गाजीपुर में कैथी टोल प्लाजा पर बढ़ा टोल टैक्स, 1 अप्रैल से लागू नई दरें
गाजीपुर। वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन पर स्थित कैथी टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहन चालकों को अब जेब ढीली करनी पड़ेगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने टोल टैक्स की दरों में 5 से 20 रुपये तक की वृद्धि कर दी है। यह नई दरें 31 मार्च की मध्यरात्रि से प्रभावी हो गई हैं और 1 अप्रैल से पूरी तरह लागू कर दी गई हैं।
एनएचएआई द्वारा की गई इस वृद्धि का असर सभी प्रकार के वाहनों पर पड़ेगा, जिसमें निजी कार, बस, ट्रक और अन्य वाणिज्यिक वाहन शामिल हैं। इस फैसले के बाद रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ना तय माना जा रहा है।
88 किलोमीटर के दायरे में लागू होता है कैथी टोल
कैथी टोल प्लाजा वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन पर एक महत्वपूर्ण टोल बिंदु है, जो वाराणसी के चिरई गांव से लेकर गाजीपुर के जंगीपुर तक लगभग 88 किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करता है। यह टोल प्लाजा एनएचएआई के गाजीपुर प्रोजेक्ट के अंतर्गत संचालित होता है।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक अजय सिंह के अनुसार, टोल टैक्स की दरों में संशोधन एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे सड़क के रखरखाव, मरम्मत और नई सुविधाओं के विकास को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है।
मासिक और वार्षिक पास भी हुए महंगे
टोल टैक्स में बढ़ोतरी के साथ ही मासिक और वार्षिक पास की दरों में भी बदलाव किया गया है। 20 किलोमीटर की परिधि में रहने वाले स्थानीय वाहन चालकों के लिए मासिक पास की कीमत 340 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये कर दी गई है।
इसके अलावा, वार्षिक पास की दर में भी वृद्धि की गई है। पहले यह पास 3000 रुपये में उपलब्ध था, जिसे अब बढ़ाकर 3075 रुपये कर दिया गया है। इस पास के तहत वाहन मालिकों को एक वर्ष में 200 बार आवागमन की अनुमति दी जाती है।
टोल वृद्धि के पीछे एनएचएआई का तर्क
एनएचएआई का कहना है कि टोल टैक्स में वृद्धि का मुख्य उद्देश्य सड़क की गुणवत्ता बनाए रखना और यातायात सुविधाओं को बेहतर बनाना है। बढ़ी हुई राशि का उपयोग सड़क की मरम्मत, सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और नई सुविधाएं विकसित करने में किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और रखरखाव लागत को देखते हुए यह कदम आवश्यक था, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिल सके।
यात्रियों और स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
टोल टैक्स में हुई वृद्धि को लेकर स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि बेहतर सड़क सुविधाओं के लिए यह बढ़ोतरी उचित है, जबकि कई लोग इसे आर्थिक बोझ के रूप में देख रहे हैं।
दैनिक रूप से इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों का कहना है कि पहले से ही ईंधन की कीमतों और अन्य खर्चों में वृद्धि हो रही है, ऐसे में टोल टैक्स बढ़ना उनकी जेब पर अतिरिक्त दबाव डालेगा। खासकर छोटे व्यवसायी और ट्रांसपोर्टर इससे ज्यादा प्रभावित होंगे।
परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि टोल टैक्स में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव परिवहन लागत पर भी पड़ेगा। परिवहन लागत बढ़ने से वस्तुओं के दाम में भी इजाफा हो सकता है, जिसका असर आम जनता पर पड़ेगा।
ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह लागत बढ़ती रही, तो इसका सीधा असर माल भाड़ा दरों पर पड़ेगा, जिससे बाजार में महंगाई और बढ़ सकती है।
आगे क्या रहेगा असर
एक अप्रैल से लागू नई टोल दरें आने वाले समय में यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव साबित होंगी। अब यह देखना होगा कि एनएचएआई द्वारा किए गए इस फैसले से सड़क सुविधाओं में कितना सुधार होता है और यात्रियों को कितना लाभ मिलता है।
फिलहाल, टोल टैक्स में हुई इस वृद्धि ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि विकास और सुविधा की कीमत आखिर किसे और कितनी चुकानी पड़ रही है।
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