वाराणसी: मोक्षदायिनी, धर्म और आध्यात्म की शाश्वत नगरी काशी, जिसे सदियों से शांति, सुकून और भोलेनाथ के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता रहा है, आज एक अजीब सी बेचैनी और अशांति के दौर से गुजर रही है। जिस शहर की पहचान उसके अर्धचंद्राकार घाटों की अलौकिकता, गंगा की अविरल धारा और सुबह-ए-बनारस की रूहानी शांति से थी, आज वहां अराजकता ने अपना डेरा जमा लिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस पवित्र नगरी को किसी की बुरी नजर लग गई है। जिन घाटों पर कभी चौबीसों घंटे 'ॐ नमः शिवाय' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजते थे, जो फिजा वैदिक मंत्रोच्चार से पवित्र रहती थी, आज वहां सरेआम गाली-गलौज, चीख-पुकार और लाठियों की तड़तड़ाहट सुनाई दे रही है। यह केवल कानून-व्यवस्था का प्रश्न नहीं है, बल्कि काशी की आत्मा पर लगा एक गहरा घाव है, जिसके लिए सीधे तौर पर स्थानीय नगर प्रशासन और पुलिस की ढुलमुल कार्यशैली जिम्मेदार है।
सबसे चिंताजनक स्थिति अस्सी घाट से लेकर सामनेघाट तक के क्षेत्र में बनी हुई है, जो अब पर्यटकों के लिए भय का पर्याय बनता जा रहा है। पिछले कुछ समय में घाटों पर जिस तरह से मारपीट और गुंडागर्दी की घटनाएं बढ़ी हैं, उसने पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय चर्चाओं तक, हर जगह घाटों पर रोज हो रहे इन "कांडों" की कहानियां तैर रही हैं, लेकिन वाराणसी प्रशासन ने जैसे आँखों पर पट्टी और कानों में रुई डाल रखी है। नाविक, जो कभी काशी की संस्कृति के संवाहक और पर्यटकों के सारथी हुआ करते थे, आज उनमें से कुछ असामाजिक तत्वों ने घाटों को अपने निजी अखाड़े में तब्दील कर दिया है। कभी ये पर्यटकों से छोटी-छोटी बातों पर उलझकर उन्हें पीट रहे हैं, तो कभी वर्चस्व की लड़ाई में आपस में ही भिड़कर घाटों को युद्ध का मैदान बना देते हैं। यह सब कुछ पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है, फिर भी खाकी का वह इकबाल कहीं नदारद है जो अपराधियों के मन में खौफ पैदा कर सके।
अब ऐसे में सवाल यह उठता है, कि आखिर कमिश्नरेट पुलिस इन उपद्रवियों पर नकेल कसने में नाकाम क्यों साबित हो रही है? अभी तक दर्जनों ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, वीडियो वायरल हो चुके हैं, लेकिन किसी भी मामले में ऐसी कोई "नजीर" (ठोस कार्यवाही) पेश नहीं की गई जिससे भविष्य में कोई ऐसी हिमाकत करने से पहले सौ बार सोचे। हल्की धाराओं में मामला दर्ज करना या रस्म अदायगी वाली कार्यवाही ने इन अराजक तत्वों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। काशी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और जिसे विश्व पटल पर 'दिव्य और भव्य' बनाने का सपना देखा गया है, वहां की यह जमीनी हकीकत बेहद डरावनी है। जब देश-विदेश से आने वाला पर्यटक यहां से मार-कुटाई और बदसलूकी की यादें लेकर लौटता है, तो वह केवल अपने साथ बुरा अनुभव नहीं ले जाता, बल्कि विश्व स्तर पर भारत की और सनातनी संस्कृति की छवि को धूमिल करता है।
प्रशासन को यह समझना होगा कि काशी की यह बदनामी अब समझ और सहनशीलता के परे जा चुकी है। 'अतिथि देवो भव' की परंपरा को तार-तार करती ये घटनाएं इस प्राचीन शहर के माथे पर ऐसा कलंक लगा रही हैं जिसे अगर वक्त रहते नहीं मिटाया गया, तो इसे हटाना नामुमकिन हो जाएगा। यह वक्त केवल बैठकों और कागजी निर्देशों का नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाने का है। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक, जो काशी के विकास और सुरक्षा के लिए संकल्पित हैं, उन तक यह बात पहुंचनी चाहिए कि उनके सपनों के शहर को कुछ मुट्ठी भर लोग अपनी जागीर समझकर बर्बाद कर रहे हैं।
आज काशी पुकार रही है, अपने उसी पुराने गौरव, शांति और गरिमा के लिए। प्रशासन को अपनी कुंभकर्णी नींद से जागना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि घाटों पर फिर से सिर्फ गंगा की लहरों का संगीत और भक्तों की प्रार्थनाएं गूंजें, न कि अराजकता का शोर। अभी भी वक्त है कि इस नासूर को बढ़ने से पहले काट दिया जाए, वरना इतिहास गवाह होगा कि जब काशी की छवि धूमिल हो रही थी, तब जिम्मेदार लोग मौन थे।
शिव की नगरी में तांडव, आस्था के घाटों पर अराजकता का काला साया, मौन प्रशासन और धूमिल होती काशी की वैश्विक छवि

काशी के अस्सी से सामनेघाट तक घाटों पर बढ़ती हिंसा और अराजकता से श्रद्धालु डरे, प्रशासन की भूमिका संदिग्ध
Category: uttar pradesh varanasi breaking news
LATEST NEWS
-
वाराणसी: पूर्व सैनिकों के सम्मान पर रार, स्टेशन हेडक्वार्टर पर पक्षपात का आरोप
वाराणसी में इंडियन वेटरन्स ऑर्गेनाइजेशन ने स्टेशन हेडक्वार्टर पर पूर्व सैनिकों से पक्षपात व उपेक्षा का आरोप लगाया।
BY : SANDEEP KR SRIVASTAVA | 13 Jan 2026, 08:53 PM
-
वाराणसी: विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने दी लाखों की सौगात, नाली व सड़क निर्माण कार्यों का किया लोकार्पण और शिलान्यास
विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने वाराणसी के रामपुर भीटी में ₹50.55 लाख के सड़क नाली कार्यों का लोकार्पण कर जनता को जलभराव से राहत दी।
BY : SANDEEP KR SRIVASTAVA | 13 Jan 2026, 08:16 PM
-
वाराणसी: रामनगर में जर्जर बिजली तारों के खिलाफ सपा का उग्र प्रदर्शन, एसडीओ ने दिया आश्वासन
रामनगर, वाराणसी में बिजली विभाग की लापरवाही के खिलाफ जनता का प्रदर्शन, एसडीओ ने 2 दिन में मरम्मत का लिखित आश्वासन दिया।
BY : SANDEEP KR SRIVASTAVA | 13 Jan 2026, 04:13 PM
-
आईआईटी बीएचयू ने स्टार्टअप सीड फंड समारोह में आठ स्टार्टअप्स को करोड़ों की फंडिंग दी
आईआईटी बीएचयू ने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आठ स्टार्टअप्स को एक करोड़ अस्सी लाख से अधिक की सीड फंडिंग प्रदान की है।
BY : Palak Yadav | 13 Jan 2026, 01:27 PM
-
केंद्रीय बजट से पहले घाटे का बजट चर्चा में, जानें इसके नफा-नुकसान
एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश होगा, जिसके साथ घाटे के बजट की चर्चा तेज है; यह हमेशा नकारात्मक नहीं होता।
BY : Palak Yadav | 13 Jan 2026, 01:18 PM