वाराणसी: महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की दूरदर्शिता से स्थापित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का 111वां स्थापना दिवस शुक्रवार को पूरे हर्षोल्लास, गरिमा और परंपरा के साथ मनाया जाएगा। शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को आत्मसात किए इस ऐतिहासिक अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर उत्सव स्थल में तब्दील हो जाएगा। करीब 30 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता के साथ यह समारोह न केवल बीएचयू परिवार, बल्कि समूचे काशी के लिए गौरव का क्षण बनेगा।
वर्ष 1916 में महामना द्वारा स्थापित बीएचयू आज देश ही नहीं, बल्कि विश्व के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। स्थापना दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी संकाय, विद्यालय, महाविद्यालय, विभाग और छात्रावास पूरी सक्रियता के साथ आयोजन में भाग लेंगे। छात्र, शिक्षक और कर्मचारी पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे नजर आएंगे, जिससे परिसर में भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिलेगी।
समारोह की शुरुआत सुबह 7 बजे ट्रॉमा सेंटर परिसर में स्थित संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की जाएगी। इसके बाद विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों और विभागों से निकलने वाली 31 आकर्षक झांकियां मुख्य मार्गों से होती हुई कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगी। ये झांकियां स्थापना दिवस समारोह की विशेष पहचान होंगी, जिनमें शिक्षा, विज्ञान, आयुर्वेद, कृषि, भारतीय संस्कृति, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को रचनात्मक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।
दोपहर 9 बजे के बाद झांकियों का औपचारिक भ्रमण प्रारंभ होगा, जिसमें विश्वविद्यालय के लगभग 1700 प्रोफेसर, 40 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में कर्मचारी सहभागी बनेंगे। अनुशासन, एकता और समर्पण का यह दृश्य बीएचयू की सामूहिक चेतना और शैक्षणिक परंपरा को सजीव रूप में प्रस्तुत करेगा।
शाम होते-होते परिसर सांस्कृतिक रंगों में रंग जाएगा। सांस्कृतिक संध्या में छात्र-छात्राएं नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। भारतीय शास्त्रीय परंपराओं से लेकर समकालीन अभिव्यक्तियों तक, हर प्रस्तुति में बीएचयू की सांस्कृतिक समृद्धि झलकेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार स्थापना दिवस को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और अनुशासन को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि आयोजन सुचारु और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके।
बीएचयू का 111वां स्थापना दिवस केवल एक समारोह नहीं, बल्कि महामना के सपनों, शिक्षा के संकल्प और भारतीय संस्कृति की आत्मा का उत्सव है। यह दिन काशीवासियों और देशभर से जुड़े बीएचयू परिवार के लिए प्रेरणा, गौरव और अविस्मरणीय स्मृतियों का साक्षी बनेगा—जहां ज्ञान, परंपरा और भविष्य एक साथ कदमताल करते नजर आएंगे।
