ईरान-इजरायल युद्ध का असर: रामपुर में गैस संकट से बढ़ी कोयला भट्ठियों की मांग
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर अब स्थानीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के रामपुर में कमर्शियल गैस सिलिंडरों की कमी के कारण होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। गैस की किल्लत के चलते अब कारोबारी वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में कोयला भट्ठियों और लकड़ी का सहारा लेने को मजबूर हैं।
गैस संकट से दोगुनी हुई भट्ठियों की मांग
गैस सिलिंडरों की आपूर्ति बाधित होने के बाद रामपुर में कोयला भट्ठियों की मांग अचानक बढ़ गई है। पहले जहां एक दिन में एक-दो भट्ठियों के ऑर्डर मिलते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर पांच से छह तक पहुंच गई है। भट्ठी बनाने वाले कारीगरों को लगातार काम मिल रहा है, जिससे उनका कारोबार तेजी से बढ़ा है।
1500 से बढ़कर 4000 रुपये तक पहुंचे दाम
भट्ठियों की बढ़ती मांग के चलते उनके दाम भी तेजी से बढ़े हैं। पहले जो भट्ठी 1500 से 2000 रुपये में तैयार हो जाती थी, अब उसकी कीमत 3000 से 4000 रुपये तक पहुंच गई है। कारीगरों का कहना है कि कच्चे माल की कीमत भी बढ़ गई है, जिससे लागत में इजाफा हुआ है।
कोयला और लकड़ी की खपत में भारी बढ़ोतरी
गैस की कमी के कारण कोयला और जलावन लकड़ी की मांग भी तेजी से बढ़ी है। लकड़ी कारोबारियों के अनुसार, जहां पहले प्रतिदिन लगभग 2500 क्विंटल लकड़ी की खपत होती थी, अब यह बढ़कर करीब 4000 क्विंटल तक पहुंच गई है। इसी तरह कोयले की खपत भी दोगुनी हो गई है।
होटल और ढाबा संचालक अपनाने को मजबूर वैकल्पिक उपाय
कमर्शियल गैस सिलिंडर न मिलने के कारण होटल और ढाबा संचालकों को मजबूरी में भट्ठियों का उपयोग करना पड़ रहा है। एक ढाबा संचालक ने बताया कि युद्ध के तीसरे दिन ही गैस की समस्या शुरू हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने 1500 रुपये में भट्ठी लगवाई और उसी पर खाना बनाना शुरू किया।
वहीं, एक रेस्टोरेंट संचालक ने बताया कि तंदूर के स्थान पर अब भट्ठी का उपयोग किया जा रहा है, जो उन्हें करीब 2000 रुपये में मिली। एक अन्य नए रेस्टोरेंट संचालक ने भी बताया कि उन्होंने 2500 रुपये में भट्ठी लगवाई है और उसी पर सभी खाद्य पदार्थ तैयार किए जा रहे हैं।
भट्ठी बनाने वालों का कारोबार चमका
भट्ठी निर्माण से जुड़े कारीगरों के लिए यह समय लाभकारी साबित हो रहा है। स्टार ट्रेडर्स के प्रोपराइटर अख्तर जमा के अनुसार, वे डेढ़ से ढाई फीट ऊंचाई की भट्ठियां तैयार कर रहे हैं और ऑर्डर लगातार बढ़ रहे हैं। इसी तरह पुराने गंज के कारीगर नसीर अहमद ने बताया कि अब उन्हें पहले की तुलना में कई गुना अधिक काम मिल रहा है।
वैश्विक युद्ध का स्थानीय कारोबार पर प्रभाव
28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य तनाव के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसका सीधा प्रभाव स्थानीय बाजारों पर पड़ा है, जहां गैस की कमी ने व्यापारियों को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो छोटे कारोबारियों पर इसका और अधिक आर्थिक दबाव पड़ सकता है, जबकि वैकल्पिक ईंधन से जुड़े कारोबारियों को इसका लाभ मिलता रहेगा।
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