परतापुर आंगनबाड़ी: कीड़े वाला पोषाहार, एक्सपायर तेल मिलने पर ग्रामीणों का प्रदर्शन

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Dilip Kumar
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बहजोई के परतापुर आंगनबाड़ी केंद्र पर सड़े पोषाहार के वितरण के विरोध में प्रदर्शन करती महिलाएं।

परतापुर आंगनबाड़ी केंद्र पर पांच माह बाद पोषाहार वितरण, दाल और दलिया में कीड़े मिलने पर ग्रामीणों का प्रदर्शन

बहजोई ब्लाक क्षेत्र के गांव परतापुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर करीब पांच माह के अंतराल के बाद पोषाहार का वितरण किया गया, लेकिन वितरण के दौरान गुणवत्ता संबंधी गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। लाभार्थियों को दी गई चने की दाल और दलिया में कीड़े मिलने तथा रिफाइंड सोयाबीन तेल के एक्सपायर होने की बात सामने आने पर महिलाओं ने केंद्र पर नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

दीपावली से पहले हुआ था अंतिम वितरण

ग्रामीणों के अनुसार दीपावली से पहले केंद्र पर अंतिम बार पोषाहार बांटा गया था। इसके बाद लगभग पांच माह तक वितरण नहीं हुआ। लंबे अंतराल के बाद गुरुवार को केंद्र पर करीब 60 से 65 लाभार्थियों को चने की दाल, दलिया और रिफाइंड सोयाबीन तेल वितरित किया गया। महिलाओं का कहना है कि वे नियमित रूप से पोषाहार की प्रतीक्षा कर रही थीं, क्योंकि यह सामग्री बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण से जुड़ी है।

दाल और दलिया में कीड़े, तेल एक्सपायर होने का आरोप

लाभार्थियों का आरोप है कि वितरित की गई दाल और दलिया काफी पुराने थे। कई पैकेटों में नमी के कारण सामग्री खराब हो चुकी थी और उसमें कीड़े पाए गए। कुछ महिलाओं ने बताया कि पैकेट खोलते ही दुर्गंध आने लगी। वहीं वितरित किया गया सोयाबीन तेल भी एक्सपायर बताया गया। खराब पोषाहार मिलने से महिलाओं में रोष फैल गया और उन्होंने केंद्र पर ही विरोध शुरू कर दिया।

नियमित कार्यकत्री न होने से प्रभावित हो रहा संचालन

ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र पर स्थायी आंगनबाड़ी कार्यकत्री की तैनाती नहीं है। केवल सहायिका के सहारे केंद्र का संचालन किया जा रहा है। इससे न केवल समय पर पोषाहार वितरण प्रभावित हो रहा है बल्कि टीकाकरण और अन्य योजनाओं का लाभ भी नियमित रूप से नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई महीने तक केंद्र बंद रहने जैसी स्थिति बनी रहती है। उच्च अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

सहायिका का पक्ष

केंद्र पर मौजूद सहायिका शशि देवी ने बताया कि स्थायी कार्यकत्री न होने के कारण दूसरे गांव की कार्यकत्री को बुलाकर वितरण कराया जाता है। उनके अनुसार कुछ पैकेट नमी के कारण खराब पाए गए थे, जिन्हें अलग कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सामग्री का वितरण नियमानुसार किया गया है।

प्रदर्शन में शामिल रहीं महिलाएं

खराब पोषाहार के विरोध में रूपवती, पूनम, गीता, नीरज, शशिबाला, सुनीता, मुन्नी, रेखा, पूजा, प्रेमलता, मंजू, खुशबू, नीलम, पुष्पा, राजेश्वरी, सुशीला, प्रीति, प्रवेश और बबली सहित कई महिलाएं केंद्र पर मौजूद रहीं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और नियमित तथा गुणवत्तापूर्ण पोषाहार की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

पोषण योजनाओं पर उठे सवाल

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पोषण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है। ऐसे में यदि सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं तो यह योजना की प्रभावशीलता पर भी असर डालता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर और सही गुणवत्ता का पोषाहार नहीं मिलेगा तो इसका सीधा प्रभाव बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। अब ग्रामीण प्रशासनिक जांच और ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।