गाजीपुर जिले के Darauli railway station पर शुक्रवार को उस समय अफरा तफरी मच गई जब पीडीडीयू से पटना जा रही मेमू पैसेंजर ट्रेन में सवार दो गांवों के युवकों के बीच सरस्वती प्रतिमा को लेकर विवाद हो गया। सरस्वती पूजन के लिए लाई जा रही मूर्तियों के आपस में टकराने से एक प्रतिमा में खरोंच आ जाने पर विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। हालांकि ट्रेन में मौजूद यात्रियों के हस्तक्षेप से स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया।
जानकारी के अनुसार चंदौली जनपद के सकलडीहा क्षेत्र से दरौली और जबुरना गांव के युवक मेमू पैसेंजर ट्रेन से सरस्वती पूजा के लिए प्रतिमाएं लेकर आ रहे थे। ट्रेन की बोगी में दोनों गांवों की मूर्तियां एक ही स्थान पर रखी गई थीं। यात्रा के दौरान मूर्तियों के टकराने से दरौली गांव के युवकों की प्रतिमा में खरोंच आ गई। इसे लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई जो दरौली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के लूप लाइन में पहुंचते ही मारपीट में बदल गई।
सुबह करीब 10 बजकर 37 मिनट पर स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही विवाद तेज हो गया। स्थिति बिगड़ती देख कुछ यात्रियों ने बीच बचाव किया और जबुरना गांव के एक युवक को बोगी के भीतर कर दरवाजा बंद कर दिया गया जिससे मामला शांत हुआ। इसके बाद दरौली गांव के युवक अपनी प्रतिमा लेकर स्टेशन से चले गए। इस दौरान रन थ्रू ट्रेन पास कराए जाने के कारण मेमू पैसेंजर लगभग बीस मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। इस संबंध में जीआरपी चौकी प्रभारी अश्वनी कुमार ने बताया कि उनके स्तर पर किसी प्रकार की लिखित सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
इसी बीच दरौली क्षेत्र में रेल पथ विभाग के कार्य के कारण रेल परिचालन भी प्रभावित रहा। स्थानीय बाजार के पास रेल फाटक के समीप अप मेन लाइन में क्रासिंग के आगे रेल पटरी का पाइंट बदलने का कार्य किया गया। इसके लिए सुबह 9 बजकर 25 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक लगभग तीन घंटे का ब्लॉक लिया गया था। ब्लॉक के चलते भदौरा स्टेशन पर पटना पीडीडीयू मेमू पैसेंजर और एक मालगाड़ी करीब पचास मिनट तक खड़ी रही जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
ब्लॉक समाप्त होने के बाद पहले मालगाड़ी और उसके बाद पीडीडीयू पटना मेमू पैसेंजर का संचालन शुरू किया गया। इस संबंध में दिलदारनगर रेल पथ के अवर अभियंता Dilip Kumar ने बताया कि मेन लाइन में पुराने पाइंट को बदलकर नया लगाया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से तीस किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा के साथ ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया था। घटना और तकनीकी कार्य के चलते अप लाइन में जाने वाले यात्रियों को कुछ समय तक असुविधा झेलनी पड़ी।
