गाजीपुर/बलिया: पूर्वांचल की सियासत और प्रशासनिक मर्यादा से जुड़ा एक दृश्य इन दिनों सोशल मीडिया पर तीखी बहस का कारण बना हुआ है। गाजीपुर जनपद के बिरनो क्षेत्र अंतर्गत क्यामपुर टोल प्लाजा के पास समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडेय के धरने के दौरान बलिया के नगरा थानाध्यक्ष संजय मिश्रा अपनी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसी दौरान जो हुआ, उसने न सिर्फ वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि पूरे प्रदेश में प्रशासनिक शिष्टाचार और सत्ता-संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए।
धरने पर बैठे सपा सांसद से बातचीत के दौरान नगरा थानाध्यक्ष द्वारा उनके पैर छूने का दृश्य कैमरे में कैद हो गया। वीडियो में थानाध्यक्ष “भइया प्रणाम” कहते हुए नजर आ रहे हैं। यह वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत शिष्टाचार और संस्कार से जोड़कर देख रहे हैं, तो कई लोग इसे प्रशासनिक मर्यादा और पुलिस की निष्पक्षता के नजरिए से सवालों के घेरे में ला रहे हैं।
वायरल वीडियो में सांसद के पास बैठे जंगीपुर विधायक यह कहते सुने जा रहे हैं कि “आप यहां कैसे आ गए, गिरफ्तार करिए…।” इस पर थानाध्यक्ष का जवाब भी चर्चा में है, जिसमें वह कहते हैं—“इतनी औकात बा हमार।” बातचीत के दौरान यह भी सामने आया कि बलिया और नगरा क्षेत्र में सांसद के कई कार्यक्रम प्रस्तावित थे और पुलिस टीम उन्हें एस्कॉर्ट कर ले जाने के लिए वहां पहुंची थी। दोपहर करीब 2:30 बजे नगरा पुलिस टीम सांसद सनातन पांडेय को एस्कॉर्ट करते हुए धरना स्थल से बलिया के लिए रवाना हो गई।
मामले पर सफाई देते हुए नगरा थानाध्यक्ष संजय मिश्रा ने कहा कि सांसद धरने पर बैठे हुए दूसरी ओर देख रहे थे, इसलिए उन्होंने इशारा कर उन्हें अपनी ओर देखने और धरना समाप्त करने का अनुरोध किया था। वहीं, बलिया के अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) दिनेश शुक्ल ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने कहा कि वीडियो देखने के बाद पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति का निजी सम्मान और विनम्रता का भाव था, या फिर वर्दीधारी अधिकारी द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि के प्रति ऐसा व्यवहार प्रशासनिक तटस्थता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग नजरिए से इस घटना को देख रहे हैं और प्रशासन से स्पष्ट जवाब की अपेक्षा कर रहे हैं।
अब ऐसे में पूछता है, न्यूज रिपोर्ट बन कर आम जनता की आवाज़-कि लोकतंत्र में क्या पुलिस और प्रशासन का यह आचरण सिर्फ शिष्टाचार माना जाए, या फिर इससे प्रशासनिक मर्यादा और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं?
