पूर्वांचल के 10 जिलों में गेहूं खरीद पर संकट, जूट बोरों की कमी से प्रभावित हो सकती है प्रक्रिया
वाराणसी। वाराणसी, आजमगढ़ और मीरजापुर मंडल के 10 जिलों में गेहूं खरीद प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही जूट बोरों की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। इन मंडलों के कुल 629 क्रय केंद्रों पर नए जूट बोरों की अपर्याप्त उपलब्धता के चलते खरीद व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, लेकिन यदि जल्द आपूर्ति नहीं हुई तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
लक्ष्य के मुकाबले कम उपलब्धता, कई जिलों में स्थिति गंभीर
मीरजापुर मंडल में स्थिति चिंताजनक है, जहां केवल 302 गांठ जूट बोरे उपलब्ध हैं। एक गांठ में लगभग 500 बोरे होते हैं, जो लक्ष्य की तुलना में काफी कम हैं। अधिकारियों ने कमी को देखते हुए कोटेदारों से खाली बोरे जुटाने के निर्देश दिए हैं।
गाजीपुर में लगभग 8.25 लाख बोरों की आवश्यकता बताई गई है, लेकिन नए जूट बोरे उपलब्ध नहीं हैं। यहां फिलहाल पुराने बोरों के सहारे खरीद की तैयारी की जा रही है। इसी तरह चंदौली में भी नए बोरों का अभाव है और पुराने जूट बोरों से ही काम चलाया जाएगा।
कई जिलों में वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भरता
मऊ में करीब 20 हजार बोरे उपलब्ध हैं, लेकिन अतिरिक्त मांग शासन को भेजी जा चुकी है। भदोही में केवल 16 हजार बोरे हैं, जो लक्ष्य के सापेक्ष काफी कम हैं। जिला खाद्य विपणन अधिकारी शिशिर कुमार के अनुसार, कोटे की दुकानों से बोरे खरीदने की योजना बनाई जा रही है।
आजमगढ़ में भी जूट बोरों की कमी को देखते हुए कोटेदारों से 18 से 20 रुपये प्रति बोरा की दर से बोरे खरीदने का निर्णय लिया गया है। सोनभद्र में लगभग 50 हजार बोरे उपलब्ध हैं, जबकि अतिरिक्त जरूरत के लिए शासन को मांग भेजी गई है।
वाराणसी और जौनपुर में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर
वाराणसी में फिलहाल जूट बोरों की कमी नहीं है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर प्लास्टिक बोरों का उपयोग करने की तैयारी है। वहीं जौनपुर में 3.30 लाख बोरे उपलब्ध हैं, जो अन्य जिलों की तुलना में बेहतर स्थिति दर्शाते हैं। हालांकि, यहां भी जरूरत पड़ने पर कोटेदारों से अतिरिक्त बोरे लिए जाएंगे।
बलिया में 1.50 लाख बोरे उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से 61,500 प्लास्टिक बैग हैं, जिससे जूट बोरों की वास्तविक उपलब्धता कम हो जाती है।
प्रशासन सतर्क, किसानों को राहत देने की कोशिश
जूट बोरों की कमी को देखते हुए प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे वैकल्पिक संसाधनों का उपयोग कर खरीद प्रक्रिया को बाधित न होने दें। पुराने जूट बोरे, प्लास्टिक बैग और कोटेदारों से बोरे खरीदने जैसे विकल्पों को प्राथमिकता दी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि किसानों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उन्हें अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
समय रहते समाधान नहीं हुआ तो बढ़ सकती है परेशानी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते नए जूट बोरों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हुई, तो गेहूं खरीद की गति धीमी पड़ सकती है। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में देरी होगी और मंडियों पर दबाव बढ़ सकता है।
पूर्वांचल के इन जिलों में गेहूं खरीद का सीधा संबंध हजारों किसानों की आजीविका से जुड़ा है। ऐसे में जूट बोरों की कमी को जल्द दूर करना प्रशासन के लिए बड़ी प्राथमिकता बन गया है। आने वाले दिनों में शासन स्तर पर आपूर्ति बढ़ाने और वैकल्पिक उपायों के जरिए इस संकट को संभालने की कोशिशें तेज होने की उम्मीद है।
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