प्रयागराज में वसंत पंचमी से पहले जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बड़ा बयान देते हुए इस पावन पर्व पर स्नान करने से इनकार कर दिया है। त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में उनका स्नान के लिए जाना सुरक्षित नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि वे स्नान के लिए जाएंगे तो उनके साथ आए लोगों को फिर से मारापीटा जाएगा और अपमानित किया जाएगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ऐसी स्थिति में वे तब तक स्नान के लिए नहीं जाएंगे जब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से उन्हें लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता कि उनके साथ और उनके अनुयायियों के साथ कोई गलत व्यवहार नहीं किया जाएगा।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन अधिकारियों ने पहले उनके लोगों के साथ मारपीट की थी उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के बजाय ऐसे अधिकारियों को और बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे उनका मनोबल बढ़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन लगातार नोटिस पर नोटिस भेजकर उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उन्हें अब तक दो नोटिस मिल चुके हैं और दोनों का जवाब दिया जा चुका है। दूसरी नोटिस में उनके शिविर से जुड़ी सुविधाएं छीनने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि सुविधाएं रद करना प्रशासन का अधिकार हो सकता है लेकिन इसके पीछे का कारण भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वही व्यवस्था पहले बनाई गई थी तो अब अचानक उसे खत्म करने का क्या औचित्य है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उन्होंने नोटिस के जवाब में प्रशासन से चौबीस घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। यदि तय समय में जवाब नहीं आता है तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।
अपने बयान में उन्होंने कहा कि जो प्रशासन गलती करने के बाद भी नहीं झुकता वह नैतिक रूप से अपनी जगह से गिर जाता है। उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिल जाएंगे जहां सत्ता और प्रशासन के अहंकार का अंत हुआ है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि गौ हत्या रोकने के लिए है। उन्होंने कहा कि जो भी पार्टी सत्ता में है उसे गौ हत्या पूरी तरह बंद करने के लिए सख्त कानून बनाना चाहिए। यही देश की जनता की भावना है और यही उनकी मांग भी है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के इस बयान के बाद वसंत पंचमी पर स्नान को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। उनके समर्थकों में भी इसे लेकर चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है। धार्मिक आस्था और प्रशासनिक रवैये के बीच खड़े इस विवाद ने एक बार फिर सरकार और संत समाज के संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री की ओर है कि क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लिखित आश्वासन दिया जाएगा या यह टकराव और आगे बढ़ेगा।
