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मऊ में 500 साल पुरानी भरत मिलाप परंपरा भव्यता से संपन्न, सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक

मऊ में 500 साल पुरानी भरत मिलाप परंपरा भव्यता से संपन्न, सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक

मऊ में पांच सदी पुरानी ऐतिहासिक भरत मिलाप परंपरा भव्यता से संपन्न हुई, जहां मुस्लिम नमाज और हिंदू जयकारे एक साथ गूंजे।

मऊ जिले में 500 साल से चली आ रही ऐतिहासिक भरत मिलाप की परंपरा इस वर्ष भी उतनी ही भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न कराई गई। शाही कटरा के मैदान में आयोजित इस आयोजन में हजारों श्रद्धालु जमा हुए और चारों भाइयों के मिलन का दृश्य देखकर भाव विभोर हो उठे। पूरा क्षेत्र जय श्रीराम और हर- हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।

भरत मिलाप की यह परंपरा मुगल शासिका जहांआरा के शासनकाल से शुरू हुई थी और अब लगभग पांच सदियों से नियमित रूप से मनाई जा रही है। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि शाही मस्जिद में मुसलमान नमाज अदा करते हुए अल्लाहु अकबर कहते हैं और उसी समय हर-हर महादेव के जयकारे भी गूंजते हैं, जो यहां की सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। कटरा मैदान पर लीला के दौरान जब प्रभु राम और उनके भाइयों का मिलन हुआ, तो श्रद्धालुओं की आंखों में आंसू छलक पड़े और उन्होंने इस पावन दृश्य को मन ही मन अपने हृदय में उतार लिया।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आयोजन स्थल पर कड़ी सतर्कता रखी गई थी। पुलिस अधीक्षक इलामारन जी, जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र, अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार, सीओ सिटी अंजनी कुमार पांडे, कोतवाल अनिल कुमार सिंह और कई थानों के एसएचओ और सीओ भारी फोर्स के साथ मौजूद रहे। इसके अलावा, प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।

मऊ में भरत मिलाप की यह परंपरा न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारे और मेलजोल का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। इस आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह, झांकियों की भव्यता और जयकारों की गूंज पूरे जिले में एक खास आध्यात्मिक माहौल बना गई।

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