प्रयागराज में फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा, सरगना समेत दो गिरफ्तार, 7000 से ज्यादा मार्कशीट बेचीं
प्रयागराज की साइबर पुलिस ने यूपी बोर्ड की फर्जी वेबसाइट बनाकर छात्रों को फर्जी डिग्री और मार्कशीट बेचने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के सरगना समेत दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी पांच-पांच हजार रुपये में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बेच रहे थे।
फर्जी वेबसाइट बनाकर करते थे ठगी
पुलिस के अनुसार आरोपितों ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट की तर्ज पर फर्जी वेबसाइट तैयार कर ली थी। इसी के जरिए वे छात्रों और अभिभावकों की जानकारी जुटाकर उनसे संपर्क करते और उन्हें पास कराने या नंबर बढ़ाने का झांसा देते थे।
आजमगढ़ से चल रहा था पूरा नेटवर्क
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान आजमगढ़ जिले के बरदह थाना क्षेत्र के सोहौली गांव निवासी शशि प्रकाश राय उर्फ राजन शर्मा और उसके रिश्तेदार मनीष कुमार राय के रूप में हुई है। शशि प्रकाश आजमगढ़ में सिपाह पुलिस चौकी के पास किराए के कमरे में “श्री एजुकेशन” नाम से कॉल सेंटर चला रहा था, जहां से इस पूरे रैकेट का संचालन होता था।
7000 से अधिक फर्जी डिग्री और मार्कशीट बेचीं
पुलिस जांच में सामने आया है कि वर्ष 2014 से सक्रिय शशि प्रकाश राय ने पिछले दो वर्षों में ही करीब 7000 से अधिक फर्जी मार्कशीट और डिग्री बेच डालीं। यह गिरोह हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक और परास्नातक स्तर तक की फर्जी डिग्रियां तैयार कर रहा था।
सोशल मीडिया के जरिए फंसाते थे छात्र
आरोपित फेसबुक समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देकर छात्रों को अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद संबंधित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की नकली मुहर, होलोग्राम और प्रोफार्मा तैयार कर सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी दस्तावेज बनाते थे।
तैयार फर्जी डिग्री और मार्कशीट कोरियर के माध्यम से छात्रों तक भेजी जाती थीं।
70 एजुकेशन सेंटर से जुड़े थे तार
पुलिस के अनुसार आरोपितों का एनआईओएस और विभिन्न ओपन यूनिवर्सिटी के करीब 70 एजुकेशन सेंटर से संपर्क था। इन सेंटरों के माध्यम से उन्हें ऐसे छात्रों की जानकारी मिलती थी जो परीक्षा में फेल हो जाते थे।
भारी मात्रा में सामान बरामद
पुलिस ने आरोपितों के पास से 10 मोबाइल फोन, विभिन्न विश्वविद्यालयों की 42 फर्जी मुहर, 217 खाली मार्कशीट, 1000 होलोग्राम, छह मॉनिटर, पांच सीपीयू, दो पेन ड्राइव, दो कलर प्रिंटर समेत अन्य उपकरण बरामद किए हैं। इसके अलावा हिसाब-किताब से जुड़ी कई कॉपियां और रजिस्ट्री के लिफाफे भी बरामद हुए हैं।
एफआईआर के बाद शुरू हुई जांच
बताया गया कि नवंबर 2025 में यूपी बोर्ड की ओर से साइबर थाने में फर्जी वेबसाइट को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद साइबर पुलिस ने जांच शुरू की और एसटीएफ लखनऊ के सहयोग से आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
कई और गिरफ्तारियां संभव
डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पुलिस टीम को मिलेगा इनाम
इस पूरे रैकेट का खुलासा साइबर थाना प्रभारी ओमनारायण गौतम, इंस्पेक्टर मो. आलमगीर, साइबर सेल प्रभारी घनश्याम यादव सहित अन्य पुलिसकर्मियों की टीम ने किया। डीसीपी ने पूरी टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।
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