आजमगढ़ में सामूहिक विवाह योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, प्रेम विवाह कर चुके दंपती की दोबारा कराई गई शादी
आजमगढ़। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आजमगढ़ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक साल पहले प्रेम विवाह कर चुके दंपती की विभागीय मिलीभगत से दोबारा शादी करा दी गई। मामले के उजागर होने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लक्ष्य से अधिक कराई गई शादियां, जांच में खुला मामला
वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले को एक हजार जोड़ों के सामूहिक विवाह का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन विभाग द्वारा लक्ष्य से अधिक 774 अतिरिक्त जोड़ों की शादी कराई गई। इसी क्रम में 27 फरवरी 2026 को विकास खंड बिलरियागंज परिसर में 146 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया था।
इसी सूची की जांच के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने पूरे कार्यक्रम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए। विकास खंड महराजगंज के खोजापुर गांव निवासी अभिषेक कुमार और पूजा का नाम भी इस सूची में शामिल पाया गया, जबकि दोनों पहले ही प्रेम विवाह कर चुके थे।
एक साल पहले मंदिर में हो चुकी थी शादी
जानकारी के अनुसार, अभिषेक कुमार (पुत्र सुरेंद्र) और पूजा (पुत्री राजपाल, निवासी सादातपुर) का विवाह करीब एक वर्ष पूर्व महराजगंज ब्लॉक स्थित भैरवधाम मंदिर में हुआ था। इस शादी में दोनों पक्षों के परिजन भी मौजूद थे और यह विवाह पूरी तरह से सामाजिक रूप से स्वीकार्य था।
इसके बावजूद, सामूहिक विवाह योजना में इन्हें दोबारा शामिल किया जाना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।
दलाल और विभागीय मिलीभगत का आरोप
मामले में आरोप है कि किसी दलाल या विभागीय कर्मचारी ने आर्थिक लाभ के लालच में दंपती का दोबारा पंजीकरण कराया। हैरानी की बात यह है कि ब्लॉक स्तर पर एडीएम समाज कल्याण की निगरानी में सत्यापन प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई, लेकिन इस गंभीर तथ्य की अनदेखी कर दी गई कि दोनों पहले से विवाहित थे।
योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि और उपहार भी दंपती को प्रदान किए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत हुई है।
60 हजार रुपये की निकासी और कमीशन का खेल
दंपती के नाम पर मिलने वाली 60 हजार रुपये की सहायता राशि भी विवादों में आ गई है। आरोप है कि संबंधित दलाल ने अभिषेक के साथ मिलकर यह राशि खाते से निकलवाई और पूजा को केवल 10 हजार रुपये नकद दिए। इसमें से भी करीब 400 रुपये कमीशन के रूप में काट लिए गए।
पूजा ने बताया कि जिसने उनका पंजीकरण कराया, उसी ने पूरी प्रक्रिया कराई और पैसे का लेनदेन भी उसी के माध्यम से हुआ। उसने यह भी कहा कि शादी से जुड़े सभी फोटो उसी व्यक्ति के पास हैं।
अधिकारियों ने दंपती को ही ठहराया दोषी
मामले के सामने आने के बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश चौधरी ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए दंपती को ही दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि प्रेम विवाह के बाद सामूहिक विवाह योजना में पंजीकरण कराने वाले स्वयं जिम्मेदार हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और योजना के तहत खर्च की गई धनराशि की रिकवरी की जाएगी।
सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात कही जाती है, वहीं इस तरह के मामलों से यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते योजनाओं का दुरुपयोग हो रहा है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
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