रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला का प्रथम गणेश पूजन संपन्न, सनातन परंपरा के साथ शुरू हुई 45 दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा
वाराणसी: बाबा काशी विश्वनाथ जी की नगरी के गंगा पार स्थित रामनगर में विश्व प्रसिद्ध रामनगर रामलीला की आधिकारिक तैयारियों का शुभारंभ रविवार 2 अगस्त 2026 को प्रथम गणेश पूजन के साथ संपन्न हुआ। निर्धारित शुभ मुहूर्त में रामनगर चौक स्थित रामलीला पक्की पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में रामलीला के चयनित पंच स्वरूप, लीला व्यास, पुरोहितों तथा रामनगर रामलीला से जुड़े परंपरागत सेवकों की उपस्थिति में भगवान श्रीगणेश और संकटमोचन हनुमान की विधिवत पूजा अर्चना की गई। इसी के साथ वर्ष 2026 की रामनगर रामलीला की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रक्रिया का विधिवत आरंभ हो गया।
श्रावण कृष्ण चतुर्थी के शुभ योग में हुआ प्रथम गणेश पूजन
हिंदू पंचांग के अनुसार यह पूजन श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में संपन्न हुआ। धार्मिक मान्यता है कि किसी भी मांगलिक और धार्मिक आयोजन की शुरुआत विघ्न विनाशक भगवान श्रीगणेश के पूजन से करने पर समस्त कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। इसी सनातन परंपरा का निर्वहन करते हुए रामनगर रामलीला के प्रथम गणेश पूजन में भगवान गणेश तथा बजरंगबली हनुमान के मुखौटों की पूजा की गई। इसके साथ ही रामलीला में प्रयुक्त होने वाले शस्त्र, शास्त्र, गदा, मुकुट, वेशभूषा, संवाद पोथी तथा मंच निर्माण और पात्रों के श्रृंगार में उपयोग होने वाले पारंपरिक औजारों का भी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन किया गया।
रामलीला की अनूठी परंपरा आज भी अक्षुण्ण
रामनगर रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जीवंत परंपरा है जो लगभग दो सौ वर्षों से अधिक समय से निरंतर चली आ रही है। परंपरा के अनुसार जब रामलीला के लिए पंच स्वरूपों का चयन पूरा हो जाता है तभी प्रथम गणेश पूजन कराया जाता है। पूजन स्थल पर एक ओर लाल वस्त्र में सुरक्षित रखी गई रामलीला की संवाद पोथी स्थापित की जाती है तो दूसरी ओर लीला में प्रयुक्त होने वाले सभी उपकरणों को रखा जाता है। इन्हें केवल वस्तु नहीं बल्कि भगवान श्रीराम की सेवा का माध्यम मानकर पूजा जाता है। यही परंपरा रामनगर रामलीला को अन्य रामलीलाओं से अलग पहचान प्रदान करती है।
पंच स्वरूपों का हुआ वैदिक पूजन
पूजन के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के रूप में चयनित बाल स्वरूपों का चंदन तिलक कर पुष्पमाला पहनाई गई। सभी स्वरूपों को रामायण के प्रारंभिक संवादों का उच्चारण कराया गया। लीला व्यास ने उन्हें मर्यादा, अनुशासन, संवाद अदायगी, भाव भंगिमा और धार्मिक आचरण का महत्व बताया। परंपरा के अनुसार प्रत्येक स्वरूप को दक्षिणा प्रदान कर आगामी प्रशिक्षण के लिए आशीर्वाद दिया गया।
वर्ष 2026 की रामलीला के लिए श्रीराम स्वरूप के रूप में मिर्जापुर निवासी अंश पांडेय, माता सीता के रूप में पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर चंदौली निवासी रुद्र उपाध्याय, लक्ष्मण स्वरूप के रूप में वाराणसी के महमूरगंज निवासी यक्ष तिवारी, भरत स्वरूप के रूप में प्रह्लादघाट निवासी श्रेयांश उपाध्याय तथा शत्रुघ्न स्वरूप के रूप में मिर्जापुर के जमालपुर निवासी शिवांक उपाध्याय का चयन किया गया है।
बलुआघाट धर्मशाला में शुरू होगा कठिन प्रशिक्षण
प्रथम गणेश पूजन के उपरांत सभी चयनित बाल स्वरूपों को बलुआघाट धर्मशाला भेजा गया जहां वे लगभग पैंतालीस दिनों तक लीला व्यास के सानिध्य में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस दौरान उन्हें केवल संवाद याद नहीं कराए जाएंगे बल्कि मंच संचालन, भावाभिनय, चलने बैठने की मर्यादा, धार्मिक अनुशासन तथा रामलीला की परंपराओं का भी अभ्यास कराया जाएगा। यही प्रशिक्षण रामनगर रामलीला की विशिष्टता माना जाता है।
अनंत चतुर्दशी के बाद आरंभ होगा मंचन
रामनगर रामलीला की परंपरा के अनुसार प्रथम गणेश पूजन के बाद दूसरी प्रमुख गणेश पूजा अनंत चतुर्दशी पर संपन्न होगी। इसके बाद रामलीला का सार्वजनिक मंचन प्रारंभ होगा। वर्ष 2026 में रावण जन्म प्रसंग के साथ रामलीला का मंचन 25 सितंबर से आरंभ होगा। विजयदशमी के अवसर पर 20 अक्टूबर को रावण वध का ऐतिहासिक आयोजन होगा जबकि 25 अक्टूबर को भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ इस वर्ष की रामलीला का समापन होगा।
विश्व स्तर पर है रामनगर रामलीला की पहचान
रामनगर रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का जीवंत स्वरूप मानी जाती है। इसका आयोजन खुले प्राकृतिक परिवेश में विभिन्न स्थलों पर किया जाता है जहां प्रत्येक प्रसंग वास्तविक स्थान परिवर्तन के साथ मंचित होता है। यही कारण है कि देश विदेश से हजारों श्रद्धालु, शोधकर्ता, संस्कृति प्रेमी और पर्यटक प्रतिवर्ष रामनगर पहुंचकर इस अद्भुत परंपरा के साक्षी बनते हैं। इसकी मौलिक शैली, धार्मिक अनुशासन और लोक सहभागिता इसे विश्व की सबसे विशिष्ट रामलीलाओं में स्थान दिलाती है।
भक्ति और परंपरा का हुआ मंगल आरंभ
प्रथम गणेश पूजन के साथ रामनगर एक बार फिर श्रीराममय हो उठा है। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का वातावरण है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि सनातन आस्था, मर्यादा, लोक परंपरा और भारतीय संस्कृति का जीवंत उत्सव है। आने वाले दिनों में जैसे जैसे रामलीला के प्रसंग आगे बढ़ेंगे वैसे वैसे रामनगर की गलियां भगवान श्रीराम के जयघोष और भक्तिभाव से गूंज उठेंगी।
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