- कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी प्रकरण: थाना रोहनिया पुलिस की बड़ी कार्रवाई, भोला प्रसाद जायसवाल समेत 07 अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित
- मुकदमे का पंजीकरण और विवेचना की दिशा
- बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप का विवरण
- अपराध करने का तरीका
- अभियुक्तों का विवरण
- मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास
- वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की जांच
- पुलिस टीम की भूमिका
- आगे की कार्रवाई
कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी प्रकरण: थाना रोहनिया पुलिस की बड़ी कार्रवाई, भोला प्रसाद जायसवाल समेत 07 अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : थाना रोहनिया क्षेत्र में उजागर हुए कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी प्रकरण में पुलिस ने व्यापक विवेचना पूर्ण करते हुए मुख्य आरोपी भोला प्रसाद जायसवाल समेत कुल 07 अभियुक्तों के विरुद्ध माननीय न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित कर दिया है। यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त वाराणसी के निर्देशन में अपराधों की रोकथाम और अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत की गई। पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के निर्देशन, अपर पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के नेतृत्व तथा सहायक पुलिस आयुक्त रोहनिया एवं प्रभारी निरीक्षक रोहनिया के पर्यवेक्षण में गठित टीम ने सुनियोजित तरीके से साक्ष्य संकलित कर आरोपियों के विरुद्ध मजबूत केस तैयार किया।
मुकदमे का पंजीकरण और विवेचना की दिशा
थाना रोहनिया कमिश्नरेट वाराणसी पर मु0अ0सं0 0343/2025 धारा 8, 21, 25, 29 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अभियुक्तगण संगठित तरीके से कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध खरीद-फरोख्त कर रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल गठित किया गया, जिसने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, बैंकिंग लेनदेन, परिवहन रिकॉर्ड और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ीं।
विवेचना के दौरान ई-वे बिल, बैंक स्टेटमेंट, नगद जमा पर्चियां, विभिन्न बैंकों की सीसीटीवी फुटेज, आयकर विवरणी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वाहनों के टोल डेटा, विधि विज्ञान प्रयोगशाला रामनगर की रिपोर्ट, औषधि निरीक्षक की परीक्षण रिपोर्ट तथा संबंधित दवा कंपनियों से प्राप्त दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। बैंक प्रबंधकों, कैशियरों तथा स्वतंत्र गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए। इन सभी साक्ष्यों से यह प्रमाणित हुआ कि अभियुक्तगण बड़े पैमाने पर अवैध तस्करी में संलिप्त थे।
बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप का विवरण
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में कोडीनयुक्त कफ सिरप बरामद किया। बरामदगी में PHENSEDYL COUGH SYRUP 100 ML की कुल 18,600 शीशियां तथा ESKUF 100 ML COUGH SYRUP की कुल 75,150 शीशियां शामिल हैं। जांच में पुष्टि हुई कि इन दवाओं की वैध आपूर्ति कागजों में दर्शाई जाती थी, जबकि वास्तविक माल को अवैध रूप से अन्य राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता था।
अपराध करने का तरीका
विवेचना से यह तथ्य प्रकाश में आया कि अभियुक्तों ने कागजी और फर्जी फर्म बनाकर हवाला के माध्यम से प्राप्त नगद धनराशि को वैध लेनदेन का रूप दिया। पहले नकदी विभिन्न फर्मों के बैंक खातों में जमा कराई जाती थी, फिर उसे अलग-अलग खातों के माध्यम से शैलि ट्रेडर्स के खाते में स्थानांतरित किया जाता था। इस प्रकार अवैध आय को वैध व्यापारिक लेनदेन के रूप में प्रस्तुत किया जाता था।
कोडीनयुक्त कफ सिरप को गुप्त स्थानों पर छिपाकर रखा जाता था और आवश्यकता पड़ने पर ट्रांसपोर्ट के जरिए सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता था। जांच में संकेत मिले कि इस नेटवर्क के तार बांग्लादेश सीमा तक जुड़े थे, जहां माल ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। इस अवैध कारोबार से अर्जित धन से चल-अचल संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया। इस संबंध में धारा 68-एफ एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत भी कार्रवाई की गई है।
अभियुक्तों का विवरण
प्रकरण में आरोप पत्रित अभियुक्तों में आजाद जायसवाल, महेश कुमार सिंह, शिवाकांत उर्फ शिव, स्वपलिन केसरी, दिनेश कुमार यादव, आशीष यादव तथा भोला प्रसाद जायसवाल शामिल हैं। इनमें से भोला प्रसाद को शैलि ट्रेडर्स का प्रोपराइटर बताया गया है। सभी अभियुक्तों के विरुद्ध संकलित साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।
मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास
मुख्य आरोपी भोला प्रसाद के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट और अन्य धाराओं में वाराणसी, सोनभद्र, जौनपुर, चंदौली, झारखंड सहित कई जनपदों में अनेक मुकदमे दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त सह अभियुक्तों के विरुद्ध भी विभिन्न थानों में मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े प्रकरण पंजीकृत पाए गए। पुलिस अन्य राज्यों में दर्ज मामलों की जानकारी भी एकत्र कर रही है।
वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की जांच
जांच के दौरान बैंक खातों में संदिग्ध जमा, नकद लेनदेन और परस्पर फर्मों के बीच हुए ट्रांसफर का विश्लेषण किया गया। आयकर रिटर्न और जीएसटी अभिलेखों का मिलान कर यह स्पष्ट किया गया कि कारोबार कागजी था, जबकि वास्तविक गतिविधि अवैध तस्करी से जुड़ी थी। अर्जित धन से खरीदी गई संपत्तियों की सूची तैयार कर नियमानुसार जब्ती और फ्रीज की कार्रवाई भी की गई।
पुलिस टीम की भूमिका
इस पूरे प्रकरण में अपर पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन सुश्री नीतू कदयान के निर्देशन में कार्य किया गया। सहायक पुलिस आयुक्त रोहनिया श्री संजीव शर्मा, प्रभारी निरीक्षक रोहनिया श्री राजू सिंह तथा एसआईटी प्रभारी उपनिरीक्षक भरत चौधरी सहित टीम के अन्य सदस्यों ने तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर मजबूत केस तैयार किया। बैंकिंग और डिजिटल डेटा विश्लेषण में विशेष तकनीकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई अवैध मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित होने के बाद अभियोजन पक्ष प्रभावी पैरवी करेगा ताकि दोषियों को कठोर दंड मिल सके। साथ ही नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्ध व्यक्तियों और फर्मों की भी जांच जारी है।
पुलिस आयुक्तालय वाराणसी ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में इस प्रकार के संगठित अपराधों पर निगरानी और कड़ी की जाएगी। अवैध कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा और कानून के दायरे में रहकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
