ऐतिहासिक रामनगर में शौचालय सुविधाओं का इंतजार, अधूरे निर्माण और बंद पड़े तैयार भवनों से बढ़ी लोगों की परेशानी
वाराणसी: ऐतिहासिक नगर रामनगर में सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर क्षेत्र में शौचालय निर्माण के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई परियोजनाओं की धीमी प्रगति और तैयार भवनों के उपयोग में नहीं आने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। बलुआ घाट के समीप निर्माणाधीन सार्वजनिक शौचालय का कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है, जबकि राधा किशोरी इंटर कॉलेज के पास निर्मित शौचालय लगभग तैयार होने के बावजूद अभी तक आम जनता के लिए शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जिन सुविधाओं का उद्देश्य जनसुविधा बढ़ाना है, उनका लाभ लोगों तक आखिर कब पहुंचेगा।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले नगर में मूलभूत सुविधा का अभाव
रामनगर केवल वाराणसी का एक कस्बा नहीं बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। काशी नरेश का प्रसिद्ध किला, विश्वविख्यात रामनगर रामलीला तथा देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पैतृक आवास और संग्रहालय के कारण यह नगर देश और विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचते हैं, वहीं पर्यटक और विद्यार्थी भी यहां आते रहते हैं। इसके बावजूद शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा की कमी लोगों के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है। विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बलुआ घाट स्थित शौचालय निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार पर सवाल
स्थानीय लोगों के अनुसार बलुआ घाट के निकट बन रहे सार्वजनिक शौचालय की छत की ढलाई हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन इसके बाद निर्माण कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाई दी। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि कई सप्ताह से मौके पर न तो मजदूर नियमित रूप से दिखाई दे रहे हैं और न ही निर्माण गतिविधियां तेज नजर आ रही हैं। मलहिया निवासी संतोष साहनी के अनुसार गंगा स्नान और धार्मिक गतिविधियों के लिए आने वाले लोगों को शौचालय सुविधा के अभाव में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। उनका कहना है कि कई बार लोगों को दूरस्थ स्थानों की ओर जाना पड़ता है, जिससे असुविधा के साथ साथ समय की भी बर्बादी होती है।
राधा किशोरी इंटर कॉलेज के पास तैयार भवन अब तक नहीं हुआ शुरू
रामनगर में चर्चा का दूसरा बड़ा विषय राधा किशोरी इंटर कॉलेज के समीप निर्मित सार्वजनिक शौचालय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और संरचना उपयोग के लिए तैयार दिखाई देती है। इसके बावजूद इसे अब तक जनता को समर्पित नहीं किया गया है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि जब निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है तो इसे जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सके। लंबे समय से बंद पड़े इस शौचालय को लेकर लोगों के बीच विभिन्न तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से इसके संचालन की कोई स्पष्ट समय सीमा सामने नहीं आई है।
खबर के बाद बढ़ी गतिविधियां, लेकिन नहीं दिखा अपेक्षित परिणाम
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मुद्दे को पहले भी प्रमुखता से उठाया गया था, जिसके बाद कुछ समय के लिए निर्माण कार्य में हलचल दिखाई दी। हालांकि बाद में काम की गति फिर धीमी पड़ गई। लोगों का कहना है कि योजनाओं और घोषणाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब निर्माण कार्य समय पर पूरा होकर जनता के उपयोग में आएगा। उनका मानना है कि सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में अनावश्यक देरी से आम लोगों की परेशानी बढ़ती है और योजनाओं की उपयोगिता भी प्रभावित होती है।
जनप्रतिनिधियों ने दिया शीघ्र समाधान का आश्वासन
इस संबंध में स्थानीय पार्षद रामकुमार यादव ने बताया कि शौचालय निर्माण और संचालन का मुद्दा नगर आयुक्त के समक्ष उठाया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों से इस विषय पर बातचीत हुई है और जल्द ही निर्माण कार्य पूरा कराकर आवश्यक सुविधाएं जनता को उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
जनता को परिणाम का इंतजार
रामनगर के नागरिकों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की अपेक्षा है कि सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। लोगों का कहना है कि शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा केवल एक निर्माण परियोजना नहीं बल्कि स्वच्छता, सम्मान और जनसुविधा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में बलुआ घाट स्थित अधूरे निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने और राधा किशोरी इंटर कॉलेज के पास तैयार शौचालय को जनता के लिए शुरू करने की मांग लगातार उठ रही है। अब सभी की निगाहें नगर निगम और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे इस महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे पर कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और लोगों को राहत दिलाने में कितनी सफलता प्राप्त करते हैं।
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