साइट इंचार्ज अरुण यादव ने बताया कि विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए कुल 330 किलोमीटर का सर्वे कार्य किया जा रहा है और इसके पूरा होते ही डीपीआर इस माह के अंत तक शासन को सौंप दी जाएगी। डीपीआर में यह स्पष्ट होगा कि परियोजना पर कुल कितनी लागत आएगी और निर्माण पर कितना खर्च होगा। इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से न केवल सोनभद्र जैसे दूरस्थ जिले को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी बल्कि औद्योगिक विकास पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।