वाराणसी के लहरतारा क्षेत्र में आज रविवार को संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान एवं भव्य मेले का आयोजन किया गया, जिसमें भाग लेने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु और दर्शनार्थी पहुंचे। गुरु रविदास की जन्मस्थली माने जाने वाले लहरतारा में जयंती के दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का वातावरण देखने को मिला। सुबह से ही क्षेत्र में लोगों का आना शुरू हो गया है।
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ साथ दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने गुरु रविदास मंदिर परिसर में दर्शन पूजन किया और भजन कीर्तन व सत्संग में भाग लिया। वक्ताओं ने संत रविदास के समानता, कर्म और मानवता पर आधारित विचारों को लोगों के सामने रखा, जिन्हें श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक सुना।

इस मेले का सफल आयोजन समिति श्री संत शिरोमणि गुरु रविदास सेवा समिति के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार के नेतृत्व में किया गया। प्रबंधक श्री प्रभु प्रसाद द्वारा मेले की समस्त व्यवस्थाओं की निगरानी की गई। उपाध्यक्ष श्री चंद्र भूषण भारती ने आयोजन को व्यवस्थित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपसचिव श्री संदीप कुमार द्वारा कार्यक्रमों के संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का समन्वय किया गया। आयोजन समिति के सलाहकार श्री रमेश कुमार ने पूरे कार्यक्रम को लेकर मार्गदर्शन प्रदान किया, जिससे यह आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका।
धार्मिक कार्यक्रमों के साथ साथ मेले में मनोरंजन की भी विशेष व्यवस्था की गई थी। बच्चों और युवाओं के आकर्षण के लिए मेले में कई प्रकार के झूले और बच्चों के मनोरंजन के लिए अन्य संसाधन लगाए गए, जहां पूरे दिन चहल पहल बनी रही। छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों तक ने मेले का आनंद लिया। इसके अलावा मेले में खिलौनों, मिठाइयों, चाट पकौड़ी और पारंपरिक खान पान की दुकानें भी लगाई गई, जिससे मेले का वातावरण और भी जीवंत हो गया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की गई थी। स्वयंसेवकों की मदद से भीड़ को नियंत्रित किया गया और आने-जाने वाले मार्गों पर उचित व्यवस्था बनाए रखी गई। पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की भी समुचित व्यवस्था की गई ताकि किसी को किसी प्रकार की असुविधा न हो पाएं।
मेले में पहुंचे लोगों का कहना था कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती का यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश भी देता है। यहां हर वर्ग और समुदाय के लोग एक साथ जुटते हैं। आयोजन समिति ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को संत रविदास जी के विचारों से परिचित कराने का कार्य करते हैं। सुबह से रात तक चलने वाले कार्यक्रमों के साथ यह मेला श्रद्धा, उल्लास और उत्साह का वातावरण बनाए हुए है।
