केरोसीन वितरण में बड़ा बदलाव: 60 दिन तक पेट्रोल पंपों से मिलेगी सुविधा
संवाददाता जगदीश प्रसाद की रिपोर्ट : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा लिया गया यह अहम निर्णय देश के कई हिस्सों में ईंधन की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए राहत लेकर आया है। सरकार ने अस्थायी रूप से 60 दिनों के लिए केरोसीन वितरण को राशन दुकानों के अलावा पेट्रोल पंपों के माध्यम से भी उपलब्ध कराने की अनुमति दी है। इस फैसले का उद्देश्य आपूर्ति तंत्र को मजबूत करना और आम उपभोक्ताओं को त्वरित राहत देना है।
पेट्रोल पंपों के जरिए बढ़ेगी पहुंच
इस नई व्यवस्था के तहत अब केरोसीन केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेट्रोल पंपों के जरिए भी उपलब्ध होगा। इससे वितरण नेटवर्क का विस्तार होगा और खासतौर पर ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आसानी से ईंधन मिल सकेगा।
कालाबाजारी पर लगेगी लगाम
खुले बाजार में केरोसीन की उपलब्धता बढ़ने से कालाबाजारी पर अंकुश लगने की उम्मीद है। पहले सीमित आपूर्ति के कारण कई जगहों पर ऊंचे दामों पर केरोसीन बेचा जा रहा था, लेकिन अब पारदर्शी व्यवस्था के चलते इस पर नियंत्रण संभव होगा।
तेल कंपनियों की निगरानी में बिक्री
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की निगरानी में केरोसीन की बिक्री होगी। इससे वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
सुरक्षा मानकों का रखा जाएगा ध्यान
पेट्रोल पंपों पर पहले से ही पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के सख्त सुरक्षा मानक लागू होते हैं। ऐसे में वहां 5000 लीटर तक केरोसीन का भंडारण सुरक्षित तरीके से किया जा सकेगा, जिससे किसी भी प्रकार के जोखिम की संभावना कम होगी।
लॉजिस्टिक्स में सुधार और लागत में कमी
सरकार ने अलग से केरोसीन डिपो बनाने के बजाय मौजूदा पेट्रोल पंप नेटवर्क का उपयोग करने का फैसला किया है। इससे न केवल वितरण व्यवस्था तेज होगी, बल्कि लागत में भी कमी आएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
उत्तर प्रदेश और हरियाणा में विशेष असर
उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में, जहां घरेलू और कृषि कार्यों के लिए केरोसीन की मांग अधिक रहती है, वहां इस योजना का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। शुरुआती चरण में प्रति जिला दो पेट्रोल पंपों का चयन किया गया है, जिससे व्यवस्था को संतुलित तरीके से लागू किया जा सके।
अस्थायी राहत, दीर्घकालिक समाधान की तैयारी
यह व्यवस्था फिलहाल 60 दिनों के लिए लागू की गई है। इस अवधि में सरकार आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर करने और दीर्घकालिक समाधान तैयार करने की दिशा में काम करेगी। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे स्थायी रूप भी दिया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल तत्काल राहत प्रदान करेगा, बल्कि ईंधन वितरण प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हो सकता है।
LATEST NEWS