झारखंड में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की तैयारी, अभिलेखों के अध्ययन से बनेगी रणनीति
झारखंड में वन एवं पर्यावरण विभाग ने वन भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए एक व्यापक पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। विभाग अब वन भूमि से जुड़े पुराने अभिलेखों और दस्तावेजों का अध्ययन कराएगा ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और अवैध कब्जों की पहचान कर कार्रवाई की जा सके। विभाग का मानना है कि राज्य में वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण को नियंत्रित करने के लिए यह कदम आवश्यक है।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार झारखंड में लगभग पचास हजार एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जा या अतिक्रमण होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि वन विभाग के अपने आकलन के अनुसार करीब बत्तीस हजार एकड़ भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई है। विभाग अब इन मामलों की विस्तृत जांच कर वास्तविक स्थिति का आकलन करने की तैयारी में है।
वन भूमि पर बढ़ रहे हैं अतिक्रमण के मामले
वन एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के अनुसार हाल के वर्षों में वन भूमि के अवैध हस्तांतरण के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा खेती के लिए जंगल की जमीन साफ करने और सड़क किनारे दुकानों या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के कारण भी अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ी हैं। इन गतिविधियों के कारण कई स्थानों पर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है।
रांची जिले के कांके अंचल से सटी वन भूमि पर हाल ही में स्थानीय प्रशासन से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की गई है। इस कार्रवाई के बाद विभाग ने राज्य के अन्य क्षेत्रों से भी इसी प्रकार की जानकारी जुटाने का निर्णय लिया है।
क्षेत्रीय अधिकारियों से मांगी गई रिपोर्ट
वन विभाग ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने अपने क्षेत्रों में वन भूमि की स्थिति की रिपोर्ट तैयार करें। इस रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन स्थानों पर अतिक्रमण हुआ है और वहां किस प्रकार की कार्रवाई की जानी चाहिए।
विभाग को यह भी शिकायतें मिली हैं कि राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे बने कुछ रिसोर्ट और दुकानों द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है। ऐसे मामलों की भी जांच कराई जा रही है ताकि नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सके।
वन प्रबंधन समितियों को मिलेगा अधिक अधिकार
वन एवं पर्यावरण विभाग ने वन क्षेत्रों के प्रबंधन में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत वन प्रबंधन समितियों में सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाएगी और वन क्षेत्र से जुड़े गांवों के निवासियों को इसमें शामिल किया जाएगा।
विभाग का मानना है कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से वन भूमि पर होने वाले अतिक्रमण की जानकारी समय रहते मिल सकेगी और उसे रोकने में भी सहयोग मिलेगा। इसके साथ ही वन प्रबंधन समितियों को पौधरोपण और वन संरक्षण के कार्यों से जोड़ा जाएगा जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
वन भूमि का तैयार होगा लैंड बैंक
वन एवं पर्यावरण विभाग राज्य में वन भूमि का एक लैंड बैंक भी तैयार करने की योजना बना रहा है। इसके लिए वन भूमि से जुड़े सभी अभिलेखों का अध्ययन कर उनका व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
इस लैंड बैंक का उपयोग पौधरोपण के साथ साथ संरचनात्मक विकास की योजनाओं में किया जाएगा। विभाग ने आगामी दस वर्षों की कार्ययोजना के तहत इसे एक महत्वपूर्ण लक्ष्य के रूप में शामिल किया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे वन संरक्षण के साथ साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
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