रायबरेली में महंगाई का असर: खाद्य तेल और दालों की कीमतों में उछाल से रसोई का बजट बिगड़ा
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में महंगाई का असर अब आम लोगों की रसोई पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। बीते कुछ हफ्तों में खाद्य तेलों, दालों और आटे की कीमतों में लगातार वृद्धि ने मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं के दाम बढ़ने से घर का बजट बिगड़ता नजर आ रहा है।
खाद्य तेलों की कीमतों में तेज उछाल
स्थानीय बाजारों में सरसों तेल की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले जहां सरसों तेल 145 से 150 रुपये प्रति लीटर के बीच मिल रहा था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 170 से 175 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
रिफाइंड तेल भी महंगाई की मार से अछूता नहीं रहा। इसकी कीमत लगभग 150 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर हो गई है। थोक बाजार में 15 लीटर सरसों तेल के टिन का दाम 2400 रुपये से बढ़कर 2600 रुपये तक पहुंच चुका है, जिससे खुदरा बाजार पर भी असर पड़ा है।
दालों के दाम भी बढ़े
दालों की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। अरहर दाल, जो पहले करीब 110 रुपये प्रति किलो मिल रही थी, अब 120 से 130 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रही है।
इसी तरह उड़द दाल की कीमत लगभग 130 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि मूंग दाल 110 से 120 रुपये प्रति किलो में मिल रही है। इन आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं की थाली महंगी हो गई है।
आटे की कीमतों में भी बढ़ोतरी
महंगाई का असर आटे पर भी पड़ा है। पहले जहां आटा 44 रुपये प्रति किलो के आसपास मिल रहा था, अब इसकी कीमत बढ़कर 48 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इससे रोजमर्रा के भोजन की लागत में और इजाफा हुआ है।
व्यापारियों ने बताई वजह
स्थानीय व्यापारियों प्रमोद गुप्ता और बब्बू जायसवाल के अनुसार, बाजार में सीमित स्टॉक और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण कीमतों में यह उछाल आया है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी इन कीमतों को प्रभावित कर रही है।
व्यापारियों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो खाद्य तेलों और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम में आगे भी वृद्धि हो सकती है।
आम लोगों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषकर निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए घर का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है। लोग अब अपने खर्चों में कटौती करने को मजबूर हैं और सस्ते विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
सरकार से राहत की उम्मीद
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके। फिलहाल बाजार में बढ़ती कीमतों ने लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है और रसोई का संतुलन बिगाड़ दिया है।
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