प्रयागराज माघ मेला में प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद के बीच अब साधु संतों और धर्माचार्यों की सक्रियता तेज होती दिखाई दे रही है। विभिन्न धार्मिक संगठनों और संत समाज ने शंकराचार्य के पक्ष में खुलकर बयान देने शुरू कर दिए हैं और सरकार से सम्मानपूर्वक स्नान कराए जाने की मांग उठने लगी है। इस पूरे प्रकरण ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दे दिया है।
मथुरा में हिंदूवादी नेता और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के याचिकाकर्ता Dinesh Phalahari ने मुख्यमंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला में सम्मान स्नान कराने की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा है कि शंकराचार्य हिंदू समाज के गौरव हैं और उनका अपमान संपूर्ण सनातन समाज की भावना को आहत करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं और संतों के सम्मान की अनदेखी कर रहे हैं।
प्रयागराज में बद्रिका ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य Avimukteshwaranand के मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद ब्रज क्षेत्र के साधु संत और ब्राह्मण समाज खुलकर उनके समर्थन में सामने आ गए हैं। संत समाज का कहना है कि प्रशासन को शंकराचार्य से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और उन्हें गंगा में सम्मान के साथ स्नान कराना चाहिए। साधु संतों ने आरोप लगाया कि बटुक ब्राह्मणों और संतों के साथ अभद्रता की गई जिससे पूरे समाज में आक्रोश है।
स्वामी अतुल कृष्ण दास महाराज ने कहा कि जिन अधिकारियों पर संतों की चोटी खींचने और मारपीट के आरोप हैं उनकी निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। महामंडलेश्वर रामदास महाराज ने कहा कि शंकराचार्य की पीठ भगवान शिव की गद्दी मानी जाती है और उसका अपमान गंभीर पाप के समान है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं संत परंपरा से जुड़े हैं और उन्हें दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश देने चाहिए।
दिनेश फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से कहा है कि शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोकना सनातन आस्था के विरुद्ध है और इससे समाज में भारी नाराजगी फैल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi स्वयं शंकराचार्य का सम्मान करते हैं और ऐसे में यह विवाद समाप्त करने के लिए अधिकारियों द्वारा माफी मांगना ही उचित समाधान है।
इस बीच अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा और ब्रज धर्माचार्य परिषद की संयुक्त बैठक वृंदावन स्थित उड़िया बाबा आश्रम में आयोजित की गई। बैठक में प्रयागराज माघ मेला के दौरान शंकराचार्य और बटुक ब्राह्मणों के साथ हुई कथित अभद्रता और मारपीट की कड़ी निंदा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि जब तक उत्तर प्रदेश सरकार माफी नहीं मांगती तब तक स्वाभिमान यात्रा के तहत पूरे ब्रज क्षेत्र में अभियान चलाकर आंदोलन किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए पुष्टिमार्गीय आचार्य श्रीहरि शास्त्री ने कहा कि ब्राह्मणों की शिखा खींचना और शंकराचार्य का अपमान सत्ता के अहंकार को दर्शाता है। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सनातन धर्म के ध्वजवाहक हैं और गौ माता तथा हिंदू राष्ट्र जैसे मुद्दों पर मुखर रहने के कारण वे कई सरकारों को असहज करते रहे हैं।
धर्माचार्यों और संत समाज का कहना है कि शंकराचार्य का अपमान केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे हिंदू समाज की आस्था का अपमान है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस विवाद का शीघ्र समाधान किया जाए ताकि समाज में फैल रही नाराजगी को शांत किया जा सके। बैठक में बड़ी संख्या में संत महंत और ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में सम्मानपूर्वक स्नान की मांग दोहराई।
