रामनगर में उठा अठारह बनी हाशिम का ताबूत उमड़ा जनसैलाब
वाराणसी: रामनगर स्थित हसनबाग टेंगरामोड़ पर रविवार को अठारह बनी हाशिम का ताबूत जुलजनाह अलम और मशाल की रोशनी के बीच अकीदत के साथ उठाया गया। ताबूत उठते ही हजारों की संख्या में मौजूद अज़ादारों की आंखें नम हो गईं और पूरा क्षेत्र या हुसैन या हुसैन की सदाओं से गूंज उठा। धार्मिक माहौल के बीच लोगों ने कर्बला के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और पूरे आयोजन में गम और अकीदत का वातावरण बना रहा।
मजलिस में कर्बला के शहीदों की कुर्बानी का किया गया जिक्र
ताबूत उठाए जाने से पहले आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मोहम्मद शारिब आबिदी ने कहा कि कर्बला के सभी शहीदों का जनाजा जलती हुई जमीन पर बिना गोरे और कफन के पड़ा रहा। उन्होंने कर्बला की घटना को इंसानियत के लिए सब्र त्याग और कुर्बानी की सबसे बड़ी मिसाल बताते हुए लोगों से हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। मजलिस की शुरुआत नबील जैदी ने सोजख्वानी के माध्यम से की जबकि विभिन्न शोअराए एकराम ने अपने कलाम के जरिए शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश किया।
शहीदों के ताबूत के साथ सुनाया गया शहादत का बयान
जाकिर ए अहलेबैत जीशान अली आजमी आजमगढ़ ने अठारह बनी हाशिम के ताबूत का तार्रुफ कराया। इसके बाद एक एक कर शहीदों के ताबूत लाए गए और उन्होंने प्रत्येक शहीद की शुजाअत रुखसत और शहादत का विस्तार से वर्णन किया। इस दौरान मौजूद अज़ादार गमगीन माहौल में नौहाख्वानी और सीनाजनी करते रहे।
अंजुमनों ने पेश की नौहाख्वानी और सीनाजनी
कार्यक्रम में अंजुमन जीनतुल अजा बाराबंकी अंजुमन जाफरिया कदीम बनारस अंजुमन जादे आखिरात मदनपुरा बनारस अंजुमन कासिमिया अब्बासिया बनारस तथा अंजुमन मुहाफिजे अजा रामनगर के सदस्यों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी कर शहीदाने कर्बला को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में अज़ादार अनुशासित ढंग से शामिल रहे और धार्मिक परंपराओं का पालन किया गया।
बानियों ने जताया आभार
कार्यक्रम के बानी मजहर हुसैन और उनके पेसरान ने आयोजन में शामिल सभी अज़ादारों अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोगों के सहयोग और सहभागिता से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन नदीम आब्दी रामनगरी ने किया।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे लोग
इस अवसर पर सैय्यद मजहर हुसैन मौलाना सैय्यद फरमान रजा मौलाना शहंशाह मिर्जापुरी मौलाना तहजीबुल हसन आजमी मौलाना परवेज करबलाई शायरे अहलेबैत अम्बर तुराबी सैय्यद रजी जैदी सैय्यद अख्तर रजा आब्दी सैय्यद आफताब हुसैन सैय्यद बालिस्टर हुसैन सैय्यद हेलाल रिजवी दानिश हुसैन बाबू हुसैन सैय्यद सिकंदर हुसैन इमरान इनाम रजा मोहम्मद मेहंदी समर अब्बास कासिम रजा युसूफ रिजवी रईस आजम रिजवी मोहम्मद मोहम्मद असर जैदी सुहैल रिजवी बाकर मुजतबा नदीम आब्दी मिर्जा मुशीर हसन राजू मोहम्मद आसिफ मलिक नकी हसन विक्की जहीर हसन जैदी एस हसन फातमी शुजा बाकर रजा एबाद रजा कुमैल रजा बबलू मिर्जा इकबाल मुजतबा हुसैनी राशिद आब्दी सैफ रजा बाकर आब्दी कुमैल तालिब अमन सरफराज सादिक इमाम हसन इमाम जिम्मी बशर अरशद हुसैन नादिर अली आजादार हुसैन मोहम्मद मेहंदी सल्लन सहित बड़ी संख्या में अज़ादार मौजूद रहे।
पृष्ठभूमि
मुहर्रम के अवसर पर रामनगर और आसपास के क्षेत्रों में हर वर्ष विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होकर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। अठारह बनी हाशिम का ताबूत भी इसी धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है जिसमें शहीदाने कर्बला की कुर्बानियों को याद किया जाता है और उनके संदेश को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
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