भोजपुर जिले में जीएसटी चोरी को लेकर वाणिज्य कर विभाग ने ईंट भट्ठा संचालकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक जांच अभियान शुरू कर दिया है। बड़े पैमाने पर ईंट उत्पादन और बिक्री के बावजूद सही जानकारी न देने, बिक्री छिपाने और बिना निबंधन के भट्ठा संचालन की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने जिलेभर में कार्रवाई तेज कर दी है। इस अभियान का उद्देश्य ईंट उद्योग में कर व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और सरकार को हो रहे राजस्व नुकसान पर प्रभावी रोक लगाना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोजपुर जिले में करीब 180 ईंट भट्ठे संचालित बताए जा रहे हैं, जबकि वाणिज्य कर विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल 153 भट्ठे ही निबंधित हैं। ऐसे में लगभग दो दर्जन से अधिक भट्ठों के बिना निबंधन संचालन की आशंका जताई जा रही है। विभाग ने ऐसे सभी संदिग्ध भट्ठों को जांच के दायरे में ले लिया है। बिना निबंधन भट्ठा चलाना जीएसटी नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है, जिससे सरकार को बड़े स्तर पर राजस्व क्षति हो सकती है।
राज्य कर संयुक्त आयुक्त शाहाबाद अंचल के निर्देश पर इस जांच के लिए तीन विशेष टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों में राज्य कर संयुक्त आयुक्त आबिद सुभहानी, राज्य कर सहायक आयुक्त हरेराम और जयंती कुमारी शामिल हैं। इन अधिकारियों के नेतृत्व में गठित टीमें जिले के विभिन्न प्रखंडों में ईंट भट्ठों का भौतिक सत्यापन कर रही हैं। जांच के दौरान भट्ठों पर मौजूद ईंटों की संख्या, कोयले का स्टॉक और उत्पादन क्षमता का मिलान किया जा रहा है, ताकि वास्तविक उत्पादन और बिक्री का सही आकलन हो सके।
विभाग द्वारा भट्ठा संचालकों से पिछले तीन वर्षों का विस्तृत लेखा जोखा भी मांगा गया है। इसमें यह जांच की जा रही है कि इस अवधि में कितना कोयला खरीदा गया, कितनी ईंटों का उत्पादन हुआ और कितनी ईंटों की बिक्री की गई। यदि उपलब्ध स्टॉक और कागजी रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित भट्ठा संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें कर निर्धारण, भारी जुर्माना और गंभीर मामलों में भट्ठा सील करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
वाणिज्य कर विभाग का कहना है कि इस अभियान का मकसद नियमों का पालन करने वाले ईमानदार भट्ठा संचालकों को परेशान करना नहीं है, बल्कि कर प्रणाली में पारदर्शिता लाना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जो संचालक नियमों के तहत काम कर रहे हैं, उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। वहीं, जानबूझकर जीएसटी चोरी करने और गलत आंकड़े प्रस्तुत करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कुछ भट्ठा संचालक वास्तविक उत्पादन से कम आंकड़े दिखाकर जीएसटी से बचने की कोशिश कर रहे थे। कई भट्ठों में कोयले की खपत और ईंट उत्पादन का कोई स्पष्ट और नियमित रिकॉर्ड नहीं रखा गया है। ऐसे मामलों में टीम न केवल दस्तावेजों की जांच कर रही है, बल्कि मौके पर मौजूद ईंटों की गिनती और कोयला भंडारण का भी बारीकी से मिलान कर रही है।
राज्य कर संयुक्त आयुक्त शाहाबाद अंचल नरेश कुमार ने बताया कि जिले में चिमनी ईंट भट्ठों से जुड़े कर चोरी की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिस पर अब ठोस कदम उठाया गया है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। इससे न सिर्फ सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
