मानदेय बढ़ाने व बढ़ते कार्यभार के खिलाफ आंगनवाड़ी कर्मियों का आंदोलन, 8 मार्च को लखनऊ में प्रदर्शन

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मानदेय वृद्धि और बढ़ते कार्यभार के विरोध में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का राज्यव्यापी आंदोलन।

पूरे राज्य में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मानदेय बढ़ाने और लगातार बढ़ते कार्यभार को कम करने की मांग को लेकर बड़े आंदोलन की घोषणा की है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे जमीनी स्तर पर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में सबसे अहम भूमिका निभाती हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है। लंबे समय से कार्यरत आंगनवाड़ी कर्मियों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि उनकी मेहनत और योगदान को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

आंगनवाड़ी यूनियनों के प्रतिनिधियों के अनुसार कार्यकर्ताओं पर अब केवल पोषण और मातृ शिशु देखभाल तक सीमित जिम्मेदारी नहीं रह गई है। उन्हें डेटा एंट्री सर्वेक्षण चुनाव से जुड़े दायित्व और अन्य प्रशासनिक कार्य भी सौंपे जा रहे हैं जिससे काम का बोझ कई गुना बढ़ गया है। यूनियनों का आरोप है कि सरकार की ओर से न तो इस अतिरिक्त काम के लिए कोई अतिरिक्त मुआवजा दिया गया है और न ही संसाधनों या स्टाफ के रूप में पर्याप्त सहयोग उपलब्ध कराया गया है। इसका सीधा असर कार्यकर्ताओं की आजीविका और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है।

यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी वर्षों पुरानी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो पूरे राज्य से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आठ मार्च को Lucknow में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करेंगी। उनके अनुसार यह प्रदर्शन सरकार का ध्यान उन समस्याओं की ओर आकर्षित करने के लिए एक निर्णायक कदम होगा जो सीधे तौर पर उनके काम करने की परिस्थितियों और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि बिना ठोस निर्णय के केवल आश्वासन देना अब स्वीकार्य नहीं है।

आंदोलन से जुड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि मानदेय में वृद्धि और काम की जिम्मेदारियों को तर्कसंगत बनाना उनकी नई मांग नहीं है बल्कि यह मुद्दा कई वर्षों से उठाया जा रहा है। बार बार बातचीत और आश्वासन के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह तुरंत संवाद शुरू करे और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका और मेहनत को ध्यान में रखते हुए सम्मानजनक मानदेय और कार्य व्यवस्था सुनिश्चित करे।

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