संघर्ष से सेवा तक का सफर मां आशा तारा फाउंडेशन के संस्थापक देवेंद्र ओझा की प्रेरक कहानी
साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण यात्रा
समाज में बदलाव लाने वाले लोग अक्सर साधारण परिस्थितियों से निकलकर असाधारण उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। देवेंद्र ओझा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जिन्होंने अपने जीवन के कठिन दौर को अपनी ताकत बनाते हुए सेवा समर्पण और संवेदनशीलता की मिसाल कायम की है। मां आशा तारा फाउंडेशन के संस्थापक के रूप में आज उनका नाम उन लोगों में शुमार हो चुका है जो बिना किसी स्वार्थ के समाज के कमजोर वर्गों के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।
कम उम्र में आई बड़ी जिम्मेदारी
गाजीपुर जिले में सात जुलाई उन्नीस सौ नब्बे को जन्मे देवेंद्र ओझा का जीवन शुरू से ही चुनौतियों से भरा रहा। उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी यहीं पूरी हुई लेकिन वर्ष दो हजार आठ में उनके जीवन ने अचानक बड़ा मोड़ लिया जब उनके पिता का असमय निधन हो गया। उनके पिता एक सामाजिक और जनसेवी व्यक्ति थे जिनकी मृत्यु लोगों की जान बचाने के दौरान बिजली लगने से हुई। उस समय देवेंद्र की उम्र महज सत्रह से अठारह वर्ष थी और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।
संघर्ष के बीच शिक्षा और आत्मनिर्भरता
ऐसी परिस्थितियों में जहां कई लोग हार मान लेते हैं वहीं देवेंद्र ओझा ने संघर्ष को ही अपनी पहचान बना लिया। उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी और समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने कई डिप्लोमा कोर्स भी किए जिससे उनके विचारों में व्यापकता आई और समाज को समझने का दृष्टिकोण मजबूत हुआ।
मां आशा तारा फाउंडेशन की स्थापना
इसी सोच और संकल्प का परिणाम था इकतीस मार्च दो हजार बीस को मां आशा तारा फाउंडेशन की स्थापना। यह संस्था केवल एक संगठन नहीं बल्कि मानवता की सेवा का एक विचार है। शुरुआत छोटे स्तर से हुई लेकिन उद्देश्य हमेशा बड़ा रहा। देवेंद्र ओझा ने अपनी आय का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में समर्पित कर दिया जो उनकी निस्वार्थ भावना को दर्शाता है।
विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य
पिछले कुछ वर्षों में यह संस्था एक मजबूत सामाजिक मंच के रूप में उभरी है जिससे सैकड़ों लोग जुड़े हैं। संस्था द्वारा समरसता नैतिक शिक्षा स्वास्थ्य सेवाएं महिला सशक्तिकरण रोजगार सृजन कृषि और किसान सम्मान युवा कौशल विकास पर्यावरण संरक्षण तथा धर्मार्थ कार्यों जैसे कई क्षेत्रों में लगातार कार्य किया जा रहा है। संस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके सभी कार्य निःशुल्क और सेवा भाव से किए जाते हैं जिससे जरूरतमंदों को सीधा लाभ मिलता है।
समर्पित टीम का योगदान
इस संस्था की सफलता के पीछे एक मजबूत और समर्पित टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान है। रेखा सिंह विजयशंकर द्विवेदी सत्यम पाण्डेय आशीष राय सोनी विश्वकर्मा कहकशा नाज सतीश श्रीवास्तव अब्दुल हाशमी रवि प्रकाश प्रदीप जौहरी धनंजय उपाध्याय प्रियंका माया निशा सुमन कमलेंदु और हिमांशु सहित कई साथियों ने इस मिशन को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
देवेंद्र ओझा का व्यक्तित्व उनकी संवेदनशीलता और सेवा भावना को दर्शाता है। वे न केवल एक समाजसेवी हैं बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक भी हैं जो युवाओं को यह प्रेरणा देते हैं कि जीवन में सफलता के साथ साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही जरूरी है।
उम्मीद और बदलाव का प्रतीक
आज मां आशा तारा फाउंडेशन एक संस्था से बढ़कर उम्मीद का प्रतीक बन चुकी है। यह उन लोगों के लिए सहारा है जो सहायता की तलाश में हैं और उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। आने वाले समय में इस संस्था से और बड़े कार्यों की उम्मीद की जा रही है जो समाज के विभिन्न वर्गों को नई दिशा देंगे।
संघर्ष से सफलता तक की सीख
देवेंद्र ओझा की यह यात्रा यह संदेश देती है कि मजबूत इरादे और सेवा का भाव हो तो कोई भी चुनौती इंसान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची सफलता वही है जो दूसरों के जीवन में खुशी और उम्मीद लेकर आए।
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