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Prayagraj

प्रयागराज: वन विभाग की 472 बीघा जमीन राजस्व रिकॉर्ड से गायब मिली, डीएम ने जांच के आदेश दिए

Dilip Kumar - Associate Editor : News Report
Last updated: 12/03/2026 16:43
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Dilip Kumar
Dilip Kumar - Associate Editor : News Report
ByDilip Kumar
Dilip Kumar is the Associate Editor at News Report, a registered Hindi newspaper committed to ethical, factual, and responsible journalism. He plays a key role in...
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प्रयागराज में गायब हुई वन विभाग की 472 बीघा जमीन
प्रयागराज में वन विभाग की सैकड़ों बीघा जमीन राजस्व रिकॉर्ड से गायब होने का मामला सामने आया है।
Contents
  • प्रयागराज में वन विभाग की 472 बीघा जमीन राजस्व रिकॉर्ड से गायब, डीएम ने जांच के दिए आदेश
  • दो गाटों में दर्ज थी पूरी 2044 बीघा भूमि
  • चकबंदी के दौरान भूमि के हो गए कई हिस्से
  • वन विभाग ने की शिकायत, प्रशासन हरकत में
  • कुछ काश्तकार भी कर रहे जमीन पर दावा
  • जांच के बाद होगी अभिलेखों में सुधार की प्रक्रिया

प्रयागराज में वन विभाग की 472 बीघा जमीन राजस्व रिकॉर्ड से गायब, डीएम ने जांच के दिए आदेश

प्रयागराज जिले के यमुनापार क्षेत्र में वन विभाग की सैकड़ों बीघा भूमि राजस्व अभिलेखों से गायब होने का मामला सामने आया है। कोरांव तहसील के बेलहट गांव में वन विभाग की कुल लगभग 2044 बीघा भूमि दर्ज है, लेकिन राजस्व विभाग के दस्तावेजों में इसका पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है। जांच के दौरान पता चला कि करीब 472 बीघा वन भूमि का रिकॉर्ड राजस्व कागजों में नहीं दिख रहा है। मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने इस पर संज्ञान लेते हुए संबंधित भूमि को वन विभाग के नाम दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

दो गाटों में दर्ज थी पूरी 2044 बीघा भूमि

राजस्व अभिलेखों के अनुसार बेलहट गांव में वन विभाग की भूमि पहले दो गाटा संख्याओं में दर्ज थी। गाटा संख्या 1933 में लगभग 855 बीघा और गाटा संख्या 1934 में करीब 1189 बीघा भूमि दर्ज थी। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 2044 बीघा वन भूमि एक ही स्थान पर दर्ज थी।

हालांकि पिछले वर्ष वन विभाग ने धारा 41 और धारा 45 के तहत राजस्व विभाग से इस भूमि से संबंधित दस्तावेज मंगवाए। जब दस्तावेज विभाग के पास पहुंचे तो उसमें केवल 1572 बीघा भूमि ही वन विभाग के नाम दर्ज मिली। इससे स्पष्ट हुआ कि लगभग 472 बीघा भूमि का विवरण राजस्व रिकॉर्ड में नहीं है।

चकबंदी के दौरान भूमि के हो गए कई हिस्से

अधिकारियों के अनुसार कई दशक पहले हुई चकबंदी के दौरान बेलहट की इस वन भूमि को कई हिस्सों में बांट दिया गया था। पहले जहां यह भूमि केवल दो गाटों में दर्ज थी, वहीं चकबंदी के बाद इसे कुल 31 गाटों में विभाजित कर दिया गया।

गाटा संख्या 1933 को सात छोटे गाटों में बांटा गया, जबकि गाटा संख्या 1934 के 24 हिस्से बनाए गए। जांच में सामने आया कि गाटा संख्या 1934 से बने 24 हिस्सों में से 18 हिस्सों की भूमि राजस्व विभाग के दस्तावेजों में दर्ज ही नहीं है। इसी कारण लगभग 472 बीघा वन भूमि का रिकॉर्ड गायब हो गया है।

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वन विभाग ने की शिकायत, प्रशासन हरकत में

वन भूमि के रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आने के बाद वन विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया और राजस्व विभाग के साथ पत्राचार शुरू किया। विभाग ने गायब जमीन का पूरा विवरण दर्ज कराने की मांग की, लेकिन लंबे समय तक इसका समाधान नहीं हो सका।

इसके बाद कोरांव क्षेत्र के डीएफओ अरविंद कुमार ने मामले की जानकारी जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा को दी। जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए कोरांव के एसडीएम को निर्देश दिया कि संबंधित वन भूमि को जल्द से जल्द वन विभाग के नाम दर्ज कराया जाए और अभिलेखों में सुधार किया जाए।

कुछ काश्तकार भी कर रहे जमीन पर दावा

इस बीच कोरांव तहसील प्रशासन का कहना है कि बेलहट गांव की इसी भूमि पर कुछ काश्तकार भी अपना दावा कर रहे हैं। कोरांव के तहसीलदार विनय कुमार बर्नवाल के अनुसार मामले की जानकारी प्रशासन को है और इसके समाधान के लिए पुराने अभिलेखों की जांच की जा रही है।

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उन्होंने बताया कि अभिलेखागार से इस भूमि से संबंधित पुराने दस्तावेज मंगवाए गए हैं। दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट किया जाएगा कि कितनी भूमि वन विभाग की है और उसे उसी के नाम दर्ज किया जाएगा।

जांच के बाद होगी अभिलेखों में सुधार की प्रक्रिया

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद राजस्व अभिलेखों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। यदि जांच में यह साबित होता है कि संबंधित भूमि वन विभाग की है तो उसे विभाग के नाम दर्ज कर दिया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार यह मामला सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। जांच के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि इतने बड़े भूभाग का रिकॉर्ड राजस्व दस्तावेजों से कैसे गायब हुआ और इसमें किस स्तर पर लापरवाही हुई।

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