बाराबंकी में मां की डांट से आहत छात्र ने लगाई फांसी, 16 वर्षीय सूफियान की मौत
बाराबंकी। जिले के टिकैतनगर क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां बाइक चलाने से मना करने पर नाराज एक हाई स्कूल छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पूरे गांव में शोक का माहौल है।
बाइक ले जाने से मना करने पर हुआ विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, टिकैतनगर थाना क्षेत्र के हाता पंसारा गांव निवासी अमजद का 16 वर्षीय पुत्र सूफियान एक निमंत्रण कार्यक्रम में बाइक लेकर जाना चाहता था।
मां ने उसे बाइक ले जाने से मना कर दिया, क्योंकि वह पहले भी बाइक चलाते समय दो बार घायल हो चुका था। मां के समझाने के बावजूद सूफियान नाराज हो गया।
मां के जाने के बाद उठाया आत्मघाती कदम
बताया जा रहा है कि मां कार्यक्रम में चली गई, जिसके बाद सूफियान ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। उस समय घर में केवल उसकी दादी मौजूद थीं।
काफी देर तक दरवाजा न खुलने पर दादी को शक हुआ। उन्होंने कई बार दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पड़ोसियों को बुलाया गया।
जब दरवाजा खोला गया तो सूफियान का शव कमरे के अंदर फंदे से लटका मिला। यह दृश्य देख परिजन और ग्रामीण स्तब्ध रह गए।
परिवार की स्थिति और पृष्ठभूमि
सूफियान हाई स्कूल का छात्र था और चार भाई-बहनों में सबसे छोटा था। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य नहीं थी। उसके पिता अमजद मुंबई में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
मृतक के फूफा मोहम्मद नसीम ने बताया कि सूफियान पहले भी बाइक चलाते समय दो बार घायल हो चुका था, इसलिए उसकी मां ने उसे बाइक चलाने से रोका था।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। परिजनों के बयान दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संवेदनशील मुद्दा, जागरूकता की जरूरत
यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि किशोरावस्था में भावनात्मक संतुलन और संवाद कितना महत्वपूर्ण होता है। छोटी-छोटी बातों पर भी बच्चे मानसिक रूप से आहत हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवार और समाज को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने, उनकी भावनाओं को समझने और समय रहते मार्गदर्शन देने की आवश्यकता है, ताकि इस प्रकार की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
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