भ्रामक विज्ञापन मामले में सख्ती, सलमान खान के खिलाफ वारंट तामील के लिए विशेष टास्क फोर्स के निर्देश
जयपुर, 26 मार्च 2026। राजश्री पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन से जुड़े मामले में जिला उपभोक्ता आयोग क्रम 2 ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने फिल्म अभिनेता सलमान खान के खिलाफ जारी जमानती वारंट की तामील सुनिश्चित कराने के लिए पुलिस प्रशासन को विशेष टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग का यह आदेश मामले की गंभीरता और बार बार वारंट जारी होने के बावजूद अनुपालन न होने की स्थिति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुंबई जाकर वारंट तामील कराने के निर्देश
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि गठित की जाने वाली विशेष टास्क फोर्स व्यक्तिगत रूप से मुंबई जाकर सलमान खान पर जारी तृतीय जमानती वारंट की तामील कराएगी। साथ ही आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि वारंट की तामील में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है या आगामी सुनवाई जो 6 अप्रैल को निर्धारित है उस दिन सलमान खान और संबंधित कंपनी के निदेशक उपस्थित नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है।
आयोग ने जताई कड़ी आपत्ति
यह आदेश आयोग अध्यक्ष जी एल मीणा तथा सदस्य सुप्रिया अग्रवाल और अजय कुमार की पीठ ने योगेन्द्र सिंह द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई के दौरान पारित किया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी व्यक्ति का सेलिब्रिटी दर्जा उसे कानून से ऊपर होने का अधिकार नहीं देता। लगातार जमानती वारंट की तामील में हो रही देरी को आयोग ने न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया है।
कानून की अवहेलना पर सख्त टिप्पणी
आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस प्रकार की स्थिति कानून का मजाक बनाने के समान है। इससे आम उपभोक्ताओं का न्यायिक संस्थाओं पर से विश्वास कमजोर हो सकता है। आयोग ने स्पष्ट संकेत दिया कि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या आदेशों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आवश्यक होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी जारी हो चुके हैं वारंट
मामले के रिकॉर्ड के अनुसार सलमान खान के खिलाफ 15 जनवरी, 9 फरवरी और 16 मार्च को क्रमशः जमानती वारंट जारी किए जा चुके हैं। वहीं कंपनी के निदेशक राकेश कुमार चौरसिया और दिनेश कुमार चौरसिया के खिलाफ 11 फरवरी को जमानती वारंट जारी किया गया था। इसके बावजूद आयोग के अंतरिम आदेशों का पालन नहीं किया गया और कथित भ्रामक विज्ञापन पर रोक के निर्देशों की अनदेखी जारी रही।
परिवादी ने लगाए भ्रामक प्रचार के आरोप
परिवादी योगेन्द्र सिंह ने अपने आवेदन में राजश्री पान मसाला के विज्ञापन को भ्रामक बताते हुए उस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि उत्पाद को केसर युक्त बताया जा रहा है, जबकि उसकी कीमत के अनुसार उसमें वास्तविक केसर का उपयोग संभव नहीं है। इस आधार पर उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया गया है।
6 अप्रैल की सुनवाई पर नजर
अब इस मामले में 6 अप्रैल को होने वाली सुनवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग इस दिन यह तय कर सकता है कि आदेशों की अवहेलना के चलते आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आयोग के इस सख्त रुख को न्यायिक प्रक्रिया के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
यह मामला न केवल भ्रामक विज्ञापनों पर नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायिक आदेशों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
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