77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की स्थापना में योगदान देने वाले सभी महापुरुषों को नमन करते हुए उनके बलिदान को स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ और इसके बाद डॉ राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में संविधान सभा के गठन के उपरांत 26 नवंबर 1949 को भारत ने अपने संविधान को अंगीकार किया। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और उसी दिन से भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीते 76 वर्षों की संवैधानिक यात्रा में भारत ने अनेक चुनौतियों का सामना किया है लेकिन इन सभी उतार चढाव के बावजूद संविधान ने देश को एक सूत्र में बांधे रखा। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक देश की एकता अखंडता और नागरिकों के गौरव को मजबूत करने में संविधान की भूमिका केंद्रीय रही है। उन्होंने कहा कि आज जब एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना साकार होती दिखाई देती है तो इसके मूल में संविधान की वही भावना है जो समष्टि के भाव से सभी को जोडती है।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को स्मरण करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन ने नई ऊंचाइयों को छुआ। उन्होंने भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष और प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद संविधान शिल्पी डॉ भीमराव आंबेडकर लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और क्रांतिकारी नेता सुभाष चंद्र बोस सहित देश की आजादी के लिए सर्वस्व अर्पित करने वाले सभी महान सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान किसी एक व्यक्ति से ऊपर है और कोई भी व्यक्ति स्वयं को न्याय व्यवस्था या संविधान से ऊपर नहीं मान सकता। गणतंत्र दिवस का यह दिन संविधान के प्रति समर्पण और उसके मूल संकल्पों को आगे बढाने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान न्याय समता और बंधुता के मूल सिद्धांतों पर आधारित है और प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह इन मूल भावनाओं का सम्मान करे। जाति मत मजहब भाषा या क्षेत्र के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव संविधान की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि जब समाज में समता और बंधुता का भाव मजबूत होगा तब देश को विकसित बनाने का संकल्प और भी सशक्त होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संकल्प केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है बल्कि हर नागरिक की खुशहाली और आत्मनिर्भरता से जुडा हुआ है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भी संविधान की मूल भावनाओं का अनादर होता है तो वह उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का भी अपमान होता है जिनके संघर्ष से देश आजाद हुआ। संविधान भारत को एकता और अखंडता के सूत्र में बांधने के साथ साथ प्रत्येक नागरिक तक न्याय और समान अवसर पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि संविधान की पंक्ति हम भारत के लोग हर नागरिक के लिए प्रेरणा है और इसका वास्तविक संरक्षक देश का जागरूक नागरिक ही है। सभी संस्थाओं और विभागों की जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों के प्रति अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करें क्योंकि यही संविधान के प्रति सच्चा सम्मान है।
