होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल को लेकर विवाद, ईरान के प्रस्ताव का ओमान ने किया विरोध
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा के बाद एक नया विवाद सामने आ गया है। ईरान द्वारा पेश किए गए 10-सूत्रीय सीजफायर प्रस्ताव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट फीस लगाने का प्रावधान शामिल किया गया है। इस प्रस्ताव का ओमान ने कड़ा विरोध किया है और साफ कहा है कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर किसी भी प्रकार का टोल नहीं लगाया जा सकता।
ओमान का स्पष्ट रुख, ‘होर्मुज पर टोल अस्वीकार्य’
ओमान के परिवहन मंत्री अहमद बिन मोहम्मद अल फुतैसी ने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने इस अहम समुद्री मार्ग पर स्वतंत्र और सुरक्षित आवागमन बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
रणनीतिक रूप से बेहद अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
करीब 34 किलोमीटर चौड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और यह दोनों देशों की समुद्री सीमा भी निर्धारित करता है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को वैश्विक समुद्री मार्गों से जोड़ता है और दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार का रास्ता यहीं से होकर गुजरता है।
इतिहास में अब तक इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी देश द्वारा टोल नहीं लगाया गया है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
ईरान का तर्क, पुनर्निर्माण के लिए जरूरी है शुल्क
ईरान ने इस प्रस्ताव के पीछे अपनी आर्थिक जरूरतों का हवाला दिया है। उसका कहना है कि संभावित टोल से मिलने वाली राशि का उपयोग युद्ध के बाद देश के पुनर्निर्माण कार्यों में किया जाएगा। हालिया संघर्ष के दौरान ईरान के रक्षा, प्रशासनिक और नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने संकेत दिया है कि तेहरान किसी भी स्थायी शांति समझौते के तहत इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने की अनुमति चाहता है।
परमिट और लाइसेंस प्रणाली पर भी विचार
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने हाल ही में कहा था कि ईरान और ओमान मिलकर एक ऐसा प्रोटोकॉल तैयार करने पर विचार कर रहे हैं, जिसके तहत जहाजों को जलडमरूमध्य पार करने के लिए परमिट और लाइसेंस लेना अनिवार्य हो सकता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम का उद्देश्य आवागमन को बाधित करना नहीं, बल्कि उसे अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना है।
बातचीत जारी, लेकिन सहमति पर सस्पेंस
ओमान ने भी पुष्टि की है कि उसने ईरान के साथ इस विषय पर बातचीत की है, लेकिन अब तक किसी ठोस समझौते की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींच रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल लागू होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। फिलहाल इस विवाद का समाधान कैसे निकलेगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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