बीआरडी मेडिकल कॉलेज की नई पहल, मरीजों की छोटी समस्याओं पर होगा शोध
गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट एमआरयू में अब शोध और अध्ययन का फोकस मरीजों से जुड़ी रोजमर्रा की छोटी समस्याओं पर किया जाएगा। इलाज के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को पहचानकर उनके समाधान खोजने की दिशा में यह पहल शुरू की गई है। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि छोटी समस्याओं पर गंभीरता से काम करने से उपचार की गुणवत्ता में बड़ा सुधार संभव है और मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा।
इस पहल के तहत जूनियर डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों से कहा गया है कि वे मरीजों के इलाज के दौरान सामने आने वाली हर उस परेशानी को चिह्नित करें जो उपचार को प्रभावित करती है या मरीज को अनावश्यक कष्ट देती है। इन समस्याओं को लिखकर एमआरयू में रखे गए एक विशेष बॉक्स में डाला जाएगा। इसके बाद एमआरयू की टीम इन सभी बिंदुओं का अध्ययन करेगी और शोध के माध्यम से व्यावहारिक समाधान तलाशेगी।
एमआरयू के नोडल अधिकारी डॉ राजकिशोर सिंह के अनुसार इस विचार की शुरुआत डॉक्टर और छात्र के बीच हुए एक संवाद से हुई। एक छात्र ने बताया कि कई बार मरीजों की नस स्पष्ट न मिलने के कारण इंट्राकैथ लगाने में कठिनाई होती है और बार बार इंजेक्शन चुभोना पड़ता है। इससे मरीज को दर्द और परेशानी होती है और इलाज की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। इस तरह की समस्याओं का समाधान निकलना डॉक्टर और मरीज दोनों के लिए लाभकारी होगा।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए यह तय किया गया कि मरीजों से जुड़ी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण समस्याओं को शोध का विषय बनाया जाए। एमआरयू में एकत्र होने वाली समस्याओं का विश्लेषण विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ मिलकर करेंगे। शोध निष्कर्षों के आधार पर अस्पताल प्रबंधन को सुझाव दिए जाएंगे ताकि नीतिगत और व्यवहारिक स्तर पर जरूरी बदलाव किए जा सकें। इसके लिए सात फरवरी को जूनियर डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे समस्याओं को सही तरीके से पहचानकर दर्ज कर सकें।
हाल ही में दिल्ली में देशभर के मेडिकल कॉलेजों की एक बैठक हुई थी जिसमें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और शासन के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस बैठक में भी इस बात पर जोर दिया गया था कि मरीजों की समस्याओं को शोध और अध्ययन का केंद्र बनाया जाए और ऐसे समाधान प्रस्तुत किए जाएं जिनसे उपचार की गुणवत्ता बेहतर हो सके।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इस पहल से बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज की गुणवत्ता के साथ साथ मानवीय संवेदना को भी मजबूती मिलेगी। जब मरीजों की छोटी परेशानियों को गंभीरता से सुना और समझा जाएगा तो अस्पताल में आने वाला हर मरीज खुद को अधिक सुरक्षित और संतुष्ट महसूस करेगा। यह पहल भविष्य में अन्य मेडिकल संस्थानों के लिए भी एक उपयोगी मॉडल बन सकती है।
