पटना हिंसा के बाद एक्शन मोड में पुलिस उपद्रवियों की तस्वीरें जारी कर पहचान बताने की अपील कई गिरफ्तार जांच तेज
पटना: बिहार में 22 जुलाई 2026 को गांधी मैदान और आयकर गोलंबर क्षेत्र में हुए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के बाद पटना पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल पर हमला करने पुलिस वाहनों को क्षतिग्रस्त करने तथा आम नागरिकों और मीडियाकर्मियों पर लाठी डंडे और ईंट पत्थरों से हमला करने के आरोप में कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने अब सोशल मीडिया के माध्यम से उपद्रव में शामिल बताए जा रहे संदिग्ध व्यक्तियों की तस्वीरें सार्वजनिक करते हुए आम नागरिकों से उनकी पहचान कराने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि पहचान होने के बाद संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले की जांच वीडियो फुटेज सीसीटीवी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
पुलिस ने जारी की तस्वीरें आम लोगों से मांगा सहयोग
पटना पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक अपील के अनुसार गांधी मैदान और आयकर गोलंबर इलाके में हुए उपद्रव के दौरान पुलिस बल पर हमला किया गया। सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की गई और आम लोगों के साथ साथ मीडियाकर्मियों को भी निशाना बनाया गया। पुलिस ने उपद्रव में शामिल बताए जा रहे लोगों की क्रम संख्या के अनुसार तस्वीरें जारी की हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि यदि वे इनमें से किसी व्यक्ति को पहचानते हैं तो इसकी सूचना दूरभाष संख्या 0612 2217000 अथवा मोबाइल संख्या 9939919191 पर उपलब्ध कराएं ताकि दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सके। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
प्रदर्शन कैसे हुआ हिंसक
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विभिन्न विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार यह प्रदर्शन कथित नीट परीक्षा विवाद को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शन गांधी मैदान से शुरू हुआ और आगे बढ़ने के दौरान कई स्थानों पर पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई। इसके बाद हालात बिगड़ गए और कई स्थानों पर पथराव तोड़फोड़ तथा हिंसा की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने भी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि सार्वजनिक संपत्ति और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचा।
वीडियो सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों से हो रही पहचान
पटना पुलिस ने बताया है कि घटना की जांच केवल प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तक सीमित नहीं है बल्कि सीसीटीवी फुटेज ड्रोन रिकॉर्डिंग मोबाइल वीडियो और सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो का भी विश्लेषण किया जा रहा है। साइबर इकाइयों को भी जांच में लगाया गया है ताकि हिंसा में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पहचान की जा सके। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में वीडियो की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे भी कई लोगों की पहचान होने की संभावना है।
अब तक की कार्रवाई
पटना पुलिस ने इस मामले में कई प्राथमिकी दर्ज की हैं और बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दर्जनों आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है जबकि अनेक अन्य संदिग्धों की पहचान कर उनके विरुद्ध गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने बताया है कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सभी के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी
पूरे बिहार में सुरक्षा व्यवस्था सख्त
घटना के बाद राज्य पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और प्रमुख क्षेत्रों में लगातार गश्त बढ़ा दी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों को कानून व्यवस्था पर लगातार नजर रखने तथा किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पृष्ठभूमि
पटना का गांधी मैदान राज्य की प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र माना जाता है। बड़े प्रदर्शन और रैलियां अक्सर इसी क्षेत्र से संचालित होती हैं। 22 जुलाई को आयोजित प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक बिगड़ने के बाद कानून व्यवस्था प्रभावित हुई और कई स्थानों पर हिंसा तथा पथराव की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच शुरू की और अब आम नागरिकों की सहायता से संदिग्धों की पहचान का अभियान चलाया जा रहा है।
पुलिस की अपील
पटना पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि जारी की गई तस्वीरों में किसी भी व्यक्ति की पहचान होती है तो उसकी जानकारी पुलिस नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराएं। पुलिस का कहना है कि आम जनता के सहयोग से ही उपद्रव में शामिल सभी लोगों तक पहुंचना संभव होगा और दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की अपुष्ट जानकारी या भ्रामक सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
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