भदोही में कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार का भंडाफोड़, एक गिरफ्तार

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Pradyumn Kant Patel
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भदोही में पुलिस द्वारा अवैध कोडीन युक्त कफ सिरप जब्त करते हुए

जनपद भदोही में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी और अहम सफलता हाथ लगी है। थाना औराई पुलिस टीम ने चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए कोडीन युक्त कफ सिरप को अनुचित लाभ के उद्देश्य से बेचने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में थाना औराई और थाना चौरी पर पहले से पंजीकृत कई अभियोगों से संबंधित प्रकाश में आए एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से औषधि विक्रय अनुज्ञप्ति के दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेजों और कागजी लेनदेन के सहारे नशे के कारोबार को बढ़ाने से जुड़ा हुआ है।

इस प्रकरण की शुरुआत उस समय हुई जब थाना औराई पर औषधि निरीक्षक कुमार सौमित्र खाद्य एवं सुरक्षा कार्यालय ज्ञानपुर भदोही द्वारा सूचना दी गई। उन्होंने अवगत कराया कि Apcores Syrup 100 ml और New Phensedyl Syrup 100 ml जैसी कोडीन युक्त दवाओं का गैर चिकित्सकीय प्रयोग नशे के रूप में किया जा रहा है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि Schedule H और H1 श्रेणी में आने वाली इन दवाओं को बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श और वैधानिक औपचारिकताओं को पूरा किए बिना खुले बाजार में बेचा जा रहा था। अधिक मुनाफा कमाने और अनुचित लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से आपराधिक षडयंत्र के तहत कूटरचित और फर्जी विक्रय बीजक तैयार किए गए तथा कागजों में बड़े पैमाने पर दवाओं की खरीद और बिक्री दर्शाई गई।

इस संबंध में थाना औराई जनपद भदोही में ओमप्रकाश कसेरा पुत्र शिवशंकर प्रसाद निवासी चेतगंज वाराणसी के विरुद्ध मु0अ0सं0 497/2025 धारा 206, 318(4), 336(3), 340(2), 338, 61(2) बीएनएस के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया। वहीं थाना चौरी जनपद भदोही में अंशिका गुप्ता निवासी स्टेशन रोड परसीपुर, दिलीप कुमार उमर पुत्र हरिश्चन्द्र निवासी आजाद नगर नई बाजार भदोही तथा अमन कुमार पुत्र जयभरत निवासी जगतगंज थाना वाराणसी कैंट जनपद वाराणसी के विरुद्ध क्रमशः मु0अ0सं0 186/2025 और मु0अ0सं0 187/2025 धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 206(b) बीएनएस के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किए गए। इन सभी मामलों में आवश्यक विधिक कार्यवाही प्रारंभ की गई और पूरे नेटवर्क की गंभीरता से जांच शुरू की गई।

पुलिस अधीक्षक भदोही अभिमन्यु मांगलिक के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल के कुशल पर्यवेक्षण में अपराध और अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत विवेचना को आगे बढ़ाया गया। विवेचनात्मक कार्यवाही के दौरान थाना औराई पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़ा एक अहम अभियुक्त माधोसिंह रेलवे स्टेशन के पास मौजूद है और कहीं भागने की फिराक में है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शैलेन्द्र तिवारी पुत्र अमरनाथ तिवारी निवासी भिखारीदास लेन भारतेन्दु भवन थाना चौक जनपद वाराणसी उम्र करीब 44 वर्ष को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ के दौरान अभियुक्त शैलेन्द्र तिवारी ने कई अहम और चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वर्ष 2024 में उसकी मुलाकात वाराणसी की दवा मंडी के एक दवा व्यापारी से कराई गई थी। उसी व्यापारी ने उसे दिल्ली की एक फर्म से जोड़ा। उसे बताया गया कि कोडीन सिरप की वास्तविक सप्लाई नहीं करनी है, बल्कि केवल कागजों में इनवर्ड और आउटवर्ड दिखाना है। फर्जी ई वे बिल तैयार कर जीएसटी फाइल की जाती थी। अभियुक्त ने स्वीकार किया कि एक कोडीन कफ सिरप की बोतल का बिल बनाने पर उसे एक रुपये का भुगतान किया जाता था। इसी लालच में उसने कई फर्मों के नाम पर कागजों में कोडीन सिरप प्राप्त करना और सप्लाई दिखाना शुरू कर दिया।

अभियुक्त के अनुसार उसने कागजों में लगभग दस लाख बोतलों की सप्लाई दिखाई। उसने यह भी बताया कि उसके कहने पर सभी दस्तावेज फर्जी और कूटरचित तरीके से तैयार किए जाते थे। जो भी ई वे बिल बनाए जाते थे, उनमें फर्जी तरीके से किसी भी वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर डाल दिया जाता था। जैसे ही किसी खाते में कैश डिपॉजिट के रूप में पैसा आता था, कुछ ही घंटों के भीतर वह पूरी धनराशि आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से उसकी फर्म के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती थी, जो एचडीएफसी बैंक में था। इस तरह कुल मिलाकर उसके खाते में लगभग तीन करोड़ रुपये आए थे।

अभियुक्त ने बताया कि वर्ष 2025 में उसके खाते में 121338102 रुपये की जमा और निकासी की गई। इसके अलावा कई अन्य फर्मों से भी भारी मात्रा में धनराशि उसके खाते में आई। यह रकम आगे एक मेडिकल एजेंसी को ट्रांसफर कर दी जाती थी। इस पूरे अवैध कारोबार के बदले उसे वास्तविक रूप से करीब 12 से 15 लाख रुपये मिले। उसने स्वीकार किया कि उसे यह कहकर लालच दिया गया था कि उसे कुछ नहीं करना है, सिर्फ अपने खाते का प्रयोग होने देना है और इनवॉइस बिल तथा ई वे बिल तैयार करने हैं। अभियुक्त ने यह भी बताया कि फर्म उसकी पत्नी के नाम पर जरूर ली गई थी, लेकिन पूरे कारोबार का संचालन वही कर रहा था।

अपराध की गंभीरता और नशीली दवाओं से जुड़े इस मामले को देखते हुए पुलिस ने थाना औराई में पंजीकृत मु0अ0सं0 497/2025 में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8, 21सी, 27क और 29(1) की बढ़ोतरी की है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाले नेटवर्क के खिलाफ एक सख्त संदेश है। साथ ही थाना चौरी में पंजीकृत मु0अ0सं0 186/2025 और मु0अ0सं0 187/2025 की विवेचना भी तेजी से की जा रही है, ताकि इस पूरे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सके।

इस पूरी कार्रवाई में उप निरीक्षक दिनेश कुमार विवेचक, उप निरीक्षक गजानन चौबे और हेड कांस्टेबल इमरान अहमद थाना औराई जनपद भदोही की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद भदोही में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा और कानून का दुरुपयोग कर समाज को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।