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न्यूज रिपोर्ट की खबर का बड़ा असर: सीएम योगी ने दिखाए सख्त तेवर, अधिकारियों को दिया जीरो टॉलरेंस का अल्टीमेटम

न्यूज रिपोर्ट की खबर का बड़ा असर: सीएम योगी ने दिखाए सख्त तेवर, अधिकारियों को दिया जीरो टॉलरेंस का अल्टीमेटम

न्यूज रिपोर्ट की खबर के बाद सीएम योगी ने काशी के घाटों पर अराजकता पर सख्त रुख अपनाया, अधिकारियों को जीरो टॉलरेंस का अल्टीमेटम दिया।

वाराणसी: बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में आस्था के केंद्रों की पवित्रता और विकास की रफ्तार को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कड़ा रुख अपनाया, उसकी गूंज लंबे समय तक प्रशासनिक गलियारों में सुनाई देगी। अपने दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे मुख्यमंत्री ने सर्किट हाउस सभागार में जब समीक्षा बैठक की कमान संभाली, तो उनका स्पष्ट संदेश था कि काशी की वैश्विक छवि के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बैठक की सबसे अहम बात यह रही कि 'न्यूज रिपोर्ट' द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित खबर "शिव की नगरी में तांडव, आस्था के घाटों पर अराजकता का काला साया, मौन प्रशासन और धूमिल होती काशी की वैश्विक छवि" ने मुख्यमंत्री का सीधा ध्यान खींचा। इस खबर का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने भरे सभागार में अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि घाटों पर किसी भी प्रकार की अराजकता, हुड़दंग या धरना-प्रदर्शन अब स्वीकार्य नहीं होगा। यह खबर प्रशासन के लिए एक आईना साबित हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि आस्था के ये केंद्र केवल श्रद्धालुओं के लिए हैं और यहाँ की शांति भंग करने वालों के खिलाफ अब सीधी और कठोर कार्रवाई होगी।

विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दालमंडी सड़क चौड़ीकरण की पुरानी और जटिल परियोजना को लेकर भी अधिकारियों के पेंच कसे। उन्होंने निर्देश दिया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में अब और विलंब नहीं होना चाहिए और यदि न्यायालयों में इससे संबंधित कोई मामले लंबित हैं, तो उनकी प्रभावी पैरवी कर शीघ्र निस्तारण कराया जाए ताकि सड़क निर्माण में तेजी आ सके। इसके साथ ही, वरुणा नदी के पुनरोद्धार को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों को गहरी नींद से जागने का संकेत दिया। मुख्यमंत्री ने बाढ़ बचाव कार्यों में केवल कागजी घोड़ों पर निर्भर रहने के बजाय जनप्रतिनिधियों के जमीनी सुझावों को प्रस्तावों में शामिल करने की हिदायत दी, जिससे जनता को वास्तविक राहत मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर परियोजना की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त हों, जो बाधाओं को तत्काल दूर कर अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करें।

नागरिक सुविधाओं और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री का लहज़ा बेहद सख्त और अभिभावक जैसा रहा। उन्होंने नगर निगम और जल निगम की कार्यप्रणाली पर पैनी नजर रखते हुए कहा कि शहर के हर नागरिक को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना अधिकारियों की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है। शहर की यातायात व्यवस्था, जो अक्सर जाम के झाम में फंसी रहती है, उस पर चिंता जताते हुए उन्होंने वेंडिंग जोन और पार्किंग की एक व्यवस्थित कार्ययोजना लागू करने को कहा। अवैध टैक्सी, बस और रिक्शा स्टैंड को हटाकर उन्हें निर्धारित स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए, ताकि सड़कें वाहनों के लिए हों, न कि अतिक्रमण के लिए। ठंड के मौसम को देखते हुए रैन बसेरों में कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था और माघ मेले को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश भी दिए गए, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को काशी में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

कानून व्यवस्था के मोर्चे पर पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री ने पुलिसिंग को और अधिक मानवीय और चुस्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने साफ कहा कि पुलिस का व्यवहार पर्यटकों और आम जनता के प्रति मित्रवत और सहयोगी होना चाहिए, लेकिन अपराधियों के लिए काल जैसा हो। शहर में हुक्का बारों की आड़ में चल रही अनैतिक गतिविधियों, पेशेवर गुंडों, भू-माफियाओं और चेन स्नेचरों के खिलाफ थानावार अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया गया। साथ ही, साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए साइबर थानों और हेल्पडेस्क को पूरी तरह सक्रिय करने की बात कही गई। बैठक से पूर्व जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने विकास का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि 2014 से अब तक 35,155 करोड़ की 486 परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं और वर्तमान में 17,915 करोड़ की 128 परियोजनाएं गतिमान हैं, जो काशी की बदलती तस्वीर की गवाह हैं।

इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सरकार और संगठन का पूरा अमला मौजूद रहा, जिसमें स्टाम्प राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल, आयुष राज्य मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ’दयालु’, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी, पूर्व मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा सहित कई विधायक और वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के इस दौरे ने स्पष्ट कर दिया है कि 'न्यूज रिपोर्ट' जैसी जागरूक पत्रकारिता जब समस्याओं को उजागर करती है, तो शासन भी उसे गंभीरता से लेता है और उसका परिणाम जमीनी स्तर पर सुधार के रूप में देखने को मिलता है।

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